
ओडिशा। प्यार में ‘जाति’ की दीवार तोड़ने वाली एक बेटी को उसके अपने ही परिवार और समाज ने ‘मृत’ घोषित कर दिया। ओडिशा के रायगढ़ा जिले के बाइगांगुड़ा गांव में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक आदिवासी परिवार ने बेटी की लव मैरिज से नाराज होकर उसका ‘जीते जी’ अंतिम संस्कार कर दिया। सिर्फ यही नहीं, परिवार के 40 सदस्यों ने अपने सिर मुंडवाए, पिंडदान किया और पूरे परिवार का शुद्धिकरण किया, जिसमें बलि भी दी गई।
‘वो हमारे लिए मर चुकी है’: परिवार का दर्द और समाज का दबाव
सुम्मत माझी की चचेरी बहन सायलेरी ने कुछ महीने पहले परिवार को बिना बताए दूसरी जाति के रमेश के साथ शादी कर ली। इस फैसले ने सायलेरी के परिवार और पूरे आदिवासी समाज को हिला दिया। सायलेरी के चचेरे भाई सुम्मत माझी ने रुंधे गले से कहा, “उस लड़की का नाम मत लीजिए। अब वह हमारे लिए मर चुकी है। अब उससे हमारा कोई रिश्ता नहीं। वह कभी अपने मां-बाप के घर वापस नहीं आ सकती।“
सुम्मत ने बताया कि बेटी के जाने के ठीक 10 दिन बाद उन्होंने पंडित बुलवाकर उसका अंतिम संस्कार किया, सिर मुंडवाया, पिंडदान किया और पूरे परिवार का शुद्धिकरण किया। उनका कहना था, “हमें सिर मुंडवाना पड़ा, शुद्धिकरण करना पड़ा, नहीं तो हम समाज में रह नहीं पाते। सायलेरी ने जाति से बाहर शादी करके हमें अपवित्र कर दिया। उसने सिर्फ जाति की रेखा नहीं तोड़ी, बल्कि परंपरा भी तोड़ दी।”
खिरोद माझी, जो रिश्ते में सायलेरी के चाचा लगते हैं, ने कहा कि अगर वे शुद्धिकरण न करते, तो बिरादरी के लोग उनके घर का एक गिलास पानी तक नहीं पीते और उन्हें बिरादरी से बाहर कर दिया जाता।
₹70 हजार में हुआ ‘जाति मिलन पूजा’, दिव्यांग जोड़े की दर्दभरी कहानी
सायलेरी और रमेश दोनों दिव्यांग हैं। सायलेरी का एक पैर रेल हादसे में चला गया था, जबकि रमेश बिजली के झटके से दिव्यांग हुए थे। दोनों की मुलाकात दिव्यांगों की एक मीटिंग में हुई थी और वे एक-दूसरे से प्यार कर बैठे। सायलेरी आदिवासी समुदाय से हैं और रमेश एससी समुदाय से।
रमेश ने बताया, “हमने तो बस एक-दूसरे से प्यार किया था, लेकिन समाज ने इसे गुनाह बना दिया।” शादी के बाद सायलेरी के रिश्तेदार रमेश के घर आ गए और धमकी देते हुए ₹5 लाख मांगने लगे ‘शुद्धिकरण’ के लिए। रमेश, जो खुद ₹1.5 लाख के कर्ज में डूबे थे और दिव्यांग पेंशन पर गुजारा कर रहे थे, ने ब्याज पर ₹70 हजार कर्ज लेकर सायलेरी के रिश्तेदारों को दिए।
सायलेरी ने रोते हुए कहा, “जब मुझे मदद की जरूरत थी, तब कोई नहीं आया, शादी कर ली तो मेरे पति से पैसे मांगने लगे।”
‘जाति मिलन पूजा’: समाज से बहिष्कृत होने का डर
इस आदिवासी समाज के प्रमुख शिबराम माझी ने बताया कि जब कोई लड़की दूसरी जाति के लड़के से शादी करती है, तो समाज की परंपरा के अनुसार ‘जाति मिलन पूजा’ करनी पड़ती है। अगर कोई ये पूजा न करे, तो लड़की के पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है। लोग उसके घर का पानी तक नहीं पीते, न कोई उनके घर आता-जाता है, और न ही उस घर की बेटियों से कोई शादी करता है।
शिबराम ने यह भी स्पष्ट किया कि लड़की के लौटने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि “अब वो इस गांव की नहीं है।” उन्होंने कहा कि परिवार ने गुस्से में सिर मुंडवाए होंगे, लेकिन यह परंपरा का हिस्सा नहीं है। यह घटना दर्शाती है कि समाज में आज भी जातिगत परंपराओं का कितना गहरा प्रभाव है और प्रेम विवाह करने वालों को किस हद तक सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है।