Agra में IPO और Crypto Investment के नाम पर करोड़ों की ठगी, Cyber अपराधी गिरफ्तार

Agra की साइबर क्राइम पुलिस ने IPO और Crypto Currency में निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले एक बड़े साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान धर्मेंद्र उर्फ डिक्की के रूप में हुई है। वह लोगों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Telegram और WhatsApp ग्रुप्स के माध्यम से ऊँचे रिटर्न का लालच देकर फर्जी निवेश योजनाओं में फंसाता था। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने सिर्फ एक ही शिकायतकर्ता से 1.96 करोड़ रुपये की ठगी की थी। पुलिस की तत्परता से जांच के बाद 1.78 करोड़ रुपये की राशि को रिकवर कर लिया गया है। दुबई और हांगकांग तक फैला था नेटवर्क पूछताछ में यह भी सामने आया है कि डिक्की का नेटवर्क सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं था, बल्कि दुबई, हांगकांग, मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड तक फैला हुआ था। गिरोह ठगी की रकम को हवाला और क्रिप्टोकरेंसी चैनलों के जरिए देश से बाहर भेजता था, ताकि पुलिस और अन्य जाँच एजेंसियाँ इसे ट्रैक न कर पाएं। एडिशनल डीसीपी क्राइम आदित्य कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि उसका पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है और उस पर हरियाणा और दिल्ली में भी केस दर्ज हैं। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर उसके खिलाफ कुल 46 शिकायतें दर्ज हैं, जिन पर पुलिस जांच कर रही है। आदित्य कुमार ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

आगरा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर महिलाओं से 65 लाख की ठगी: मुंबई पुलिस अधिकारी बन डराया, जेल भेजने की दी धमकी

आगरा। साइबर ठगों ने आगरा में महिलाओं को अपना नया निशाना बनाया है। हाल ही में दो अलग-अलग मामलों में, साइबर अपराधियों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर एक महिला और एक रिटायर अधिकारी की पत्नी सहित दो लोगों से कुल 65 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है। इन शातिर ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताकर पीड़ितों को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामलों में फंसाने और जेल भेजने की धमकी देकर ठगी को अंजाम दिया। धोखाधड़ी का पता चलने पर पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की है। जल निगम कर्मी की विधवा से ठगे 22.50 लाख: ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का डर दिखाकर कराई रकम जमा थाना न्यू आगरा क्षेत्र के कालिंदीपुरम निवासी एक महिला, जिनके पति जल निगम में कार्यरत थे और उनकी मृत्यु के बाद उन्हें नौकरी मिली थी, साइबर ठगों का पहला निशाना बनीं। 16 जुलाई को महिला के पास एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को कोलाबा पुलिस स्टेशन, मुंबई से बताया और कहा कि उनके नाम से मुंबई में एक खाता खोला गया है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित रुपयों का लेन-देन हो रहा है। ठग ने महिला को बताया कि उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है और गिरफ्तारी की जाएगी, जिससे महिला घबरा गईं। ठग ने उनसे उनके बैंक खातों की जानकारी मांगी और कहा कि वे तभी बच सकती हैं, जब रकम देंगी। उन्हें बताया गया कि उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया है। इसके बाद, ठगों ने उन्हें बैंक भेजकर उनके खाते से 22 लाख 50 हजार रुपये जमा करा लिए। बाद में उन्हें धोखाधड़ी का पता चला और उन्होंने पुलिस से शिकायत की। पुलिस इस मामले में संबंधित खातों की जांच कर रही है। रिटायर अधिकारी की पत्नी से 43 लाख की ठगी: 6 दिन ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा दूसरा मामला भी न्यू आगरा क्षेत्र का है, जहाँ सिंचाई विभाग से रिटायर एक अधिकारी और उनकी पत्नी को निशाना बनाया गया। 18 जुलाई को रिटायर अधिकारी के पास एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को कोलाबा पुलिस स्टेशन, मुंबई से बताते हुए कहा कि उनका संबंध वर्ष 2023 से जेल में बंद नरेश गोयल से है और दोनों ने मिलकर बड़ी धनराशि का हेरफेर किया है। ठग ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बताया। जब अधिकारी ने इससे इनकार किया, तो ठग ने खुद को डीसीपी बताते हुए धमकी दी कि “मेज पर अरेस्ट वारंट रखा है। गिरफ्तारी कराकर उल्टा लटकाकर पिटाई करूंगा।” इसके बाद, ठग ने उन्हें कबूलने के लिए कई बार धमकाया और उनके खाते व एफडी की जानकारी फोन पर मांग ली। जब अधिकारी ने चलने-फिरने में असमर्थता बताई, तो ठग ने उनकी पत्नी से बात की और उन्हें भी धमकाया। आरोपियों ने महिला को लगातार 6 दिन तक कई बार कॉल करके ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और उनके खाते से 43 लाख रुपये जमा करा लिए। यह रकम उनकी जिंदगी भर की जमा पूंजी थी। धोखाधड़ी का पता चलने पर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आगरा पुलिस ने इन दोनों ही मामलों को गंभीरता से लिया है और साइबर क्राइम ब्रांच को जांच के निर्देश दिए हैं ताकि इन शातिर ठगों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।

जनसेवा केंद्र या ‘धोखाधड़ी का अड्डा’! आगरा के बोदला सेक्टर-4 में संचालक करता था साइबर ठगों की मदद, खातों और QR कोड से मंगाता था पैसा; 3 गिरफ्तार

आगरा। आगरा पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर उनके बैंक खातों और क्यूआर कोड का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए करता था। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें बोदला सेक्टर-4 में एक जनसेवा केंद्र चलाने वाला मुख्य आरोपी भी शामिल है। कैसे फंसाता था जनसेवा केंद्र संचालक? डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब जगदीशपुरा के रामनगर निवासी साहिल निगम ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। साहिल के फोन पर लगातार संदिग्ध कॉल और मैसेज आ रहे थे। साहिल ने बताया कि बोदला सेक्टर-4 में “अपना कम्युनिकेशन साइबर कैफे” नाम से जनसेवा केंद्र चलाने वाले अभय वर्मा ने उससे कहा कि उसके (अभय के) खाते की लिमिट पूरी हो गई है, इसलिए उसने साहिल का बैंक खाता और एटीएम कार्ड ले लिया। इसके बाद अभय ने साहिल का एटीएम कार्ड अपने साथियों कार्तिक (उर्फ कुंदन) और प्रियांशु को दे दिया। साहिल के खाते में 3-4 बार पैसे आए, और ये तीनों साहिल का एटीएम कार्ड का उपयोग करके पैसे निकालते रहे। शनिवार को पुलिस ने आरोपी अभय वर्मा, कुंदन उर्फ कार्तिक (लोहामंडी) और प्रियांशु (लोहामंडी) को गिरफ्तार कर लिया। कमीशन के लालच में बना ठगों का जरिया गिरफ्तार आरोपी अभय वर्मा ने पूछताछ में बताया कि उसके जनसेवा केंद्र पर उसकी मुलाकात आयुष नामक एक व्यक्ति से हुई थी। आयुष ने कथित तौर पर गेमिंग के नाम पर अभय से उसके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोड की जानकारी मांगी और बदले में कमीशन देने का लालच दिया। कमीशन के लालच में आकर अभय वर्मा ने आयुष और उसके साथी मुकेश को अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोड उपलब्ध कराना शुरू कर दिया। इन खातों में समय-समय पर साइबर ठगी के पैसे आते थे, जिन्हें अभय वर्मा सीडीएम मशीन के माध्यम से अन्य खातों में ट्रांसफर कर देता था और अपना कमीशन रख लेता था। अभय के साथ उसके जनसेवा केंद्र में काम करने वाले कुंदन उर्फ कार्तिक और प्रियांशु भी इस अपराध में शामिल हो गए। उन्होंने भी अन्य लोगों से खाते, क्यूआर कोड और एटीएम कार्ड जुटाकर साइबर ठगों को मुहैया कराए। तीनों अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे षड्यंत्रपूर्वक लोगों को बहला-फुसलाकर बैंकिंग विवरण प्राप्त कर साइबर ठगी के लेन-देन में शामिल थे। यह घटना दर्शाती है कि कैसे कुछ जनसेवा केंद्र, जो लोगों की मदद के लिए बनाए गए हैं, साइबर अपराधियों के लिए ‘स्वयं सेवा केंद्र’ बन गए हैं।

आगरा में शातिर ठग का नया ‘खेल’: ATM में डाला फेवीक्विक, चिपके कार्ड! CCTV में कैद हुआ आरोपी, पुलिस कर रही तलाश

आगरा। आगरा में शातिर ठगों ने एटीएम से ठगी का एक नया तरीका ईजाद किया है। यहां एटीएम मशीन में कार्ड डालने वाली जगह पर फेवीक्विक डालकर छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। एक युवक ने अलग-अलग स्थानों पर दो एटीएम मशीनों को निशाना बनाया, जिससे रुपये निकालने आए लोगों के कार्ड चिपक गए। आरोपी दोनों ही एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गया है। एटीएम संचालक की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत दे दी गई है। काली टोपी वाले युवक ने ऐसे दिया वारदात को अंजाम यह घटना एत्माद्दौला क्षेत्र के नुनिहाई पर दाऊजी मिष्ठान भंडार के पास स्थित हिताची कंपनी के एटीएम पर हुई। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि काली टोपी और काले कपड़े पहने एक युवक एटीएम में आता है। वह पहले अपनी पैंट की जेब से एटीएम कार्ड निकालकर मशीन में लगाता है और उसे अंदर-बाहर करता है। कुछ सेकंड बाद उसके दाएं हाथ में फेवीक्विक की बोतल नजर आती है, जिसे वह कार्ड डालने वाली जगह पर डाल देता है। फेवीक्विक डालने के बाद वह अपने एटीएम कार्ड से कुछ चेक करता है और फिर वहां से चला जाता है। कुछ देर बाद, एक अन्य व्यक्ति रुपये निकालने के लिए मशीन पर आता है। जैसे ही वह अपना कार्ड डालता है, उसका एटीएम कार्ड मशीन में चिपक जाता है। किसी तरह अपना एटीएम कार्ड निकालने के बाद पीड़ित ने मशीन संचालक प्रशांत कुमार को पूरी घटना के बारे में बताया। दूसरे ATM को भी बनाया निशाना, पुलिस जांच में जुटी इस घटना के दो दिन बाद, वही युवक ट्रांसयमुना थाना क्षेत्र के टेडी बगिया पर स्थित एक अन्य एटीएम पर पहुंचता है और बिल्कुल उसी तरह से कार्ड डालने की जगह पर फेवीक्विक डाल देता है। एटीएम कंपनी की ओर से दोनों ही मामलों में थाने में तहरीर दी गई है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपी युवक की तलाश कर रही है और इस नई तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए सतर्क हो गई है। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे एटीएम का इस्तेमाल करते समय मशीन को ध्यान से देखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।

Verified by MonsterInsights