आगरा में मकान का छज्जा गिरने से बड़ा हादसा, 4 साल के बच्चे की मौत

आगरा। आगरा के थाना शाहगंज क्षेत्र में एक घर का छज्जा गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में एक परिवार के पांच सदस्यों और एक महिला समेत कुल छह लोग मलबे में दब गए। लोगों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। हादसा सराय ख्वाजा चौकी के पास की एक गली में हुआ, जहाँ गुड्डू नाम के व्यक्ति के मकान का छज्जा अचानक नीचे आ गिरा। उस समय उसके सामने आफताब का परिवार गली में बैठा था। मलबे में दबने वालों में आफताब, उसकी पत्नी, तीन बच्चे और गुड्डू के छोटे भाई की पत्नी रूबी शामिल थीं। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल भेजा। दुखद बात यह है कि आफताब के 4 साल के बेटे रफत को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं, आफताब, उनकी पत्नी और दो अन्य बच्चों की हालत गंभीर है और उनका इलाज चल रहा है। इस घटना से पूरे परिवार में मातम पसर गया है। पड़ोसी पर लगाया आरोप इस हादसे के बाद मकान मालिक गुड्डू ने अपने पड़ोसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पड़ोस में नया मकान खरीदने वाले व्यक्ति ने मरम्मत के दौरान बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए, जिससे उनके छज्जे में दरार आ गई थी। गुड्डू ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद पड़ोसी ने मरम्मत नहीं कराई। आज जब बिल्डिंग के पिलरों में ड्रिलिंग मशीन से काम चल रहा था, तो उसकी वाइब्रेशन से छज्जा गिर गया। पुलिस ने गुड्डू की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। मौके पर एसीपी लोहा मंडी मयंक तिवारी और सदर तहसील के नायब तहसीलदार भी पहुँचे। पुलिस ने गिरे हुए छज्जे को हटाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, मृतक बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

आगरा में यमुना का कहर: बाढ़ में ढहा मकान, कार बही; लाइव वीडियो सामने आया

आगरा। आगरा में यमुना नदी का कहर जारी है। बीती रात, बाढ़ के पानी से कमजोर हुआ एक मकान भरभराकर ढह गया, जिसका लाइव वीडियो सामने आया है। यह घटना फाउंड्री नगर के गोकुल नगर में हुई, जहाँ बाढ़ का पानी 4-5 फीट तक भर गया है। गनीमत रही कि परिवार के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। मकान ढहने से कुछ देर पहले, घर के सदस्य छत में आई दरार का वीडियो बना रहे थे, तभी पीछे की तरफ की दीवार ढह गई। इस इलाके में कई मकान जलमग्न हो गए हैं, जिससे लोगों ने अपनी छतों पर शरण ली हुई है। प्रशासन ने इन सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा दिया है। तेज बहाव में बही कार एक अन्य घटना में, सोमवार रात कैलाश घाट की तरफ गए एक दंपत्ति की कार भी बाढ़ के पानी में बह गई। उनकी कार जलभराव में फंस गई थी, जिसके बाद यमुना के तेज बहाव ने उसे बहा लिया। हालांकि, समय रहते रेस्क्यू टीम ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ये घटनाएँ दिखाती हैं कि यमुना का जलस्तर कितना खतरनाक हो चुका है और लोगों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है।

“हमारा घर गिरा तो मेट्रो की वजह से!” – आगरा के मोती कटरा में दीवारों पर चिपके दहशत भरे पोस्टर, जिम्मेदार कौन?

आगरा। आगरा के मोती कटरा इलाके में मेट्रो की खुदाई ने कई परिवारों की नींद हराम कर दी है। यहाँ कई मकान इतने जर्जर हो गए हैं कि वे कभी भी गिर सकते हैं, जिसके चलते लोगों में गहरी दहशत है। अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंतित इन परिवारों ने अब अपने घरों की दीवारों पर सीधे-सीधे पोस्टर लगा दिए हैं, जिन पर लिखा है: “यह मकान अगर गिरा तो इसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) की होगी।” मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति, दहशत में जी रहे लोग मकान मालिकों का आरोप है कि मेट्रो की सुरंगों की खुदाई के दौरान बरती गई लापरवाही के कारण उनके भवन जर्जर हो गए हैं। उनकी शिकायत है कि मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है और अब ये मकान रहने लायक नहीं रहे। उन्हें हर पल किसी बड़े हादसे का डर सता रहा है। दयानंद गुप्ता ने बताया कि उनका चार मंजिला घर है और सुरंग की खुदाई से उसमें दरारें आ गई हैं। सरकार से मान्यता प्राप्त इंजीनियर से कराए गए ऑडिट में भी उनके घर को रहने लायक नहीं बताया गया है, जिसके चलते उनका परिवार किराए पर रहने को मजबूर है। मोती कटरा के ही चितरंजन कुमार जैन ने शिकायत की कि UPMRC के अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। UPMRC का दावा: “अब कोई खतरा नहीं, कुछ लोग चाहते हैं पूरा घर नया बन जाए” दूसरी ओर, UPMRC के महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा का इस मामले पर अलग ही रुख है। उनका कहना है कि इन घरों की मरम्मत करा दी गई है और अब सुरंग बन जाने के बाद घरों को कोई खतरा नहीं है। मिश्रा ने यह भी जोड़ा कि कुछ लोग चाहते हैं कि उनका पूरा घर ही नया बनवा दिया जाए। UPMRC के इस दावे और स्थानीय लोगों की दहशत के बीच, मोती कटरा के निवासियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर क्या ठोस कदम उठाता है।

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