आगरा में बारावफात पर दिखा भाईचारा, हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश

आगरा। सुलहकुल की नगरी आगरा में बारावफात का पवित्र त्यौहार पूरी श्रद्धा और भाईचारे के साथ मनाया गया। शहर और देहात में छोटे-बड़े मिलाकर लगभग एक दर्जन से ज्यादा जुलूस निकाले गए, जिनमें इस्लामिक नारे लगाए गए और हजरत मोहम्मद साहब द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलने का संदेश दिया गया। इस बार के त्यौहार में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली। मुस्लिम समाज के लोगों के साथ-साथ, दूसरे धर्म के लोगों ने भी जुलूस का स्वागत किया और लोगों के बीच मिठाई बांटी। हिंदुस्तानी विदार के अध्यक्ष डॉ. सिराज कुरैशी ने बताया कि यह दिन हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश और वफात का दिन है। उन्हीं की याद में दुनिया भर में मुसलमान खुशियां मनाते हैं और अपने घरों को रोशन करते हैं। इस बार सभी धर्मों के लोगों ने मिलकर इस त्यौहार को मनाया, जिससे यह फिर से साबित हो गया कि आगरा मोहब्बत का शहर है।

एत्मादपुर में निकला बारह वफात का जुलूस, भक्ति और शांति से भरा माहौल

आगरा। आगरा के एत्मादपुर में शुक्रवार को बारह वफात का जुलूस पूरे भक्तिभाव और शांति के साथ निकाला गया। सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में जुलूस में शामिल हुए। इस दौरान घोड़ों और ऊंटों पर सवार झांकियां लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहीं। जुलूस के दौरान, लोगों ने धार्मिक नारे लगाए और कव्वालियां गाईं, जिससे पूरे कस्बे में आस्था और भाईचारे का माहौल बन गया। बारह वफात का यह पवित्र पर्व इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की याद में मनाया जाता है। इस दिन मुस्लिम समाज विशेष प्रार्थनाएं करता है और जुलूस के माध्यम से पैगंबर साहब की शिक्षाओं को याद करता है। जुलूस में शकील ठेकेदार, लाला ठेकेदार, वकील कुरैशी और गुड्डू कुरैशी जैसे कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। जुलूस के पूरे मार्ग पर थाना पुलिस और पीएसी ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली, जिसकी वजह से यह आयोजन बिना किसी परेशानी के संपन्न हो सका। यह आयोजन आस्था, अनुशासन और सामाजिक एकता का एक शानदार उदाहरण बना, जिसने कस्बे में शांति और भाईचारे का मजबूत संदेश दिया।

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