मुआवजे की मांग पर अड़ा कर्मचारी, लांबा फुटवियर फैक्ट्री के बाहर 12 दिनों से धरना जारी

आगरा। आगरा के जनूथा गाँव निवासी राजकुमार अपनी माँगों को लेकर पिछले 12 दिनों से लांबा फुटवियर इंडस्ट्रीज फैक्ट्री के गेट पर धरना दे रहे हैं। राजकुमार एक सड़क हादसे में घायल हो गए थे और अब मुआवजे की मांग कर रहे हैं। यह घटना 19 जनवरी की है, जब राजकुमार अपनी नाइट ड्यूटी पूरी कर फैक्ट्री की पिकअप वैन से घर लौट रहे थे। दक्षिणी बाईपास पर हुए उस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी और 16 लोग घायल हुए थे, जिनमें राजकुमार भी शामिल थे। हादसे के समय फैक्ट्री प्रबंधन ने राजकुमार के इलाज का पूरा खर्च उठाने का भरोसा दिया था, लेकिन हादसे को आठ महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें न तो नौकरी वापस मिली है और न ही कोई मुआवजा दिया गया है। इसी के विरोध में राजकुमार अपने परिवार के साथ फैक्ट्री के बाहर शाम 6 बजे से धरना दे रहे हैं। पीड़ित राजकुमार का आरोप है कि फैक्ट्री संचालक उनकी अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें 5 लाख रुपये का मुआवजा नहीं मिल जाता, उनका यह धरना जारी रहेगा। इस मामले में फैक्ट्री प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनके फोन नहीं उठे।

आगरा: अछनेरा गौशाला में गाय की मौत पर हंगामा, भूख से मौत के आरोप

आगरा। आगरा के अछनेरा स्थित कान्हा गौशाला में गायों की देखभाल को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सभासदों और समाजसेवियों ने गौशाला प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद आज एक गाय की कथित तौर पर भूख से मौत होने पर उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। सभासदों का आरोप है कि गौशाला में गायों की ठीक से देखभाल नहीं हो रही है और इसी लापरवाही की वजह से आज एक गाय की मौत भूख से हो गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अछनेरा नगर पालिका अध्यक्ष लोगों को गौशाला के अंदर नहीं जाने देते, जिससे गायों की असली हालत का पता नहीं चल पाता। दूसरी तरफ, अछनेरा के अधिशासी अधिकारी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने बताया कि जिस गाय की मौत हुई, वह काफी समय से बीमार थी और उसका इलाज भी चल रहा था। अधिकारी ने इस बात से इनकार किया कि किसी भी गाय की मौत भूख के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद गौशाला की देखरेख के लिए एक 15 सदस्यीय समिति बनाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन सभासदों ने इसे अस्वीकार कर दिया था।

आगरा में एबीवीपी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, पुलिस ने रोका तो सड़क पर लेट गए

आगरा। बाराबंकी में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में गुरुवार को आगरा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। बारिश के बावजूद कार्यकर्ता पीछे नहीं हटे और सुभाष पार्क से पैदल मार्च निकालकर जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कलेक्ट्रेट पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की तो कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक हो गई। विरोध जताते हुए कार्यकर्ता सड़क पर ही लेट गए, जिससे एमजी रोड पर करीब दो घंटे तक लंबा जाम लगा रहा। लोगों को इस दौरान भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे कि जब तक जिलाधिकारी या पुलिस कमिश्नर खुद आकर ज्ञापन नहीं लेंगे, तब तक वे प्रदर्शन जारी रखेंगे। बाद में, एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने डीसीपी सिटी सोनम कुमार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बाराबंकी में लाठीचार्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। डीसीपी सिटी द्वारा समझाने और उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद ही कार्यकर्ता एमजी रोड से हटे, जिसके बाद यातायात व्यवस्था सामान्य हो पाई।

आगरा में अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम टीम को लौटना पड़ा, स्थानीय लोगों ने किया विरोध

आगरा। आगरा के आवास विकास सेक्टर-7 में बुधवार को नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई भारी हंगामे के कारण रुक गई। जोनल अधिकारी सी.पी. सिंह के नेतृत्व में गई निगम की टीम को स्थानीय लोगों के विरोध के बाद बिना कार्रवाई किए ही खाली हाथ लौटना पड़ा। यह कार्रवाई इलाके के एक निवासी ललित अग्रवाल की आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत के बाद शुरू हुई थी। उन्होंने शिकायत में कहा था कि कई लोगों ने अपने घरों के सामने अवैध रूप से रैंप बना लिए हैं, जिससे राहगीरों और वाहनों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। जैसे ही नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची, स्थानीय लोगों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। लोगों ने आरोप लगाया कि उनके नाम से की गई शिकायत फर्जी है और शिकायतकर्ता ललित अग्रवाल ने उनके जाली हस्ताक्षर कर दिए हैं। अधिकारियों ने लोगों को समझाया कि सरकारी भूमि पर रैंप बनाना अवैध है और इसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। हालांकि, तनाव बढ़ने पर निगम टीम को पीछे हटना पड़ा। लोगों ने कहा कि वे खुद ही रैंप हटा लेंगे और निगम को कार्रवाई नहीं करने देंगे। नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने कहा है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने लोगों को खुद अतिक्रमण हटाने का मौका दिया है, लेकिन अगर तय समयसीमा में रैंप नहीं हटे तो निगम सख्त कार्रवाई करेगा।

आगरा: राजामंडी स्थित लाभचंद मार्केट में दुकानदारों ने पूर्व पट्टाधारकों के खिलाफ खोला मोर्चा, अवैध वसूली का आरोप

आगरा। आगरा के राजामंडी स्थित लाभचंद मार्केट में दुकानदारों ने पूर्व पट्टाधारकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दुकानदारों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा 5 अप्रैल 2025 को अवैध पट्टा निरस्त किए जाने के बावजूद, पूर्व पट्टाधारक जालसाजी और षड़यंत्र के तहत उनसे अवैध किराये की वसूली कर रहे हैं। अवैध वसूली के खिलाफ बैठक लाभचंद मार्केट व्यापार समिति के बैनर तले आयोजित एक बैठक में दुकानदारों ने इस अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाई। समिति के अध्यक्ष अशोक जसवानी ने बताया कि पूर्व पट्टाधारक सड़क पर स्थित दुकानों, फुटपाथ पर बने अवैध पिलर और पब्लिक पार्क पर अवैध कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र भी दिया है, जिसमें सड़क पर बनी दुकानों के दुकानदारों के पुनर्वास की मांग की गई है। महामंत्री नरेंद्र अमरनानी ने आरोप लगाया कि दुकानों और समस्त अवैध निर्माण, जिसमें पब्लिक पार्क और अवैध होटल भी शामिल हैं, से किराया वसूलना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। उन्होंने इस मामले में नगर निगम और एडीएम पर ढील देने और अनुचित कार्रवाई करने का भी आरोप लगाया। दुकानदारों ने की रिसीवर नियुक्त करने की मांग दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि लाभचंद मार्केट में स्थित सभी दुकानों और अवैध निर्माणों पर एक न्यायसंगत रिसीवर नियुक्त किया जाए। उनका कहना है कि इस रिसीवर के जरिए अवैध वसूली पर तुरंत रोक लगनी चाहिए और दुकानदारों को न्याय मिलना चाहिए।

आगरा में मीट विक्रेताओं के खिलाफ हंगामा: नाली में अवशेष फेंकने से दुर्गंध, पुलिस ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

आगरा। आगरा के थाना ट्रांस यमुना क्षेत्र के कालिंदी विहार में मीट विक्रेताओं की मनमानी से परेशान दुकानदारों ने मंगलवार को जमकर हंगामा किया। दुकानदारों का आरोप है कि मीट विक्रेता जानवरों के बचे हुए अवशेष और कचरा नालियों में फेंक देते हैं, जिससे पूरे इलाके में भयंकर दुर्गंध फैल रही है। नाली में मिले जानवरों के अवशेष यह घटना तब सामने आई जब सुबह टेडी बगिया बाजार में बंसल बर्तन भंडार के मालिक मनीष अग्रवाल को अपनी दुकान के पास नाली से दुर्गंध आई। जांच करने पर उन्होंने देखा कि नाली में जानवरों के अवशेष पड़े हुए थे, जिसके बाद व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। व्यापारियों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन मीट विक्रेता खुले में मांस बेचने और कचरा फेंकने की अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। इस दुर्गंध के कारण राहगीरों को मुंह पर कपड़ा रखकर गुजरना पड़ता है और दुकानदारों के लिए अपनी दुकान पर बैठना भी मुश्किल हो गया है। हंगामा बढ़ता देख मीट विक्रेता अपनी दुकानें बंद करके भाग गए। सूचना मिलने पर थाना अध्यक्ष रोहित कुमार मौके पर पहुंचे और व्यापारियों को जल्द से जल्द कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। थाना अध्यक्ष ने कहा कि सभी मीट विक्रेताओं के लाइसेंस की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आगरा में वकीलों की ‘रथयात्रा’ को पुलिस ने रोका: पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने की मांग पर एमजी रोड पर प्रदर्शन, वकील बेहोश

आगरा। आगरा में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने और यहां हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर वकीलों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखा। सोमवार को अधिवक्ताओं ने दीवानी चौराहे से कलेक्ट्रेट तक रथयात्रा निकाली, लेकिन पुलिस ने उन्हें एमजी रोड पर बीच में ही रोक दिया। इस दौरान पुलिस और वकीलों के बीच जमकर नोकझोंक और खींचतान हुई, जिसके बाद अधिवक्ता सड़क पर ही बैठकर प्रदर्शन करने लगे। पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी जैसे ही लगभग 40-50 वकीलों का एक समूह घोड़े की गाड़ी के साथ अपनी ‘जनरथ यात्रा’ लेकर निकला, कलेक्ट्रेट से लगभग एक किलोमीटर पहले पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस बीच हुई धक्का-मुक्की और बहस के बाद, वकीलों ने विरोध में बीच सड़क पर धरना शुरू कर दिया, जिससे एमजी रोड पर लंबा जाम लग गया। प्रदर्शन के दौरान एक वकील गर्मी से बेहोश हो गए, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें पानी पिलाकर संभाला। “अलग राज्य बनने से जनता को होगा लाभ” अधिवक्ता राजीव कुमार सोनी ने बताया कि यह रथयात्रा केंद्र सरकार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर निकाली गई है। उन्होंने कहा कि अगर यह अलग राज्य बनता है, तो आगरा में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना हो सकेगी, जिससे प्रदेश की जनता को बहुत फायदा मिलेगा। वकीलों ने कहा कि वे इस यात्रा के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे हैं और उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन भी दिया है। हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का यह प्रदर्शन लगातार तेज हो रहा है। उनका मानना है कि पश्चिमी यूपी के अलग राज्य बनने से ही उनकी यह पुरानी मांग पूरी हो सकती है।

आगरा में मूर्ति विवाद: हिंदू महासभा ने नगर निगम पर लगाया एक धर्म के प्रचार का आरोप

आगरा। आगरा में रविवार को अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने नगर निगम पर शहर में सिर्फ सनातन धर्म से जुड़ी प्रतिमाएं लगाने को लेकर नाराजगी जताई है। हिंदूवादी नेताओं ने इसे एक धर्म का प्रचार बताते हुए नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है और मांग की है कि शहर में अन्य धर्मों से संबंधित प्रतिमाएं भी लगाई जाएं। क्या है पूरा मामला? नगर निगम ने शहर के कई चौराहों पर कबाड़ से बने राम मंदिर का मॉडल और भगवान शिव व उनके डमरू की प्रतिमाएं लगाई हैं। हिंदूवादी संगठनों का कहना है कि आगरा में सभी धर्मों के लोग रहते हैं, और केवल एक धर्म की प्रतिमाएं लगाना बाकी समुदायों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। नेताओं ने मांग की है कि जिस तरह से हिंदू धर्म के लोगों को खुश करने के लिए राम मंदिर का मॉडल बनाया गया है, उसी तरह शहर में मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों को खुश करने के लिए मक्का मदीना और ईशू मसीह की प्रतिमाएं भी बनवाई जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि इन प्रतिमाओं को उन्हीं कलाकारों से बनवाया जाए, जिन्होंने राम मंदिर का मॉडल तैयार किया है।

आगरा में आफत बनी बारिश: सपा सांसद रामजीलाल सुमन का धरना भीगा

आगरा। आगरा में सोमवार को हुई तेज बारिश ने लोगों को परेशान कर दिया, जिसका असर राजनीतिक कार्यक्रमों पर भी देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन केंद्र सरकार के खिलाफ गांधी स्मारक पर धरना देने पहुंचे थे, लेकिन तेज बारिश के चलते उन्हें अपने समर्थकों के साथ खुले में बैठने के बजाय गांधी स्मारक के हॉल में धरना देना पड़ा। सांसद और उनके करीब 250 समर्थक एक पोस्टर में वीर सावरकर की तस्वीर को महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह से ऊपर लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं। सांसद ने लगाए गंभीर आरोप रामजीलाल सुमन ने आरोप लगाया कि पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी पोस्टर में महात्मा गांधी से ऊपर किसी का फोटो लगाना “मानसिक विकृति” को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार आरएसएस (RSS) की तानाशाही नीतियों पर चल रही है। सांसद ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 10 सालों में 193 विपक्षी नेताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए, लेकिन सिर्फ 2 पर ही दोष सिद्ध हो पाया। उन्होंने कहा कि इसका सीधा मतलब है कि सरकार इन एजेंसियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ करती है।

आगरा में वैश्य समाज एकजुट: बबली गर्ग को न्याय दिलाने के लिए लामबंद, पुलिस कमिश्नर से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल

आगरा। आगरा में वैश्य समाज ने कालिंदी विहार निवासी बबली गर्ग को न्याय दिलाने के लिए कमर कस ली है। सोमवार, 11 अगस्त 2025 को लोहा मंडी स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में अग्रवाल युवा संगठन रजि. आगरा के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल के नेतृत्व में सर्व वैश्य समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य बबली गर्ग को यह आश्वासन देना था कि समाज तन, मन, धन से उनके साथ खड़ा है और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, वैश्य समाज चुप नहीं बैठेगा। क्या है बबली गर्ग का मामला? बबली गर्ग पत्नी देवीचरण, कालिंदी विहार में मकान नंबर 41, कान्हा कृष्ण रेजिडेंसी, आर बी डिग्री कॉलेज के पीछे किराए पर रहती हैं। वह पहले चौका-बर्तन का काम करती थीं और अब खाने के टिफिन बनाकर सप्लाई करती हैं। उनके पति ड्राइवर हैं, जिन्हें दो बार हार्ट अटैक आ चुका है। उनके चार बच्चे भी हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति नाजुक है। बबली गर्ग ने कालिंदी विहार में 50 गज का एक मकान विक्रेता प्रेमलता पत्नी शिशुपाल सिंह से खरीदा था। रजिस्ट्री के समय ₹7,70,000 का चेक बबली गर्ग ने प्रेमलता को दिया था। रजिस्ट्री होने के बाद, प्रेमलता ने कहा कि पैसे तुरंत बैंक में जमा करने होंगे, नहीं तो बैंक मकान को नीलाम कर देगा। उसने बबली गर्ग से ₹7,70,000 नकद देने और चेक वापस लेने को कहा। बबली गर्ग ने चेक वापस ले लिया और ₹7,70,000 नकद प्रेमलता को दे दिए, जो बैंक में जमा भी हो गए। इसकी लिखा-पढ़ी ₹10 के नोटरी के स्टांप पर की गई थी। अब बबली गर्ग के पास सभी ओरिजिनल रजिस्ट्री की कॉपियां और ₹7,70,000 का वापसी का चेक भी है। बबली गर्ग के पास मकान का कब्जा भी था, जिसमें उन्होंने अपना सामान रखा हुआ था। लेकिन, 16 मार्च 2025 को जब बबली गर्ग अपनी रिश्तेदारी से लौटीं, तो देखा कि प्रेमलता और उसके कुछ लोगों ने ताला तोड़कर मकान पर कब्जा कर लिया है और उनके सारे सामान की चोरी भी कर ली है। बबली गर्ग का कहना है कि यह सीधा-सीधा कब्जा और डकैती का मामला है। पुलिस और स्थानीय विधायक पर गंभीर आरोप बबली गर्ग ने बताया कि महीनों चक्कर लगाने के बाद पुलिस ने दो महीने की जांच के बाद कहीं जाकर एफआईआर दर्ज की। जब पुलिस मकान पर पहुंची, तो प्रेमलता के परिवार के लोगों ने जमकर नौटंकी की और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक को बीच में लाकर थाने पर भारी लाव-लश्कर के साथ हंगामा किया, जिसके परिणामस्वरूप चार-पांच पुलिस वालों को निलंबित करवा दिया गया। बबली गर्ग विधायक के घर भी गईं, लेकिन विधायक ने उनकी बात नहीं सुनी, बल्कि उन्हें “फ्रॉड” तक कह दिया। आरोप है कि विधायक की शह पर प्रेमलता ने पुलिस और बबली गर्ग के खिलाफ मुकदमा दायर करने के लिए एक आवेदन भी दिया हुआ है। वैश्य समाज की चेतावनी: उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो चुनाव में दिखेगी ताकत अग्रवाल युवा संगठन के संस्थापक विनोद अग्रवाल ने कहा कि लगातार हो रहे उत्पीड़न से वैश्य समाज बहुत दुखी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समाज पर उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो आने वाले चुनाव में समाज अपनी ताकत दिखाएगा। उन्होंने विशेष रूप से एत्मादपुर विधानसभा का जिक्र किया, जहाँ वैश्य समाज के 50,000 वोट हैं। विनोद अग्रवाल ने कहा कि अब यह वोट ‘फ्लोटिंग’ बनेगा और विधायक को हरवाएगा। मुख्य संरक्षक विनय अग्रवाल ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अग्रवाल वैश्य समाज का उत्पीड़न और शोषण लगातार हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया अग्रवाल वैश्य समाज की जमीनों पर कब्जा करने में लगे हैं। उन्होंने सेवला, सैंया रोड, सेव का बाजार, बोदला, फतेहपुर सिकरी और अब कालिंदी विहार के मामलों का उल्लेख किया। विनय अग्रवाल ने कहा कि जब तक समाज सड़कों पर उतरकर इनका विरोध नहीं करेगा, तब तक जमीनों पर कब्जे होते रहेंगे। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है। समाज को अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी और अपने ऊपर उत्पीड़न के खिलाफ समाज सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगा। आंदोलन हिंसात्मक होगा, क्योंकि हम गांधी के वंशज हैं जिन्होंने देश को आजाद कराया था।” अग्रवाल युवा संगठन के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने दृढ़ता से कहा कि जब तक बबली गर्ग को न्याय नहीं मिल जाता, वह इस न्याय की लड़ाई में तन, मन, धन से उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अब यह लड़ाई सिर्फ बबली गर्ग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की हो गई है, और समाज तब तक चैन की नींद नहीं सोएगा जब तक न्याय नहीं मिल जाता। पुलिस कमिश्नर से मुलाकात और आगे की रणनीति समस्त वैश्य समाज 13 अगस्त 2025, दिन बुधवार को सुबह 10:30 बजे अग्रसेन भवन लोहा मंडी, कोठी मीना बाजार के सामने आगरा पर एकत्रित होकर पुलिस कमिश्नर से मिलने जाएगा। इस दौरान वे बबली गर्ग को न्याय दिलाने, उनके मकान को कब्जा मुक्त कराने, निलंबित निर्दोष पुलिसकर्मियों का निलंबन वापस लेने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे। मीडिया प्रभारी सोनू अग्रवाल ने जोर दिया कि मकान पर कब्जा करना न केवल गैरकानूनी है बल्कि यह नैतिक रूप से भी गलत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करती है, और “यदि आज हम चुप बैठे तो कल किसी और के साथ भी यह हो सकता है।” बैठक में पीड़ित बबली गर्ग, संस्थापक विनोद अग्रवाल, मुख्य संरक्षक विनय अग्रवाल, अध्यक्ष राकेश अग्रवाल, विकास मोहन बंसल, गणेश अग्रवाल, संजय अग्रवाल, नीतू अग्रवाल, निशा अग्रवाल, छावनी संगठन महामंत्री रुपेश अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, अंकित अग्रवाल, हिमांशु अग्रवाल, सुखिल अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, अमन अग्रवाल, अरुप गोयल, आशीष अग्रवाल, प्रकाश गोयल, नितिन गर्ग, प्रवीण अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, भारत मित्तल, रजत अग्रवाल, सौरभ गर्ग, रामअवतार अग्रवाल, नितिन गर्ग, जितेंद्र अग्रवाल, रवि गोयल, मुदित अग्रवाल, शिवम गर्ग, मयंक गर्ग, राजीव कैमरा, रवी गोयल, रामकुमार अग्रवाल, कपिल अग्रवाल, शिवम अग्रवाल, भारत मित्तल, जितेंद्र अग्रवाल, सौरभ गर्ग, शरद अग्रवाल, अनुज गोयल, सौरभ जैन सहित बड़ी संख्या में वैश्य समाज के सदस्य उपस्थित रहे।

रायभा स्टेशन बंद होने की आहट से दहला इलाका! हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट, ‘किसान सेना’ ने 11 अगस्त को DRM-GM घेराव का किया ऐलान!

किरावली, आगरा। तहसील किरावली के रायभा गांव में अंग्रेजों के जमाने से स्थापित रेलवे स्टेशन को बंद करने की चर्चाओं ने पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इस रेलवे स्टेशन पर करीब सात लोकल पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव है, जिससे आसपास के बीस गांवों के हजारों मजदूर रोज आगरा, मथुरा और भरतपुर जाकर अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। स्टेशन बंद होने की खबर से इन सभी मजदूरों और नियमित यात्रियों की आजीविका पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। हजारों यात्रियों और मजदूरों की जीवनरेखा है रायभा स्टेशन रायभा रेलवे स्टेशन से रोजाना हजारों की संख्या में मंथली सीजन टिकट (MST) जारी होते हैं, जिनका उपयोग बड़ी संख्या में नियमित यात्री करते हैं। यह स्टेशन इन मजदूरों और यात्रियों के लिए एक जीवनरेखा के समान है, जो उन्हें काम के लिए बड़े शहरों तक पहुंचने में मदद करता है। अगर यह स्टेशन बंद होता है, तो इन हजारों परिवारों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर प्रभावित होगी। किसान सेना प्रमुख मुकेश डागुर ने मोर्चा संभाला, लोगों में गहरा आक्रोश इस गंभीर मुद्दे को लेकर किसान सेना प्रमुख मुकेश डागुर ने रायभा रेलवे स्टेशन का दौरा किया। उन्होंने वहां नियमित यात्रियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। स्टेशन सुपरिंटेंडेंट रामवीर सिंह ने भी पुष्टि की कि स्टेशन को बंद करने की चर्चाएं चल रही हैं। इसके बाद मुकेश डागुर ने रायभा, सहता, नगला लालदास, कूकथला, कठवारी, जनौथ, मगुर्रा सहित करीब दस गांवों का दौरा किया। हर जगह लोगों में इस मुद्दे को लेकर गहरा आक्रोश और चिंता देखी गई। 11 अगस्त को रेलवे DRM और रोडवेज GM का घेराव मुकेश डागुर ने इस अन्याय के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वे स्टेशन को किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने देंगे। इसी कड़ी में, सोमवार, 11 अगस्त को किसान सेना बड़ी संख्या में किसानों के साथ मिलकर रेलवे के DRM (मंडलीय रेल प्रबंधक) का घेराव करेगी। इसके साथ ही, मुकेश डागुर ने रोडवेज द्वारा हाल ही में जेंगारा-बाजना के लिए शुरू की गई बस सेवा को एक सप्ताह बाद ही बंद कर दिए जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि इस बस सेवा को दोबारा शुरू कराने के लिए भी उसी दिन रोडवेज के GM (महाप्रबंधक) का घेराव किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण अवसर पर डॉ. सूरज सिंह सिकरवार, मुकेश सिकरवार, प्रधान जगवीर सिंह, बन्नो प्रधान, सत्यवीर शर्मा, जीतू जादौन, चौधरी मोहित प्रधान, शेलू चौधरी, धीनू जादौन, बंटी जादौन, खेमसिंह कुशवाह, बंटी सिकरवार आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। यह आंदोलन दर्शाता है कि स्थानीय लोग अपनी आजीविका और सुविधाओं के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

नगर आयुक्त को फोन करो, कहो-कांग्रेस महानगर अध्यक्ष आएं हैं: ‘बाजार सड़क पर ही चलता है’, नाई की मंडी में अतिक्रमण हटाने गई टीम को कांग्रेस नेता ने रोका, बिना कार्रवाई लौटी नगर निगम की टीम

आगरा। आगरा के नाई की मंडी क्षेत्र में गुरुवार दोपहर अतिक्रमण हटाने पहुंची नगर निगम की टीम को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अमित सिंह मौके पर पहुंचे और नगर निगम के जोनल अधिकारी से तीखी नोकझोंक हो गई। अमित सिंह ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को रोकते हुए जोनल अधिकारी से सीधे कहा, “नगर आयुक्त को फोन करो, उनसे कहो- महानगर अध्यक्ष आए हैं।” काफी देर तक वाद-विवाद चला, जिसके बाद नगर निगम की टीम बिना कोई कार्रवाई किए ही अतिक्रमण हटाने की चेतावनी देकर लौट गई। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। अतिक्रमण हटाने की मांगी ‘परमिशन’, कहा- ‘बाजार सड़क पर ही चलता है’ यह पूरा मामला गुरुवार दोपहर का है, जब नगर निगम की टीम नाई की मंडी में सड़क किनारे हुए अतिक्रमण को हटाने पहुंची थी। इसी दौरान कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अमित सिंह वहां आ गए और उन्होंने नगर निगम की कार्रवाई का विरोध करना शुरू कर दिया। उन्होंने जोनल अधिकारी अवधेश कुमार से अतिक्रमण हटाने की पहले ‘परमिशन’ दिखाने को कहा, और उसके बाद ही अभियान चलाने की बात कही। इस पर जोनल अधिकारी अवधेश कुमार ने सवाल किया, “सड़क पर बाजार लगाने की अनुमति किसने दी?” जिसका जवाब देते हुए कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने कहा कि “बाजार सड़क पर ही चलता है। दूसरे बाजारों की भी स्थिति देख लीजिए।” इस दौरान मौके पर काफी भीड़ जमा हो गई। चेतावनी देकर लौटी टीम, जल्द फिर से अभियान चलाने का ऐलान लंबी नोकझोंक और वाद-विवाद के बाद, नगर निगम की टीम नाई की मंडी से बिना कोई ठोस कार्रवाई किए ही वापस लौट गई। जोनल अधिकारी अवधेश कुमार का कहना है कि नाई की मंडी में लोगों ने सड़क पर भारी अतिक्रमण कर रखा है। इन अतिक्रमणकारियों को पहले भी कई बार चेतावनी दी गई थी, इसके बावजूद उन्होंने अतिक्रमण नहीं हटाया। उन्होंने बताया कि अब एक बार फिर चेतावनी दी गई है और जल्द ही इस क्षेत्र में फिर से बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाएगा। यह घटना शहर में अतिक्रमण हटाने के अभियानों के दौरान राजनीतिक हस्तक्षेप और आम जनता द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों को एक बार फिर उजागर करती है।

आगरा में कांग्रेस का पैदल मार्च: गांधी प्रतिमा की बदहाली और शौचालय न होने पर भड़के कांग्रेसी, ‘गोडसे’ का नाम लेकर जताया विरोध

आगरा। मंगलवार को आगरा में शहर कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग ने गांधी पार्क की बदहाली और जलभराव की समस्या को लेकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। गांधी प्रतिमा की मरम्मत न होने और पार्क में शौचालय का निर्माण न किए जाने पर कांग्रेसियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद कांग्रेस के कार्यकर्ता पैदल मार्च करते हुए कैंट बोर्ड कार्यालय पहुंचे, जहाँ उन्होंने पार्क के सौंदर्यीकरण की मांग करते हुए छावनी परिषद को ज्ञापन सौंपा। “गांधी की प्रतिमा है इसलिए प्रशासन नहीं सुन रहा, गोडसे की होती तो सौंदर्यीकरण हो गया होता” छावनी क्षेत्र के वार्ड 6, सुल्तानपुरा में एनसी वैदिक इंटर कॉलेज के सामने स्थित पार्क में लगी गांधी प्रतिमा और वहाँ हो रहे जलभराव को लेकर कांग्रेसियों ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने गांधी प्रतिमा की तत्काल मरम्मत और पार्क में शौचालय के निर्माण की मांग की, ताकि पार्क की दयनीय स्थिति सुधर सके। प्रदर्शन के दौरान, कांग्रेस नेता अनिल शर्मा और अनुज शिवहरे ने तीखा बयान देते हुए कहा, “पार्क में गांधी की प्रतिमा लगी हुई है। जिस वजह से आज सरकार और प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है। अगर गोडसे की प्रतिमा होती तो सौंदर्यीकरण हो गया होता।” उन्होंने कैंट बोर्ड से जल्द से जल्द गांधी की प्रतिमा की मरम्मत कराने और खराब पड़े शौचालय का निर्माण कराने की मांग की। कांग्रेसियों ने बताया कि प्रतिमा और शौचालय को लेकर पहले भी ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस बार उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो कांग्रेस हड़ताल करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। कैंट बोर्ड के अधिकारी को ज्ञापन सौंपते कांग्रेस के कार्यकर्ता: (यह फोटो विवरण समाचार में शामिल किया जाएगा) गांधी प्रतिमा के सामने धरना देते कांग्रेस के कार्यकर्ता: (यह फोटो विवरण समाचार में शामिल किया जाएगा) यह विरोध-प्रदर्शन न केवल गांधी पार्क की उपेक्षा पर केंद्रित था, बल्कि इसके माध्यम से कांग्रेस ने प्रशासन और सरकार पर सांकेतिक रूप से वैचारिक भेदभाव का भी आरोप लगाया।

राजेश्वर महादेव मंदिर से भेदभाव: आगरा में आंदोलन की चेतावनी, 6 अगस्त को मार्च

आगरा। प्राचीन राजेश्वर महादेव मंदिर परिसर में सोमवार को हुई एक सार्वजनिक बैठक में सरकारी विकास योजनाओं में मंदिर के साथ हो रहे भेदभाव पर तीव्र विरोध दर्ज कराया गया। श्रद्धालुओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि यदि सरकार द्वारा मंदिर को अनुदान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन करेंगे। इसी कड़ी में, राजेश्वर महादेव के भक्त 6 अगस्त को कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालेंगे। “विधायक ने नहीं की पहल, अन्य मंदिरों को मिला करोड़ों का अनुदान” बैठक में मौजूद लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए योजनाएं स्वीकृत की जा रही हैं। इसके बावजूद, छावनी के विधायक जी.एस. धर्मेश ने अपने क्षेत्र के प्रमुख श्री राजेश्वर महादेव मंदिर के विकास के लिए कोई पहल नहीं की है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष डी.के. वशिष्ठ और उपाध्यक्ष सत्यप्रकाश रावत ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि आगरा के अन्य प्रमुख मंदिरों को प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपये के अनुदान से विकास कार्यों में शामिल किया है। ऐसे में, राजेश्वर महादेव मंदिर को किसी भी योजना में शामिल न किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने जोर दिया कि यह मंदिर पूरी तरह से भक्तों के सहयोग से विकसित हुआ है और इसका स्वरूप अनुकरणीय है, फिर भी इसे सरकारी योजनाओं से वंचित रखना अनुचित है। 6 अगस्त को कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च, मांगों पर विचार न होने पर तेज होगा आंदोलन बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि अपनी मांगों को लेकर 6 अगस्त को सुबह 10 बजे मंदिर से कलेक्ट्रेट तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला जाएगा। श्रद्धालु कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे। भक्तों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। एसडीएम ने दिया आश्वासन, समाधान का भरोसा मंदिर में हुई इस बैठक में जिलाधिकारी आगरा के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे एसडीएम सचिन राजपूत ने श्रद्धालुओं को आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी के माध्यम से अनुपूरक मांग प्रस्ताव (supplementary demand proposal) तैयार कराया जा रहा है। एसडीएम ने जिलाधिकारी से मिलकर इस समस्या का शीघ्र समाधान कराने का भरोसा भी दिलाया। बैठक में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष विमल तिवारी, उपसचिव पप्पू ठाकुर, अनिल रावत, बंटी ठाकुर, गोविन्द पाराशर, महेंद्र शर्मा, जितेंद्र देपुरिया, राकेश शर्मा, यश शर्मा, बॉबी अरेला, सतीश पूरी, भूपेंद्र मुखरैया, आशीष पाठक, दीपक शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

आगरा में मेयर पर विकास न करने का आरोप: गंदे पानी में बैठकर लोगों ने किया प्रदर्शन, सड़कों पर गड्ढे और जलभराव से हाहाकार!

आगरा। आगरा में सड़कों की बदहाली और जलभराव से परेशान स्थानीय लोगों ने बुधवार को नगर निगम और मेयर के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन किया। शंकरगढ़ पुलिया से आजम पाड़ा की ओर जाने वाली सड़क पर गहरे गड्ढों और नालियों के गंदे पानी के बीच बैठकर लोगों ने जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि मेयर शहर के विकास पर ध्यान नहीं दे रही हैं, जिससे मुख्यमंत्री के “गड्ढा मुक्त उत्तर प्रदेश” के सपने पर पानी फिर रहा है। सड़क पर जलभराव से हादसे, बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल भारतीय किसान यूनियन (भानू) के नेतृत्व में यह धरना प्रदर्शन किया गया। किसान नेता अभिषेक चौहान ने बताया कि शंकरगढ़ से आजम पाड़ा तक की सड़क पूरी तरह टूट चुकी है और उसमें बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। पास में तीन स्कूल हैं, और आए दिन स्कूली बच्चे इन गड्ढों में गिरकर चोटिल होते रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम को 10 से अधिक बार शिकायत पत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन, आज स्थानीय लोगों के साथ सड़क पर भरे गंदे पानी में बैठकर धरना देना पड़ा है। अभिषेक चौहान ने चेतावनी दी कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, उनका धरना जारी रहेगा, और जरूरत पड़ी तो भूख हड़ताल भी की जाएगी। पार्षद पर भी अनदेखी का आरोप, वार्ड 40 की बदहाली प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि यह क्षेत्र वार्ड 40 के अंतर्गत आता है, जिसके पार्षद रवि दिवाकर हैं। उन्हें भी इस समस्या की जानकारी दी गई थी और उन्होंने निरीक्षण भी किया, लेकिन इसके बावजूद सड़क की हालत नहीं सुधरी। नालियों का गंदा पानी सड़क पर भर जाता है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है और दोपहिया वाहन चालकों के साथ आए दिन हादसे होते रहते हैं। लोगों ने कहा कि जहां एक ओर मुख्यमंत्री का सपना उत्तर प्रदेश को गड्ढा मुक्त बनाना है, वहीं आगरा की मेयर उनके सपनों पर पानी फेर रही हैं। उनका आरोप है कि मेयर का शहर के विकास पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं है, जिससे जनता परेशान है। इस प्रदर्शन ने शहर की मूलभूत समस्याओं और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगरा में शिक्षकों का ‘भुखमरी आंदोलन’: 1700 गुरुजी बिना वेतन के, बोले- ‘आज नहीं मिला तो कल करेंगे धरना!’

आगरा। आगरा में बेसिक शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है, जहाँ 1700 शिक्षकों को जून महीने का वेतन अब तक नहीं मिला है। इससे नाराज राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि आज शाम तक शिक्षकों के खातों में वेतन नहीं आया, तो वे बुधवार, 30 जुलाई को लेखाधिकारी कार्यालय पर जोरदार धरना प्रदर्शन करेंगे। “सिर्फ आश्वासन मिल रहा, समस्याओं पर ध्यान नहीं” राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष तिलकपाल सिंह ने बताया कि जिले के लगभग 1700 शिक्षकों का जून महीने का वेतन अटका हुआ है, जिससे उनका गुजारा मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि वेतन की मांग लगातार की जा रही है, और कई बार अधिकारियों से इस संबंध में बात भी हुई है, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। तिलकपाल सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी समस्याओं की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। आज शाम तक बिल ट्रेजरी भेजने का मिला ‘नया’ आश्वासन शिक्षकों को एक बार फिर नया आश्वासन मिला है। उन्हें बताया गया है कि बरौली अहीर के एक शिक्षक को छोड़कर, आज शाम तक सभी बिल ट्रेजरी में भेज दिए जाएंगे। इसके बाद ट्रेजरी से आधे घंटे के अंदर सैलरी खातों में पहुँच जाएगी। साथ ही, यह भी आश्वासन दिया गया है कि चाहे कोई जीपीएफ (GPF) वाला हो या कोई अन्य, यदि बिल में नाम है तो वेतन निश्चित रूप से आएगा। “आज नहीं मिला वेतन तो कल 10 बजे से धरना” हालांकि, शिक्षक अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने साफ कर दिया है कि अगर आज भी वेतन नहीं आता है तो कल, 30 जुलाई को सुबह 10 बजे से लेखा अधिकारी कार्यालय पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ आगरा धरना देगा। महासंघ ने सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे कल सुबह 10 बजे अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ लेखा कार्यालय पहुँचें। यह स्थिति शिक्षकों के धैर्य की परीक्षा ले रही है और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। क्या आज शाम तक शिक्षकों के खातों में वेतन पहुँच पाएगा, या कल आगरा में शिक्षा विभाग के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन देखने को मिलेगा?

आगरा में नगर निगम की ‘गुगली’: सड़क पर रखा जनरेटर नहीं हटा पाई टीम, विरोध के आगे झुककर लौटना पड़ा!

आगरा। आगरा में नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी मुहिम को शनिवार को एक झटका लगा। ट्रांस यमुना कॉलोनी में सड़क पर रखे एक जनरेटर को हटाने पहुँची नगर निगम की टीम को लोगों के भारी विरोध के चलते बिना कार्रवाई के ही वापस लौटना पड़ा। IGRS पोर्टल पर मिली शिकायत का निस्तारण किए बिना ही टीम को उल्टे पांव लौटना पड़ा, जिससे प्रशासन की ‘पकड़’ पर सवाल खड़े हो गए हैं। जयदीप अस्पताल का जनरेटर, राहगीर परेशान मामला ट्रांस यमुना कॉलोनी का है, जहाँ IGRS पोर्टल के माध्यम से नगर निगम को शिकायत मिली थी कि सड़क पर एक जनरेटर रखा हुआ है, जिससे राहगीरों को परेशानी हो रही है। शिकायत के निस्तारण के लिए नगर निगम की टीम शनिवार को मौके पर पहुँची। पता चला कि यह जनरेटर जयदीप अस्पताल प्रबंधन ने रास्ते में रखा हुआ था। नगर निगम की टीम ने जैसे ही इसे हटाना शुरू किया, अस्पताल प्रबंधन के लोग बाहर निकल आए और हंगामा करने लगे। देखते ही देखते आसपास के लोग भी इकट्ठा हो गए और सभी ने मिलकर नगर निगम की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। जोनल अधिकारी से तीखी नोकझोंक, टीम को लौटना पड़ा खाली हाथ स्थिति इतनी बिगड़ गई कि टीम का नेतृत्व कर रहे जोनल अधिकारी अवधेश कुमार से भी तीखी नोकझोंक हुई। पिछले दिनों खेरिया मोड़ पर प्लास्टिक के खिलाफ अभियान के दौरान विधायक के चाचा से हुए विवाद के बाद नगर निगम के अधिकारी अब ज्यादा जोखिम लेने से बच रहे हैं। यही वजह रही कि बिगड़ती स्थिति देख नगर निगम की टीम बिना कार्रवाई किए ही लौट गई। जोनल अधिकारी ने स्वीकार किया कि शिकायत जायज थी और सड़क किनारे अवैध रूप से रखा जनरेटर आसपास के लोगों के लिए आवाज और धुएं से परेशानी का सबब बनता है। मगर, विरोध के चलते कार्रवाई नहीं हो सकी। अन्य इलाकों में चला ‘बुलडोजर’, ठेल-धकेल हटाए हालांकि, नगर निगम की टीम ने शनिवार को ही शहर के अन्य क्षेत्रों में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान जारी रखा। पालीवाल पार्क और रामबाग चौराहा क्षेत्र में सड़कों और फुटपाथों पर खड़े ठेल, धकेल और अन्य अवैध अतिक्रमण को हटाया गया, जिससे पैदल चलने वालों को कुछ राहत मिली। लेकिन ट्रांस यमुना कॉलोनी में हुई घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है।

आगरा में ऊर्जा मंत्री के खिलाफ वैश्य समाज का प्रदर्शन: ‘बनिया’ वाले बयान पर फूटा आक्रोश, मांगा इस्तीफा!

आगरा। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के एक वायरल बयान पर आगरा में वैश्य समाज का गुस्सा फूट पड़ा है। शुक्रवार को अग्रवाल युवा संगठन ने सुभाष पार्क से जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च किया और मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की। ‘बनिया की दुकान नहीं है’ बयान पर भड़का वैश्य समाज दरअसल, ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कह रहे थे, “ये कोई बनिए की दुकान नहीं है, जो पैसे लेकर सामान नहीं देते।” इसी बयान को लेकर वैश्य समाज में भारी आक्रोश है। संगठन के पदाधिकारी राकेश अग्रवाल के नेतृत्व में किए गए इस पैदल मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एक मंत्री को ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मंत्री को बोलना नहीं आता है, तो उन्हें इस संवैधानिक पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। ‘वैश्य समाज सबसे ज्यादा टैक्स देता है’, नहीं मांगी माफी तो सड़कों पर उतरेंगे प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर बैठकर भी नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि एके शर्मा की अशोभनीय टिप्पणी से देशभर का वैश्य समाज आहत है, जबकि वैश्य समाज देश में सबसे ज्यादा टैक्स देता है और आर्थिक संकट के समय भी सबसे आगे खड़ा रहता है। अग्रवाल युवा संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि ऊर्जा मंत्री एके शर्मा अपने बयान के लिए माफी नहीं मांगते हैं, तो वैश्य समाज सड़कों पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन करेगा। यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में गरमाता जा रहा है।

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