
आगरा। आगरा में मेट्रो का काम शहर की रफ्तार को ‘जाम’ कर रहा है! एमजी रोड पर मेट्रो निर्माण के चलते लगी बैरिकेडिंग ने यातायात को ‘धीमा’ कर दिया है, जिससे लोग रोज घंटों जाम में फंसने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन ने इस समस्या से निपटने के लिए वैकल्पिक रास्तों का प्लान तो बनाया, लेकिन सबसे बड़ी चूक ये हुई कि इन रास्तों पर कोई संकेतक (साइनबोर्ड) नहीं लगाए गए! नतीजा ये कि लोग इन वैकल्पिक रास्तों से अनजान हैं और ‘जाम’ के दलदल में फंसकर परेशान हो रहे हैं।
एमजी रोड पर ‘संकरा’ रास्ता, स्कूलों की छुट्टी में ‘महाजाम’
प्रतापपुरा चौराहे से सूरसदन तक एमजी रोड पर मेट्रो का काम चल रहा है, जिससे कई जगह बैरिकेडिंग लगा दी गई है। इसने रोड को इतना ‘संकरा’ कर दिया है कि रोज जाम लगना आम बात हो गई है। स्कूलों की छुट्टी के समय तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब बच्चों के वाहन भी घंटों जाम में फंसे रहते हैं।
प्लान तो बना, पर ‘दिशाहीन’ हुए वाहन चालक!
जिला प्रशासन ने जाम से राहत के लिए कुछ वैकल्पिक रास्ते सुझाए थे, लेकिन बिना संकेतकों के वे किसी काम के नहीं आ रहे:
- धाकरान चौराहे से हरीपर्वत की ओर जाने वाले वाहनों के लिए: सुभाष पार्क के सामने पंचकुइयां रोड से लोहामंडी होते हुए जाने का मार्ग तय हुआ था। लेकिन, यहां कोई संकेतक नहीं लगाया गया, जिससे लोग इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे।
- सूरसदन चौराहे से फतेहाबाद रोड जाने के लिए: पालीवाल पार्क से यमुना किनारा और हाथी घाट होते हुए फतेहाबाद रोड पर जाने का मार्ग सुझाया गया था। यहां भी संकेतक न होने से लोग जाम लगने पर भ्रमित हो जाते हैं और सही रास्ता नहीं ढूंढ पाते।
मदिया कटरा निवासी मनोज मिश्रा ने बताया कि मदिया कटरा पर रोज जाम में फंसना पड़ रहा है। 5 मिनट का रास्ता 30 मिनट में तय होता है। उनका कहना है कि अंदरूनी मार्ग भी वाहनों के बढ़ते दबाव को झेल नहीं पा रहे हैं।
अब सवाल यह है कि प्रशासन ने प्लान तो बना लिया, लेकिन उसे ज़मीन पर उतारने में इतनी बड़ी लापरवाही क्यों बरती? जब तक सही संकेतक नहीं लगेंगे, तब तक आगरा की जनता को इस ‘जाम’ के जाल से मुक्ति मिलना मुश्किल है।