
आगरा। आगरा में फसलों के लिए प्रयोग होने वाले यूरिया के दुरुपयोग की आशंका पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला प्रशासन ने 10 औद्योगिक इकाइयों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह आशंका जताई गई थी कि पेंट, केमिकल, बायोफ्यूल और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में सब्सिडी वाले यूरिया का अवैध रूप से प्रयोग किया जा रहा है। टीम ने छापेमारी के दौरान सभी 10 औद्योगिक इकाइयों से एक-एक सैंपल भी कलेक्ट किया है, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।
इसके अतिरिक्त, प्रशासन ने 400 यूरिया विक्रेताओं को नोटिस जारी कर उनकी बिक्री का विस्तृत ब्योरा तलब किया है।
डीएम द्वारा गठित टीमों ने की छापेमारी
यह कार्रवाई जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी द्वारा गठित टीमों ने यूरिया के दुरुपयोग की आशंका पर की है।
जिन प्रमुख इकाइयों पर छापेमारी की गई, वे निम्न हैं:
- फाउंड्री नगर स्थित मैसर्स अनिल पेंट्स
- फाउंड्री नगर स्थित मैसर्स मिली अग्रवाल
- रामबाग पर स्थित मैसर्स बंसल एग्रो फूड
- रामबाग पर स्थित मैसर्स शक्ति फीड्स
- रहनकलां रोड पर स्थित मैसर्स विन्को पेंट्स
- फतेहाबाद रोड पर स्थित मैसर्स बालमुकंद रमेश चंद सोप मैन्युफैक्चरर
- शास्त्रीपुरम औद्योगिक क्षेत्र में स्थित मैसर्स सेफकोन लाइफ साइंसेज
- सिकंदरा साइट सी स्थित मैसर्स स्टक केमिकल प्राइवेट लिमिटेड
- सिकंदरा साइट सी स्थित मैसर्स आरआर बायोफ्यूल इंडस्ट्रीज
- कुबेरपुर स्थित मैसर्स सलीन पेंट्स
यूरिया के दुरुपयोग की शिकायतें मिली थीं
डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बताया कि यूरिया एक सब्सिडी वाला उत्पाद है, जिसे सरकार मुख्य रूप से किसानों के लिए खरीदती है। ऐसी शिकायतें लगातार शासन तक पहुँच रही थीं कि कुछ औद्योगिक इकाइयाँ अपने उत्पादों में नाइट्रोजिनस कंपाउंड या फार्मेल्डिहाइड के स्थान पर किसानों को वितरित किए जाने वाले यूरिया का प्रयोग कर रही हैं।
इन शिकायतों के मद्देनजर, डीएम ने ऐसी औद्योगिक इकाइयों की जांच के लिए तीन विशेष टीमें गठित की हैं, जिनमें यूरिया में मिलने वाले केमिकल का प्रयोग होता है। सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।