
आगरा में मंगलवार रात हुए सड़क हादसे में 19 वर्षीय नैतिक की मौत के बाद उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जहां पुलिस और प्रत्यक्षदर्शी मौत की वजह सड़क पर हुए गड्ढे को बता रहे हैं, वहीं परिवार का दर्द जुदा है। टीम जब नैतिक के घर बलकेश्वर पहुंची, तो वहां का मंजर दिल दहला देने वाला था। नैतिक की मां बेसुध थीं, बहन के आंसू रुक नहीं रहे थे, और पास में बैठे लकवाग्रस्त पिता बेटे का नाम लेकर विलाप कर रहे थे।
“मौत की वजह गड्ढा नहीं, कैंटर था”
मृतक के मामा रोहित ने कहा कि नैतिक की मौत गड्ढे की वजह से नहीं, बल्कि तेज रफ्तार कैंटर की टक्कर से हुई है। उन्होंने बताया, “जब हम घटनास्थल पर पहुंचे, तो जहां दुर्घटना हुई थी, वहां से गड्ढा करीब 100 से 200 मीटर दूर था।” उन्होंने आरोप लगाया कि नैतिक की मौत सिर्फ और सिर्फ कैंटर की लापरवाही के कारण हुई है। रोहित ने बताया कि गणेश उत्सव के बाद रात 11 बजे नैतिक घर से निकला था। उसकी मां ने उसे रोकने की कोशिश भी की थी, लेकिन वह रुका नहीं। कुछ देर बाद पुलिस ने हादसे की जानकारी दी।
पिता लकवाग्रस्त, नैतिक ही था घर का सहारा
स्थानीय लोगों ने बताया कि नैतिक का परिवार 15 दिन पहले ही बलकेश्वर में किराए पर रहने आया था। वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। नैतिक एक ज्वैलर्स की दुकान पर ₹10,000 की मासिक तनख्वाह पर काम करता था। उसके पिता दीपक बंसल लकवाग्रस्त होने के कारण बिस्तर पर हैं। उसकी मां मीनू गृहिणी हैं और बहन अर्पिता 8वीं कक्षा में पढ़ रही है। परिवार का सारा खर्च और छोटी बहन के भविष्य की चिंता नैतिक ही करता था।
प्रशासन से मुआवजे की मांग
नैतिक की मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है। परिवार ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है, ताकि बहन अर्पिता की पढ़ाई और शादी का खर्च उठाया जा सके। उनका कहना है कि नैतिक ही घर का एकमात्र सहारा था, और उसके जाने के बाद उनका भविष्य अंधकार में है।
इस बीच, स्थानीय लोगों ने बताया कि जिस वाटर वर्क्स से बेलनगंज के बीच के गड्ढे को हादसे का कारण बताया जा रहा था, उसे सुबह 10 बजे के करीब भर दिया गया। यह कार्रवाई घटना के बाद प्रशासन की तत्परता पर भी सवाल उठाती है।
