अकोला मिनी स्टेडियम की बदहाली पर सांसद ने डीएम को लिखा पत्र

आगरा। अकोला क्षेत्र का मिनी स्टेडियम, जो लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है, अब चर्चा में आ गया है। भाजपा नेता उपेन्द्र सिंह ने खिलाड़ियों की समस्याओं को देखते हुए फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर को स्टेडियम की बदहाली के बारे में बताया। यहाँ खिलाड़ियों को पीने के पानी, शौचालय, साफ-सफाई और मैदान की खराब हालत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सांसद चाहर ने तुरंत इस मामले का संज्ञान लिया और जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी को पत्र लिखकर स्टेडियम की स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद, उपेन्द्र सिंह ने खुद जिलाधिकारी से मिलकर स्टेडियम की समस्याओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने जोर दिया कि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएँ देना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने उपेन्द्र सिंह की बातों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को तुरंत पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई और मैदान की मरम्मत का काम प्राथमिकता के आधार पर करने का आश्वासन दिया। उपेन्द्र सिंह ने कहा, “खिलाड़ी देश की शान होते हैं। हमारा संकल्प है कि अकोला मिनी स्टेडियम को जल्द ही नई सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा।”

आगरा में DM के सामने आत्मदाह का प्रयास, दिव्यांगों की शिकायत सुनने खुद जमीन पर बैठे जिलाधिकारी

आगरा। आगरा कलेक्ट्रेट में अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे दिव्यांगों में से एक ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। यह देख मौके पर मौजूद एक पुलिसकर्मी ने तुरंत उसके हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली और इस प्रयास को विफल कर दिया। घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी अपने चैंबर से निकलकर धरना स्थल पर पहुँचे और उनकी शिकायतों को सुनने के लिए खुद जमीन पर बैठ गए। यह पूरा मामला आगरा के किरावली तहसील के ककुआ स्थित ‘आसरा सर्विस सेंटर’ से जुड़ा है। भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एल्मिको) द्वारा संचालित यह सेंटर इस साल की शुरुआत में बंद कर दिया गया था, जिससे दिव्यांगों को भारी परेशानी हो रही थी। गुरुवार को इसी सेंटर को दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर दिव्यांग कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठे थे। जब लगभग दो घंटे तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई तो एक दिव्यांग ने आत्मदाह का प्रयास किया, जिसे पुलिसकर्मी ने रोक लिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी तुरंत धरना स्थल पर पहुँचे। उन्होंने दिव्यांगों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। दिव्यांगों ने बताया कि सेंटर के बंद होने से उन्हें इलेक्ट्रॉनिक ट्राईसाइकिल जैसे सहायक उपकरणों की मरम्मत कराने में बहुत मुश्किलें आ रही हैं। उनका आरोप है कि सेंटर को एक झूठी शिकायत के कारण बंद किया गया था। डीएम ने तत्काल ‘एल्मिको’ के अधिकारियों से बात की और उन्हें एक-दो दिन में सेंटर को फिर से शुरू करने का आश्वासन दिया। डीएम के इस कदम से दिव्यांगजन संतुष्ट हुए और उन्होंने अपना धरना समाप्त कर दिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने भी धरने पर बैठे दिव्यांगों को पानी की बोतलें बाँटी।

डीएम ने बुलाई बैठक, नगर आयुक्त के ना आने पर नाराज; बेनतीजा रही जनकपुरी के विकास कार्यों पर चर्चा

आगरा। आगरा में रामलीला महोत्सव और जनकपुरी के विकास कार्यों में हो रही देरी को लेकर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने नाराजगी जताई है। सोमवार को उन्होंने एक समीक्षा बैठक बुलाई थी, लेकिन इस बैठक में नगर आयुक्त के न पहुंचने से डीएम भड़क गए और बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। डीएम ने अब बुधवार शाम 5 बजे दोबारा बैठक बुलाई है। रामलीला की तैयारियों की भी समीक्षा जिलाधिकारी ने रामलीला महोत्सव की तैयारियों पर भी चर्चा की। रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि ग्राउंड में नाले की सफाई, रैंप और सीढ़ियों का निर्माण, दीवारों की मरम्मत, शोभायात्रा के रास्ते में पेड़ों की छंटाई और क्षतिग्रस्त दर्शकदीर्घा की मरम्मत जैसे कई जरूरी काम होने बाकी हैं। डीएम ने सभी संबंधित विभागों को ये काम समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दमकल, सचल शौचालय, बिजली लाइन की मरम्मत और प्रतिदिन एंटी-लार्वा का छिड़काव कराने के भी निर्देश दिए हैं। विकास कार्यों पर पार्षद ने उठाए सवाल बैठक में पार्षद पंकज और प्रदीप ने जनकपुरी के विकास कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 15 करोड़ रुपए के काम दिए गए हैं, लेकिन अभी तक उनके टेंडर नहीं उठे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जहां से राम बरात निकलेगी, उन सड़कों पर अभी भी गड्ढे हैं। पार्षदों का आरोप है कि टेंडर अपनी मर्जी से पास किए गए हैं और जहां काम की असली जरूरत है, वहां कोई काम नहीं हुआ है। बैठक में विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष और महामंत्री सहित कई अधिकारी मौजूद थे।

आगरा में जर्जर स्कूलों पर DM का सख्त एक्शन: ‘यहां क्लास नहीं लगेगी’ के पोस्टर लगे, 157 स्कूल ध्वस्त करने की तैयारी; छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि

आगरा। आगरा में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित जर्जर और असुरक्षित स्कूलों को लेकर जिला प्रशासन सख्त हो गया है। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि अब किसी भी जर्जर स्कूल में छात्रों की कक्षाएं नहीं लगेंगी। ऐसे सभी स्कूलों के बाहर बाकायदा चेतावनी के पोस्टर लगा दिए गए हैं। 298 स्कूल जर्जर, 141 ध्वस्त; बाकी 157 पर भी गिरेगी गाज डीएम बंगारी ने सबसे पहले जर्जर स्कूलों का विस्तृत सर्वे और उसकी रिपोर्ट तलब की। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) जितेंद्र कुमार गौड़ ने बैठक में बताया कि आगरा के स्कूलों के मूल्यांकन और सत्यापन के बाद कुल 298 स्कूल अत्यंत जर्जर पाए गए हैं। इनमें से 141 स्कूलों को पहले ही ध्वस्त किया जा चुका है। शेष 157 स्कूलों के ध्वस्तीकरण के लिए तकनीकी समिति द्वारा मूल्यांकन प्राप्त हो चुका है, और जल्द ही इन पर भी कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने सभी ब्लॉकों में खंड विकास अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और जेई (आरईएस) को शामिल करते हुए तत्काल प्रभाव से एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह कमेटी सभी परिषदीय स्कूलों के जर्जर, असुरक्षित और जोखिमपूर्ण भवनों का सत्यापन कर जल्द से जल्द अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। 6 स्कूल किए गए शिफ्ट, छात्रों की सुरक्षा प्राथमिकता छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहले ही 6 स्कूलों को अत्यंत जर्जर भवन होने के कारण शिफ्ट कर दिया गया है। नगर खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इनमें कंपोजिट विद्यालय जगदीशपुरा, प्राथमिक विद्यालय नगला अजीता, कंपोजिट विद्यालय वजीर पुरा, प्राथमिक कन्या विद्यालय वजीरपुर, प्राथमिक विद्यालय ताजगंज और प्राथमिक विद्यालय पाकटोला शामिल हैं। इन स्कूलों के छात्रों को अब सुरक्षित भवनों में स्थानांतरित कर दिया गया है। जर्जर स्कूलों के बाहर लाल रंग से पेंट करके साफ चेतावनी लिखी गई है कि “यह भवन अत्यंत जर्जर है, इसमें कक्षाएं संचालित नहीं होंगी।” यह कदम छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के डीएम के संकल्प को दर्शाता है।

आगरा में असलहा बाबू ‘निलंबित’: UIN में की ‘अजीब हेराफेरी’, पंजाब के शख्स के नाम पर चढ़ा दिया आगरा का लाइसेंस!

आगरा। आगरा में शस्त्र लाइसेंस के यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) में एक बड़ी हेराफेरी का मामला सामने आया है। यहां के असलहा बाबू ने पंजाब के गुरुदासपुर में रहने वाले एक व्यक्ति के नाम पर गलत UIN दर्ज कर दिया। शुरुआती जांच में दोषी पाए जाने पर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने असलहा बाबू प्रशांत कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। छुट्टी के दिन कैसे इस्तेमाल हुई आईडी? दरअसल, यह गड़बड़ी तब सामने आई जब गुरुदासपुर निवासी अर्जन सिंह के नाम पर UIN 295200034518182018 को अप्रैल 2025 में आगरा के आयुध कार्यालय से बदल दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि अर्जन सिंह का आगरा से कोई संबंध नहीं है। मामला संज्ञान में आने के बाद ADM प्रोटोकॉल प्रशांत तिवारी को इसकी जांच सौंपी गई। उन्होंने असलहा बाबू प्रशांत कुमार से जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि जिस दिन ये UIN दर्ज की गई, उस दिन वह छुट्टी पर थे। ऐसे में सवाल उठ खड़ा हुआ कि जब असलहा बाबू छुट्टी पर थे, तो पोर्टल की लॉगिन आईडी का पासवर्ड किसी दूसरे के पास कैसे पहुँचा, क्योंकि बिना पासवर्ड के पोर्टल की लॉगिन आईडी खुल ही नहीं सकती थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए DM ने असलहा बाबू प्रशांत कुमार को शुरुआती चरण में दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है। अब इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच ADM न्यायिक धीरेंद्र सिंह को सौंप दी गई है। ओम प्रकाश सिंह की UIN से जुड़ा था मामला, एक और गड़बड़ी भी मिली यह पूरा मामला जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर में तैनात रहे ओम प्रकाश सिंह से जुड़ा है। उन्होंने 2010 में शस्त्र लाइसेंस बनवाया था। सेवानिवृत्त होने के बाद वे झुंझुनू स्थित अपने पैतृक निवास आ गए। मई 2025 में जब वे अपने लाइसेंस का नवीनीकरण कराने झुंझुनू के आयुध विभाग के कार्यालय पहुँचे, तो उन्हें पता चला कि उनके UIN पर गुरुदासपुर के अर्जन सिंह का नाम आगरा से चढ़ा दिया गया था। ADM प्रोटोकॉल प्रशांत तिवारी ने बताया कि ओम प्रकाश सिंह ने लाइसेंस तो बनवा लिया था, लेकिन शस्त्र नहीं खरीदा था। जांच में एक नाम रेशम सिंह का भी सामने आया है, जिनकी UIN में भी इसी तरह की गड़बड़ी होने की जानकारी मिली है। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने कहा, “असलहा बाबू को निलंबित कर दिया गया है। जांच चल रही है। गुरुदासपुर, ऊधमपुर और झुंझुनू के जिलाधिकारी से जवाब मांगा है जो कि अब तक नहीं मिला है।” यह मामला शस्त्र लाइसेंस प्रणाली में बड़े पैमाने पर धांधली की ओर इशारा कर रहा है, जिसकी गहन जांच की आवश्यकता है।

आगरा जिला अस्पताल में ‘गंदगी का राज’: DM ने लगाई फटकार, गायब सफाई कर्मचारियों का मांगा रिकॉर्ड!

औचक निरीक्षण के दौरान डीएम के साथ अन्य अधिकारी

आगरा के जिला अस्पताल में ‘गंदगी का राज’ देखकर मंगलवार को जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी का पारा चढ़ गया! उन्होंने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जहां ओपीडी और सभी वार्डों में व्यवस्थाएं देखीं। मरीजों और उनके तीमारदारों से भी बात की, लेकिन अस्पताल परिसर में जगह-जगह गंदगी के ढेर देखकर डीएम ने सीएमएस, अस्पताल मैनेजर और सफाई सुपरवाइजर को कड़ी फटकार लगाई। मरीजों से ली जानकारी, मिली ‘संतोषजनक’ प्रतिक्रिया डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी अचानक जिला अस्पताल पहुंचे और सबसे पहले ओपीडी, महिला व बच्चा वार्ड, इमरजेंसी वार्ड आदि का निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से दवाई की उपलब्धता, बाहर से दवाई खरीद, खाना, डॉक्टरों व नर्स द्वारा चिकित्सा और देखभाल के बारे में जानकारी ली। मरीजों और तीमारदारों ने बताया कि उन्हें समय से उपचार और खाना मिल रहा है, और अस्पताल से दवाएं भी मिल जाती हैं। ‘कूड़े के ढेर’ देखकर डीएम का ‘गुस्सा’ मरीजों से मिली संतोषजनक प्रतिक्रिया के बाद जब डीएम ने जिला अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया, तो उन्हें हर जगह कूड़ा और गंदगी मिली। डायलिसिस भवन और प्राइवेट वार्ड बिल्डिंग के आसपास तो गंदगी व कूड़े के ढेर लगे थे। परिसर में गंदगी मिलने पर डीएम ने सीएमएस, अस्पताल मैनेजर और सफाई कर्मचारियों के हेड सुपरवाइजर को मौके पर तलब किया। डीएम ने उनसे सवाल किए और कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिए कि सीएमएस नियमित रूप से परिसर का दौरा करें और उच्चस्तरीय साफ-सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। उन्होंने साफ कहा कि अस्पताल परिसर में कहीं भी गंदगी नहीं दिखनी चाहिए। ‘गायब’ मिले सफाई कर्मचारी, एजेंसी पर होगी कार्रवाई! निरीक्षण के दौरान डीएम ने अस्पताल मैनेजर से जिला अस्पताल में कार्यरत सफाई कर्मचारियों का ब्योरा मांगा। उन्हें बताया गया कि 23 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनकी विभिन्न शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाती है। डीएम ने सभी कर्मचारियों को मौके पर बुलाया और गिनती कराई, जिसमें सुपरवाइजर सहित केवल 9 सफाईकर्मी ही उपस्थित मिले! इस पर डीएम ने अनुपस्थित कर्मचारियों, सफाई एजेंसी और टेंडर प्रक्रिया के बारे में जवाब तलब किया। उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए एजेंसी के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र जारी करने के निर्देश दिए। डीएम ने सीएमएस को सभी जरूरी चीजों में सुधार के निर्देश दिए, जिसमें हर वार्ड के बाहर डस्टबिन रखने, पूरे परिसर की सफाई कराने और मरीज व तीमारदारों द्वारा अस्पताल परिसर में गंदगी न फैलाने के निर्देश शामिल थे। उन्होंने बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान हेतु नगर निगम को भी निर्देशित किया। इस दौरान सीएमओ डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव, सीएमएस डॉ. राजेंद्र कुमार, अस्पताल मैनेजर मोहित भारती, डॉ. सीपी वर्मा सहित जिला अस्पताल के डॉक्टर मौजूद रहे।

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