Agra News: उटंगन हादसा: 8वां शव ओकेश का मिला, 4 अब भी लापता!

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Agra News उटंगन नदी त्रासदी में 8वां शव ओकेश का मिला। 13 में से अब तक 8 के शव निकाले जा चुके हैं। सेना, NDRF और SDRF 4 लापता की तलाश में हैं। Agra News Today आगरा के खेरागढ़ क्षेत्र स्थित उटंगन नदी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हृदय विदारक हादसे को अब 110 घंटे से अधिक का समय हो चुका है। इस भीषण दुर्घटना में डूबे 13 लोगों में से सोमवार देर शाम तक 8 के शव निकाले जा चुके हैं, जिससे शोकाकुल परिवारों को कुछ राहत मिली है। सोमवार को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान विनेश का शव मिलने के बाद, एक और युवक ओकेश का शव भी नदी की गहराई से बरामद कर लिया गया। अब सेना, एनडीआरएफ (NDRF), और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बाकी 4 लापता युवकों की तलाश में रात-दिन जुटी हुई हैं। वहीं, हादसे में बाल-बाल बचे एक घायल युवक का इलाज अभी भी अस्पताल में जारी है। इस त्रासद घटना ने खेरागढ़ क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है। लापता युवकों की तलाश जारी, पीड़ितों के नाम इस दर्दनाक हादसे के शिकार हुए 13 युवकों में से अब तक 8 शव निकाले जा चुके हैं। शवों की बरामदगी के क्रम में गगन, ओमपाल, मनोज, भगवती, अभिषेक, करन, विनेश के बाद अब ओकेश का नाम भी शामिल हो गया है। इन युवकों के शव मिलने से उनके परिवारों को अंतिम संस्कार का अवसर मिल पाया है, जबकि 110 घंटे से चला आ रहा इंतजार अत्यंत कष्टकारी साबित हो रहा था। अब भी 4 युवक लापता हैं, जिनकी तलाश में रेस्क्यू टीमें नदी के हर कोने को खंगाल रही हैं। लापता युवकों के नाम हैं: सचिन, हरेश, गजेंद्र, और दीपक। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि तलाशी अभियान में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और टीमें तब तक डटी रहेंगी जब तक कि सभी शव बरामद नहीं हो जाते। स्थानीय युवकों का असाधारण प्रयास: अस्थायी बांध नदी की तेज धारा और दलदल भरी गहराई रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस चुनौती से निपटने के लिए क्षेत्रीय युवकों ने अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया है। उन्होंने रात-दिन की परवाह किए बिना लगभग 250 मीटर के डूब क्षेत्र में नदी के पानी का बहाव रोकने के लिए 40 मीटर लंबा एक अस्थायी बांध बना दिया है। इसके अलावा, नदी की मुख्य धारा को डूब क्षेत्र के बीच से नाला बनाकर दूसरी ओर मोड़ा गया है। इस इंजीनियरिंग पहल से बचाव कार्य में लगी टीमों को गड्ढों की गहराई तक पहुँचने में असाधारण आसानी हुई है। पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से नदी के तल में खुदाई का काम भी युद्ध स्तर पर जारी है ताकि लापता युवकों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके। स्थानीय युवाओं का यह प्रयास सामुदायिक एकजुटता का एक प्रेरक उदाहरण है। कंप्रेसर तकनीक बनी आशा की किरण उटंगन नदी के गहरे और दलदली गड्ढों में फंसे शवों को निकालने के लिए एक अनोखी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अब तक बेहद कारगर साबित हुई है। इस तकनीक में ऐसे कंप्रेसर का इस्तेमाल हो रहा है, जिसका प्रयोग सामान्यतः जमीन में 100 से 300 फीट तक फंसे सबमर्सिबल पंप को बाहर निकालने में किया जाता है। तेज हवा के दबाव से मिट्टी या बालू हट जाती है। उटंगन में इसी सिद्धांत का उपयोग किया गया। स्कूबा ड्राइवर कंप्रेसर के पाइप को नदी के अंदर गहरे गड्ढों में लेकर गए और मिट्टी को हटाने के लिए तेज हवा का इस्तेमाल किया। तकरीबन 30 मिनट तक मिट्टी हटाने के बाद ही करन का शव बाहर निकाला जा सका। इस सफलता को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तीन और कंप्रेसर मशीनों को लगाया जाएगा ताकि बाकी शवों को भी जल्द से जल्द निकाला जा सके। इस तकनीक से यह उम्मीद जगी है कि बाकी शवों को निकालने में भी यह मददगार साबित होगी। खनन से बने गहरे गड्ढे बड़ी समस्या बचाव दल ने पाया है कि जिस स्थान पर सभी युवक डूबे थे, वह अवैध खनन की वजह से 25 से 30 फीट तक गहरा गड्ढा बन चुका था। इस गड्ढे में दलदल की मात्रा अत्यधिक थी, जिसके कारण फंसे हुए युवक ऊपर नहीं आ सके। कंप्रेसर मशीन की मदद से इस दलदल और मिट्टी को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है, जिससे उम्मीद है कि बाकी 4 लापता युवकों की तलाश जल्द पूरी होगी और उनके परिवारों को शांति मिल सकेगी। प्रशासन ने कहा है कि रेस्क्यू जारी रहेगा और इस त्रासदी के कारणों की भी पूरी जांच की जाएगी। Agra News: उटंगन हादसा: 110 घंटे बाद मिला 7वां शव, 5 अब भी लापता!

Agra News: उटंगन हादसा: 110 घंटे बाद मिला 7वां शव, 5 अब भी लापता!

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Agra News उटंगन नदी हादसे में 110 घंटे बाद एक और शव मिला। 13 में से अब तक 7 के शव निकाले जा चुके हैं। सेना, NDRF और SDRF 5 लापता की तलाश में हैं। Agra News खेरागढ़ क्षेत्र स्थित उटंगन नदी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हृदय विदारक हादसे को अब 110 घंटे से अधिक का समय हो चुका है। इस भीषण दुर्घटना में डूबे 13 लोगों में से अब तक 7 के शव निकाले जा चुके हैं, जिससे शोकाकुल परिवारों को कुछ राहत मिली है। सोमवार को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक और युवक विनेश का शव नदी की गहराई से बरामद किया गया। सेना, एनडीआरएफ (NDRF), और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बाकी 5 लापता युवकों की तलाश में रात-दिन जुटी हुई हैं। वहीं, हादसे में बाल-बाल बचे एक घायल युवक का इलाज अभी भी अस्पताल में जारी है। तलाश जारी, पीड़ितों के नाम इस दर्दनाक हादसे के शिकार हुए 13 युवकों में से अब तक 7 शव निकाले जा चुके हैं। इनमें गगन, ओमपाल, मनोज, भगवती, अभिषेक, करन और सोमवार को बरामद हुए विनेश के नाम शामिल हैं। करन का शव रविवार को कंप्रेसर मशीन की मदद से निकाला गया था। अब भी 5 युवक लापता हैं, जिनकी तलाश में रेस्क्यू टीमें नदी के हर कोने को खंगाल रही हैं। लापता युवकों के नाम हैं: सचिन, हरेश, गजेंद्र, दीपक और ओकेश। इन परिवारों के लिए 110 घंटे का यह इंतजार अत्यंत कष्टकारी साबित हो रहा है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि तलाशी अभियान में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। स्थानीय युवकों की अनूठी पहल: अस्थायी बांध नदी की तेज धारा और दलदल भरी गहराई रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस चुनौती से निपटने के लिए क्षेत्रीय युवकों ने अभूतपूर्व साहस और मेहनत का परिचय दिया है। उन्होंने रात-दिन की परवाह किए बिना लगभग 250 मीटर के डूब क्षेत्र में नदी के पानी का बहाव रोकने के लिए 40 मीटर लंबा एक अस्थायी बांध बना दिया है। इसके अलावा, नदी की मुख्य धारा को डूब क्षेत्र के बीच से नाला बनाकर दूसरी ओर मोड़ा गया है, जिससे बचाव कार्य में लगी टीमों को गड्ढों की गहराई तक पहुँचने में आसानी हो सके। पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से नदी के तल में खुदाई का काम भी युद्ध स्तर पर जारी है ताकि लापता युवकों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके। स्थानीय युवाओं का यह प्रयास सामुदायिक एकजुटता का एक महान उदाहरण है। कंप्रेसर तकनीक बनी आशा की किरण उटंगन नदी के गहरे और दलदली गड्ढों में फंसे शवों को निकालने के लिए एक अनोखी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अब तक बेहद कारगर साबित हुई है। इस तकनीक में ऐसे कंप्रेसर का इस्तेमाल हो रहा है, जिसका प्रयोग सामान्यतः जमीन में 100 से 300 फीट तक फंसे सबमर्सिबल पंप को बाहर निकालने में किया जाता है। जब पंप बालू या मिट्टी के कारण फंस जाते हैं, तब कारीगर कंप्रेसर से हवा के पाइप को भूमिगत पंप की पाइप लाइन में डालते हैं। तेज हवा के दबाव से मिट्टी या बालू हट जाती है और पंप बाहर आ जाता है। उटंगन में इसी सिद्धांत का उपयोग किया गया। स्कूबा ड्राइवर कंप्रेसर के पाइप को नदी के अंदर गहरे गड्ढों में लेकर गए और मिट्टी को हटाने के लिए तेज हवा का इस्तेमाल किया। तकरीबन 30 मिनट तक मिट्टी हटाने के बाद ही करन का शव बाहर निकाला जा सका, जिसे किसी प्रकार का नुकसान भी नहीं पहुंचा था। अब इस सफलता को देखते हुए तीन और कंप्रेसर मशीनों को रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया जाएगा। खनन से बने गहरे गड्ढे बड़ी समस्या बचाव दल ने पाया है कि जिस स्थान पर सभी युवक डूबे थे, वह अवैध खनन की वजह से 25 से 30 फीट तक गहरा गड्ढा बन चुका था। इस गड्ढे में दलदल की मात्रा अत्यधिक थी, जिसके कारण फंसे हुए युवक बाहर नहीं आ सके। कंप्रेसर मशीन की मदद से इस दलदल और मिट्टी को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है, जिससे उम्मीद है कि बाकी 5 लापता युवकों की तलाश जल्द पूरी होगी और उनके परिवारों को शांति मिल सकेगी। Agra: उटंगन नदी त्रासदी: करन का शव मिला, मां-पत्नी बेसुध!

बटेश्वर में यमुना नदी में डूबा युवक, देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

आगरा। आगरा के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बटेश्वर में यमुना नदी में स्नान करते समय एक युवक डूब गया। देर रात तक गोताखोरों और रेस्क्यू टीम ने उसकी तलाश की, लेकिन अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। जानकारी के अनुसार, इरादतनगर थाना क्षेत्र के ग्राम करोधना कला निवासी मानवेंद्र (35) पुत्र अशोक रघुवंशी अपने साथी अजय पुत्र मुरारी लाल के साथ बटेश्वर मंदिर में दर्शन करने आए थे। दर्शन के बाद, वह शाम करीब 7 बजे यमुना नदी में स्नान करने उतरे, लेकिन नदी की गहराई का अंदाजा न होने के कारण डूब गए। घटना होते ही वहाँ मौजूद लोगों ने शोर मचाया, जिसके बाद पुलिस और गोताखोरों को सूचना दी गई। पुलिस ने तुरंत गोताखोरों की मदद से युवक की तलाश शुरू की, जो देर रात तक जारी रही। फिलहाल, रेस्क्यू टीम की मदद से भी खोजबीन की जा रही है। मानवेंद्र विवाहित हैं और उनके दो बेटे और एक बेटी है। उनका परिवार खेतीबाड़ी और मजदूरी करके अपना जीवन यापन करता है। घटना की खबर मिलते ही परिजन भी बटेश्वर पहुंच गए हैं। इस दुखद घटना के बाद, ग्रामीणों ने प्रशासन से बटेश्वर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।

आगरा में 8 किलोमीटर तक यमुना में बहता रहा युवक, ताज सुरक्षा पुलिस ने बचाया

आगरा। आगरा में बुधवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहाँ मानसिक रूप से बीमार एक युवक यमुना के तेज बहाव में 8 किलोमीटर तक बहता रहा। ताज सुरक्षा पुलिस की जल चौकी ने उसे ताजमहल के पास से सुरक्षित बाहर निकाला। दरअसल, थाना ताजगंज के बरौली गाँव का रहने वाला डब्बू बघेल कैलाश मंदिर दर्शन के लिए गया था। घाट पर उसका पैर फिसल गया और वह यमुना में गिर गया। तेज बहाव के कारण किसी की हिम्मत उसे बचाने की नहीं हुई, लेकिन एक व्यक्ति ने डब्बू की तरफ एक 5 लीटर वाली पानी की खाली कैन फेंक दी। उसी कैन के सहारे डब्बू ‘बचाओ-बचाओ’ चिल्लाता हुआ यमुना में बहता रहा और 8 किलोमीटर का सफर तय करके ताजमहल के पास तक पहुँच गया। उसी दौरान, ताज सुरक्षा पुलिस की जल चौकी के जवानों ने उसकी आवाज सुनी। मुख्य आरक्षी संजय सिंह ने तुरंत मोटरबोट से यमुना में एक ट्यूब फेंकी और डब्बू को मोटरबोट में खींचकर बाहर निकाला। डब्बू को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। उसके भाई ने बताया कि डब्बू का इलाज मुंबई में चल रहा है और वह मानसिक रूप से बीमार है।

ओवरकॉन्फिडेंस ले डूबा कैंटर ड्राइवर को! लोगों ने रोका, पर नहीं माना… आगरा-राजस्थान बॉर्डर पर पार्वती नदी में बहे 4 लोग, रेस्क्यू जारी

आगरा। कभी-कभी आत्मविश्वास भी अति हो जाता है, और यही अति आत्मविश्वास आगरा-राजस्थान बॉर्डर पर एक कैंटर चालक की जान पर भारी पड़ गया। लोगों ने उसे पार्वती नदी के उफनते बहाव में कैंटर ले जाने से रोका, लेकिन वह नहीं माना और आखिरकार कैंटर सहित 4 लोग नदी में बह गए। यह दिल दहला देने वाली घटना आज लादूखेड़ा से रनौली रपट गांव लिंकरोड पर स्थित पार्वती नदी के पुल पर हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आंखों के सामने समाया कैंटर, 4 लोग डूबे मानसून के कारण पार्वती नदी इस समय उफान पर है और पुल के ऊपर से पानी तेजी से बह रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थानीय लोगों ने कैंटर चालक को कई बार रोकने की कोशिश की, उसे चेतावनी भी दी, लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी और कैंटर को पानी से भरे पुल पर चढ़ा दिया। थोड़ी ही देर में तेज बहाव में कैंटर संतुलन खो बैठा और नदी में समा गया। इस दौरान कैंटर में चार लोग सवार थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पीछे बैठे एक युवक ने किसी तरह नदी से बाहर निकलने की कोशिश की। उसे निकालने के लिए स्थानीय लोग और बचाव दल तुरंत मौके पर जुटे। खबर लिखे जाने तक, एक युवक को रेस्क्यू कर लिया गया है, जबकि दो अन्य लोग अभी भी लापता हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और SDRF तथा पुलिस मौके पर मौजूद है। नदी के तेज बहाव और पानी की गहराई के कारण राहत कार्य में काफी परेशानी हो रही है। ताजगंज के निवासी थे सभी सवार, कबाड़ लेने जा रहे थे मनिया हादसे में शामिल सभी लोग आगरा के ताजगंज क्षेत्र के गोबर चौकी इलाके के रहने वाले बताए गए हैं। वे कबाड़ का कारोबार करते हैं और मनिया में कबाड़ लेने जा रहे थे। कैंटर का चालक बमरौली कटरा का निवासी है। प्रशासन पर लापरवाही का आरोप: कोई चेतावनी बोर्ड नहीं, बैरिकेडिंग भी नहीं स्थानीय लोगों ने इस हादसे के लिए प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुल पर पानी बहने के बावजूद वहाँ कोई चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग नहीं लगाई गई थी। लोगों का कहना है कि इससे पहले भी इस पुल पर कई बार हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई स्थायी इंतजाम नहीं किए हैं, जिसकी वजह से आज यह बड़ा हादसा हुआ है।

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