आगरा में DDA मेंटेनेंस एजेंसी पर ₹27 लाख के गबन का आरोप: मालिक अमित जायसवाल के खिलाफ FIR दर्ज

आगरा। आगरा के ताजगंज थाना क्षेत्र स्थित शंकर ग्रीन सोसाइटी में DDA मेंटेनेंस एजेंसी पर धोखाधड़ी और गबन का गंभीर आरोप लगा है। सोसाइटी के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) की अध्यक्ष मनीषा सिंह ने इस मामले में एजेंसी के प्रोपराइटर अमित कुमार जायसवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है । आरोप है कि एजेंसी ने निवासियों से ₹27 लाख से अधिक का बिजली बिल वसूलने के बाद उसे जमा नहीं किया, जिसके कारण सोसाइटी पर बिजली कनेक्शन कटने का खतरा मंडरा रहा था । यह रिपोर्ट भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 316(2) के तहत 23 अगस्त 2025 को दर्ज की गई है । सेवाओं में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता शिकायत के मुताबिक, DDA मेंटेनेंस एजेंसी ने 15 अगस्त 2024 से शंकर ग्रीन सोसाइटी को सेवाएं देना शुरू किया था । एजेंसी ने निवासियों से ₹2.5 प्रति वर्ग फुट के हिसाब से मेंटेनेंस चार्ज लिया, लेकिन इसके बदले में दी जा रही सुविधाएं बहुत ही निम्न स्तर की थीं । RWA का आरोप है कि सोसाइटी में रोजाना लिफ्ट दुर्घटनाएं होती रहती थीं, जिसकी शिकायतें बार-बार करने के बावजूद कोई सुधार नहीं किया गया । इसके अलावा, सोसाइटी के लगभग 55-60 कर्मचारियों का मई 2025 का वेतन भी एजेंसी ने नहीं दिया था । सबसे गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। RWA ने आरोप लगाया है कि एजेंसी ने निवासियों से अप्रैल और मई 2025 का बिजली का बिल वसूल लिया था, लेकिन इसे टोरेंट पावर लिमिटेड को जमा नहीं कराया । टोरेंट पावर से RWA को सूचना मिली कि लगभग ₹27 लाख का बिजली बिल बकाया है, और अगर यह 30 मई 2025 तक जमा नहीं हुआ तो कनेक्शन काटा जा सकता है । धोखाधड़ी का आरोप और फर्जी रसीदें शिकायत पत्र में यह भी बताया गया है कि DDA एजेंसी ने धोखाधड़ी की थी । साल 2024 के अगस्त महीने में एजेंसी ने जिस फर्म के नाम पर रसीदें दी थीं, उसका नाम DDA एडवांस फैसिलिटी था । इस फर्म का GSTIN नंबर भी था, लेकिन यह अमित कुमार जायसवाल के नाम पर पंजीकृत नहीं था । इसके अलावा, एजेंसी ने RWA के साथ जो एग्रीमेंट किया था, वह भी रजिस्टर्ड नहीं था और उसमें एग्रीमेंट लागू होने की कोई तारीख भी नहीं थी । पुलिस से की त्वरित कार्रवाई की मांग RWA अध्यक्ष मनीषा सिंह ने पुलिस कमिश्नर को भेजे गए पत्र में बताया था कि वे पिछले दो महीनों से कानूनी कार्रवाई के लिए प्रयास कर रहे थे, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया । उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच कर आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और निवासियों से वसूली गई राशि वापस कराई जाए । यह मामला शहर की एक हाई-राइज सोसाइटी से जुड़ा है जिसमें लगभग 250 परिवार रहते हैं । पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब इस पर आगे की जांच कर रही है ।

DVVNL के बाबू ने अपने और साथियों के खाते में डाले ₹2 करोड़: सातवें वेतन आयोग का बकाया बताकर किया फर्जीवाड़ा, निलंबित

आगरा। आगरा में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) के एक बाबू को करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। बाबू ने सातवें वेतन आयोग का बकाया बताकर लगभग दो करोड़ रुपये अपने और अपने दो अन्य साथियों के बैंक खातों में जमा करवा लिए थे। यह मामला विभाग के आंतरिक ऑडिट में सामने आया। ऑडिट में हुआ खुलासा, तीन कर्मचारियों को मिला सामान्य से अधिक एरियर पिछले कुछ दिनों से डीवीवीएनएल में आय-व्यय का ऑडिट चल रहा था। इसी दौरान एक लेखाकार ने अधिकारियों को बताया कि तीन कर्मचारियों के अकाउंट में सामान्य से कहीं ज्यादा एरियर की राशि भेजी गई है। इसके बाद अधिकारियों ने मामले की गहन जांच के आदेश दिए। जांच में पता चला कि कमला नगर स्थित टेस्ट डिवीजन में वेतन बनाने का काम करने वाले टीजी-2 पवन कुमार ने मार्च 2024 से मई 2025 के बीच सातवें वेतन आयोग के एरियर के बहाने अपने खाते में 1.18 करोड़ रुपये जमा करा लिए। इसके अलावा, उन्होंने एक अन्य कर्मचारी पिंकी देवी के खाते में 63 लाख रुपये और सफाई कर्मचारी चिंगी राम के खाते में 17 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी करवा दिया। पिंकी और चिंगी ने पैसे लौटाने की कही बात, पवन कुमार ने नहीं मानी गलती जांच के दौरान पिंकी और चिंगी ने अपने खातों में आए अतिरिक्त भुगतान को वापस करने की बात कही और पोस्ट डेटेड चेक भी दिए। लेकिन पवन कुमार ने अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया। वह अधिकारियों के सवालों के जवाब देने की बजाय आनाकानी करते रहे और सवालों को घुमाते रहे। इसके बाद, विभाग ने पवन कुमार को तत्काल निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही, उनके खिलाफ स्थानीय थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है। विभाग ने कहा है कि पवन कुमार के वेतन और फंड से इस राशि की वसूली की जाएगी। यह घटना सरकारी विभागों में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल उठाती है। और खबरें भी हैं…

आगरा में 21 ग्राम प्रधानों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: पंचायत चुनाव से पहले गर्माया सियासी माहौल, जांच पर भी उठे सवाल

आगरा। आगरा में 21 ग्राम प्रधानों के दामन पर भ्रष्टाचार के दाग लगे हैं, जिनकी जांच चल रही है। इन प्रधानों पर हैंडपंप रिबोर, नाली-खड़ंजा, आरसीसी निर्माण आदि विकास कार्यों में अनियमितता के आरोप हैं। आगामी पंचायत चुनाव को देखते हुए यह भ्रष्टाचार का मुद्दा सियासी गलियारों में गरमा सकता है। प्रधानों पर आरोपों की लंबी फेहरिस्त, शिकायतकर्ताओं को शक जिले में कुल 690 ग्राम प्रधान हैं और पंचायतीराज विभाग के पास इनका पूरा लेखा-जोखा रहता है। जैसे-जैसे पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं, गाँव-गाँव में शिकायतें और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विकास भवन में अब तक मिली शिकायतों में 21 प्रधानों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की जांच पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारी प्रधानों को बचाने में जुटे हुए हैं और जांच सही ढंग से नहीं हो रही है। उन्हें मिलीभगत का भी शक है। वहीं, आरोपी प्रधान इन शिकायतों को चुनावी रंजिश का हिस्सा बता रहे हैं। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह का कहना है कि जिला स्तरीय अधिकारियों से जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इन ब्लॉकों के प्रधानों पर हैं भ्रष्टाचार के आरोप: इन सभी ग्राम पंचायतों के प्रधानों पर विकास कार्यों में अनियमितता के आरोपों की जांच चल रही है। शपथपत्र के साथ लगती है शिकायत, दोषी मिलने पर कड़ी कार्रवाई ग्राम प्रधानों के विरुद्ध सीधी शिकायत पर जांच नहीं होती है। शिकायतकर्ता को शपथपत्र देना पड़ता है, जिसके बाद जिलाधिकारी या मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) स्तर के अधिकारी जांच का आदेश देते हैं। जांच भी जिला स्तरीय अधिकारी द्वारा ही कराई जाती है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज हो सकते हैं। वित्तीय अनियमितता मिलने पर उनसे सरकारी धन की वसूली भी की जाती है। पिछले पांच सालों में आगरा जिले में दो प्रधानों के वित्तीय अधिकार अनियमितता के आरोप सिद्ध होने पर सीज किए जा चुके हैं। यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई की जाती है। और खबरें भी हैं…

आगरा में कांग्रेस का नगर निगम पर धरना: ‘स्मार्ट सिटी के नाम पर बंदरबांट, सड़कें-सीवर बदहाल’, उग्र आंदोलन की चेतावनी

आगरा। आगरा की फतेहाबाद रोड पर सोमवार को कांग्रेस ने नगर निगम ताजगंज जोन पर धरना देकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और शहर की विभिन्न समस्याओं के निदान के लिए प्रदेश नगर विकास मंत्री के नाम एक ज्ञापन जोनल अधिकारी गजेंद्र कुमार को सौंपा। सीवर-पानी की समस्या और बदहाल सड़कों पर भड़के कांग्रेसी धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अनिल शर्मा ने किया। उन्होंने आगरा की मूलभूत समस्याओं को उठाते हुए कहा कि शहर में जगह-जगह सीवर लाइनें बह रही हैं और मैनहोल खुले पड़े हैं। उन्होंने पानी की किल्लत पर भी चिंता जताते हुए कहा कि लोगों को पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है। कुछ क्षेत्रों में तो सीवर और पानी मिक्स होकर आ रहा है, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बना हुआ है। शर्मा ने बारिश से खराब हुई सड़कों और बिजली व्यवस्था पर भी सवाल उठाए, और इनकी जल्द मरम्मत की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन समस्याओं को लेकर कई बार धरना दिया गया है, लेकिन “निगम की सोई हुई सरकार और इन अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है।” ‘स्मार्ट सिटी के नाम पर धोखा’: उग्र आंदोलन की चेतावनी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि “स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, और अधिकारी मौज मार रहे हैं।” उनका कहना था कि निगम के पैसे का “बंदरबांट किया जा रहा है” और आगरा के विकास के नाम पर जनता के साथ धोखा हो रहा है। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो यह अभी केवल एक सांकेतिक धरना है, और इसके बाद उग्र आंदोलन किया जाएगा। यह प्रदर्शन शहर की बुनियादी ढाँचे और नागरिक सुविधाओं की बदहाली पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की कथित उदासीनता को उजागर करता है। और खबरें भी हैं…

आगरा के SN मेडिकल कॉलेज में ‘करोड़ों का AC सिस्टम ध्वस्त’: बाल योगी का आरोप – सिर्फ उद्घाटन के दिन चले AC, मरीज गर्मी से बेहाल!

आगरा। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में बनी करोड़ों रुपये की नई बिल्डिंग का AC सिस्टम ध्वस्त होने को लेकर बाल योगी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर बिल्डिंग की मौजूदा स्थिति दिखाई है, जिसमें दावा किया गया है कि सिर्फ उद्घाटन के दिन ही AC चले थे, उसके बाद से आज तक वे काम नहीं कर रहे हैं। मरीजों को भीषण गर्मी में राहत देने के लिए तीमारदार अपने घरों से पंखे लाने को मजबूर हैं। दैनिक भास्कर ने इस मामले में बाल योगी से उनके आरोपों पर विस्तार से बात की है। “मिनी एम्स” का सपना और 5 करोड़ का AC घोटाला? बाल योगी ने अपने वीडियो में आरोप लगाया है कि 200 करोड़ रुपये की लागत से यह बिल्डिंग सरकारी जमीन पर “मिनी एम्स” बनाने के सपने के साथ निर्मित हुई थी। इसमें अकेले सेंट्रल AC सिस्टम के लिए दो कंपनियों को 5 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया था। बाल योगी का आरोप है कि AC सिर्फ उद्घाटन के समय ही चला था, जिसके बाद से यह बंद पड़ा है। बिल्डिंग में टफन ग्लास लगाए गए हैं, जो AC के सही संचालन के लिए ज़रूरी होते हैं, लेकिन बावजूद इसके मरीज वार्डों में गर्मी से उबल रहे हैं। कोविड के दान वाले AC डॉक्टरों के चैंबर में, जूनियर डॉक्टर के भरोसे इलाज बाल योगी ने यह भी आरोप लगाए हैं कि कोविड काल में मेडिकल कॉलेज को दान में मिले AC डॉक्टरों ने अपने चैंबर में लगवा लिए हैं। उनका कहना है कि डॉक्टर अपने प्राइवेट अस्पतालों में बैठते हैं और हफ्ते में सिर्फ दो-तीन दिन के लिए मेडिकल कॉलेज आते हैं। मरीजों का इलाज जूनियर डॉक्टर कर रहे हैं, और तो और, पढ़ने आए बच्चों (मेडिकल छात्रों) से इलाज करवाया जा रहा है। बाल योगी के अनुसार, “यहां डॉक्टर अपने साथ गनर लेकर चलते हैं। मुन्ना भाई बनकर चलते हैं। यदि कोई सच्चाई बताना चाहता है तो उसकी पिटाई की जाती है।” दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में री-टेंडरिंग के माध्यम से फिर से भुगतान किए गए हैं, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री पर साधा निशाना, जांच की मांग बाल योगी ने अपने वीडियो में सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मंत्री जी लखनऊ से अपनी पूरी टीम के साथ प्राइवेट अस्पतालों में मशीनों का उद्घाटन करने तो आते हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति देखने नहीं जाते हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग में पांचवीं मंजिल पर AC का पूरा सिस्टम ध्वस्त हो चुका है, बिल्डिंग जर्जर हो गई है, AC के पाइप लटक गए हैं और तारें भी लटक गई हैं। बाल योगी ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। और खबरें भी हैं…

आगरा में ‘पुलिस-प्रॉपर्टी डीलर गठजोड़’ पर गंभीर आरोप: महिला ने कहा- पति को झूठे केस में फंसाया, अब बेटे को जेल भेजने की धमकी दे रही पुलिस!

किरावली, आगरा। आगरा के अछनेरा थाना क्षेत्र में एक महिला ने प्रॉपर्टी डीलर और स्थानीय पुलिस पर मिलीभगत कर उसकी पैतृक जमीन हड़पने का संगीन आरोप लगाया है। कुकथला निवासी राजकुमारी शर्मा ने दावा किया है कि उनकी पुश्तैनी जमीन (गाटा संख्या 292) पर प्रॉपर्टी डीलर ने अवैध कब्जा करने की कोशिश की, और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके पति को झूठे केस में फंसाकर जेल भिजवा दिया गया। अब महिला का आरोप है कि पुलिस उसके बेटे को भी फंसाने की धमकी देकर समझौता करने का दबाव बना रही है। क्या है पूरा मामला? राजकुमारी शर्मा के अनुसार, उनकी पैतृक जमीन गाटा संख्या 292 में उनके सहित पांच परिजनों का हिस्सा है। प्रॉपर्टी डीलर मुकेश अग्रवाल पहले ही इस जमीन के तीन हिस्सेदारों से जमीन खरीद चुके हैं। अब वह राजकुमारी और शेष दो अन्य हिस्सेदारों की जमीन पर भी कब्जा करना चाहते हैं। जब राजकुमारी ने अपनी जमीन बेचने से इनकार कर दिया, तो आरोप है कि मुकेश अग्रवाल ने स्थानीय पुलिस से कथित तौर पर मिलकर उनके पति रवि शर्मा को झूठे आरोपों में जेल भिजवा दिया। जमीन पर कब्जा, मारपीट और धमकी के आरोप राजकुमारी ने बताया कि 3 अगस्त 2025 को शाम 8 बजे मुकेश अग्रवाल अपने साथियों वासुदेव और रमेश चौकीदार के साथ 8-10 अन्य लोगों को लेकर उनकी जमीन पर पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने जमीन पर लगी मेड़ों को उखाड़ दिया और जब महिला ने इसका विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट भी की गई। पीड़िता का यह भी आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें और उनके बेटे को फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी। पुलिस पर भी मिलीभगत और धमकी का आरोप राजकुमारी शर्मा ने इस घटना की शिकायत थाना अछनेरा में दर्ज कराई। लेकिन, उनका आरोप है कि थाना प्रभारी ने मामले को गंभीर धाराओं में दर्ज करने के बजाय, एनसीआर (गैर-संज्ञेय रिपोर्ट) में दर्ज कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। इससे भी गंभीर आरोप यह है कि 6 अगस्त को एसआई मनदीप ने महिला को थाने बुलाकर उसके बेटे को जेल भिजवाने की धमकी देकर राजीनामा (समझौता) करने का दबाव बनाया। पीड़िता राजकुमारी शर्मा ने अब उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और प्रॉपर्टी डीलर व कथित तौर पर मिलीभगत करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। यह मामला भूमि विवादों में पुलिस की कथित भूमिका और आम नागरिकों को न्याय दिलाने में आने वाली चुनौतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

आगरा में ‘लेडी सिंघम’ CDO का हंटर: तेज-तर्रार IAS प्रतिभा सिंह ने रोका BSA का वेतन, मीटिंग रद्द कर दिया भ्रष्टाचार का संदेश!

आगरा। आगरा में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) प्रतिभा सिंह ने बेसिक शिक्षा विभाग में बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) जितेंद्र कुमार गोंड का वेतन रोक दिया है और जिला टास्क फोर्स (DTF) की एक महत्वपूर्ण बैठक भी रद्द कर दी। अपने तेज-तर्रार और ‘लेडी सिंघम’ जैसे अंदाज के लिए जानी जाने वाली IAS प्रतिभा सिंह ने यह एक्शन BSA पर लापरवाही और भ्रष्टाचार की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। मीटिंग में ‘गायब’ हुईं महत्वपूर्ण सूचनाएं, CDO का पारा हाई! विकास भवन सभागार में CDO प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता में बेसिक शिक्षा विभाग की DTF की बैठक होनी थी। पिछली कई बैठकों में CDO ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मृतक आश्रित नियुक्ति और निलंबित शिक्षकों की बहाली से संबंधित सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं बैठक की बुकलेट में शामिल की जाएं। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि BSA जितेंद्र कुमार गोंड द्वारा ये जरूरी जानकारी बुकलेट में शामिल नहीं की गई। इसे देखते ही CDO प्रतिभा सिंह का पारा चढ़ गया। उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए न केवल बैठक को तुरंत स्थगित कर दिया, बल्कि BSA को सभी सूचनाओं के साथ नई रिपोर्ट तैयार करने का सख्त आदेश भी दिया। ‘मोटी वसूली’ के आरोपों पर सीधा वार: वेतन रोकने का फरमान! CDO प्रतिभा सिंह के इस कड़े कदम के पीछे BSA पर लगे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं। बताया जा रहा है कि अध्यापकों के निलंबन और बहाली में BSA द्वारा ‘मोटी धनराशि वसूलकर अपने चहेते शिक्षकों को मनमानी जगह बहाली देने’ की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जब इन आरोपों से संबंधित दस्तावेज जांच समिति को उपलब्ध नहीं कराए गए, तो CDO ने बिना किसी देरी के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का वेतन रोकने का आदेश दे दिया। आदेश में साफ कहा गया है कि जब तक सभी आवश्यक अभिलेख जमा नहीं किए जाते, वेतन जारी नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है जो अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। कौन हैं IAS प्रतिभा सिंह? ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली अधिकारी! प्रतिभा सिंह 2020 UPSC बैच की एक युवा और बेहद प्रभावशाली IAS अधिकारी हैं। आगरा में मुख्य विकास अधिकारी का पदभार संभालने के बाद से ही वह अपने सख्त निर्णयों, त्वरित कार्रवाई और ‘जीरो टॉलरेंस’ रवैये के लिए चर्चा में रही हैं। CDO प्रतिभा सिंह का यह कदम आगरा के प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक बड़ा संदेश है, और यह दिखाता है कि वह किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेंगी।

आगरा जिला अस्पताल की 3 कुक को नोटिस: ’50-50 हजार रुपये न देने पर नौकरी से हटाया’, कैबिनेट मंत्री तक पहुंचा मामला

आगरा। आगरा के जिला अस्पताल में कुक के तौर पर काम करने वाली तीन महिलाओं ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनसे नौकरी पर बने रहने के लिए 50-50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई, और रिश्वत न देने पर उन्हें नोटिस देकर काम से हटा दिया गया है। इन महिलाओं ने अपनी शिकायत कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान तक पहुंचाई है। 15 साल से काम कर रही थीं आउटसोर्सिंग पर पीड़ित महिलाओं, रानी देवी, अमरजीत कौर और ममता पाल का कहना है कि वे पिछले 15 सालों से डाटा पावर कंप्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर जिला अस्पताल में खाना बनाने का काम कर रही थीं। मरीजों के लिए खाना बनाने के साथ ही वे उसे बांटने का काम भी करती थीं। ममता पाल ने बताया कि उनके परिवारों की आजीविका पूरी तरह से इसी नौकरी पर निर्भर है। तीनों महिलाओं का आरोप है कि उनसे 50-50 हजार रुपये मांगे गए, और जब उन्होंने पैसे नहीं दिए, तो उन्हें एक महीने का नोटिस देकर काम से हटाया जा रहा है। अमरजीत कौर का भी यही आरोप है कि पैसे न देने के कारण ही उन्हें नोटिस मिला है। ‘एक लाख लेकर नए कुक को रखा’ और कैबिनेट मंत्री ने लिखा पत्र महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल के अधिकारियों ने एक लाख रुपये लेकर एक नए कुक को नौकरी पर रख लिया है। उनका कहना है कि यह उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र साधन है और इस कार्रवाई से उनके परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रानी देवी ने बताया कि उन्होंने कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य से मुलाकात कर अपनी पूरी समस्या बताई। इस पर कैबिनेट मंत्री ने जिलाधिकारी (DM) को पत्र लिखकर तीनों महिलाओं को फिर से बहाल करने का अनुरोध किया है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इस पर एक महीने का समय मांगा है। महिलाएं अपनी बात पर अड़ी हैं कि उन्हें सिर्फ इसलिए हटाया गया है क्योंकि उन्होंने रिश्वत देने से इनकार कर दिया। यह मामला जिला अस्पताल में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर रहा है।

आगरा पहुंचते ही राज्यपाल के कुलपति ने छुए पैर: वीडियो वायरल होने से विवाद, कार्यकाल विस्तार की अटकलें तेज!

आगरा। आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी द्वारा राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के पैर छूने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना ने शहर में एक नई बहस छेड़ दी है और कुलपति के इस कृत्य पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। राज्यपाल दो दिवसीय दौरे पर आगरा में हैं, जहां वह कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। गेस्ट हाउस पहुंचते ही कुलपति ने छुए पैर, फिर पुलिस कमिश्नर ने किया सैल्यूट राज्यपाल आनंदी बेन पटेल बुधवार दोपहर को यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस पहुंचीं। वह शहर में कई कार्यक्रमों में भाग लेंगी, जिनमें ब्रिटिश समय की क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी का उद्घाटन और नेशनल चैंबर का कार्यक्रम शामिल है। यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में राज्यपाल के स्वागत के लिए अधिकारियों के साथ कुलपति प्रो. आशु रानी भी मौजूद थीं। जैसे ही राज्यपाल अपनी गाड़ी से उतरीं, कुलपति ने उन्हें बुके भेंट किया और फिर उनके पैर छुए। इस दृश्य के तुरंत बाद, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने उन्हें सैल्यूट किया, और कुलसचिव अजय मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों ने भी उन्हें बुके दिए। इस दौरान उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी वहां उपस्थित थे। कार्यकाल विस्तार की अटकलें और जांच का सामना कुलपति प्रो. आशु रानी के पैर छूने का वीडियो सामने आते ही यह घटना चर्चा का विषय बन गई है। सूत्रों का कहना है कि कुलपति का कार्यकाल सितंबर में समाप्त हो रहा है और वह अपना कार्यकाल विस्तार करवाना चाहती हैं। इस पृष्ठभूमि में उनके इस कृत्य को कार्यकाल विस्तार के प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, कुलपति प्रो. आशु रानी के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। उनके खिलाफ कोर्ट में मुकदमे दर्ज हुए हैं, लोकपाल में शिकायतें पहुंची हैं और जांच भी शुरू हो गई है। यही नहीं, उनके खिलाफ विजिलेंस जांच भी चल रही है। ऐसे में, इस वायरल वीडियो ने उनकी स्थिति को और भी पेचीदा बना दिया है। राज्यपाल 31 जुलाई को यूनिवर्सिटी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगी, जिससे इस मामले को लेकर आगे क्या रुख रहता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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