
किरावली, आगरा। फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र के समुचित शैक्षिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सांसद राजकुमार चाहर ने लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत तहसील किरावली के पुरामना गाँव में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने की जोरदार मांग उठाई है। सांसद ने इस मांग के पीछे ठोस तर्क दिए हैं, जिसमें क्षेत्र में केंद्रीय कर्मचारियों की बड़ी संख्या और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी प्रमुख हैं।
केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता
सांसद राजकुमार चाहर ने लोकसभा में केंद्रीय विद्यालय के निर्माण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में हजारों केंद्रीय कर्मचारी निवास करते हैं। इनमें सैनिक, अर्धसैनिक, रेलवे और डाक विभाग जैसे विभिन्न केंद्रीय विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की अत्यधिक आवश्यकता है, जिसे केंद्रीय विद्यालय ही पूरा कर सकता है।
सांसद ने इस बात पर भी जोर दिया कि फतेहपुर सीकरी लोकसभा के गठन के बाद से अब तक इस क्षेत्र में कोई भी केंद्रीय विद्यालय स्थापित नहीं हुआ है। इस अभाव के कारण न केवल केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चे, बल्कि सामान्य ग्रामीण जनता भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित है, जिसका सीधा असर क्षेत्र के समग्र विकास पर पड़ रहा है।
पुरामना में उपलब्ध है आवश्यक भूमि, बेहतरीन कनेक्टिविटी
सांसद चाहर ने सदन को आश्वस्त किया कि तहसील किरावली की ग्राम पंचायत पुरामना में केंद्रीय विद्यालय भवन निर्माण के लिए आवश्यक भूमि पूरी तरह से उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि यह भूमि तुरंत केंद्रीय विद्यालय संगठन को हस्तांतरित की जा सकती है, जिससे परियोजना को बिना किसी देरी के शुरू किया जा सके।
पुरामना गाँव की रणनीतिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए सांसद ने कहा कि यह गाँव किरावली, अछनेरा, फतेहपुर सीकरी, अकोला, बिचपुरी सहित सभी प्रमुख गाँवों, कस्बों और स्टेशनों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यह उत्कृष्ट कनेक्टिविटी विद्यालय तक छात्रों और कर्मचारियों की आसान पहुंच सुनिश्चित करेगी।
सांसद राजकुमार चाहर का दृढ़ विश्वास है कि इस स्थान पर केंद्रीय विद्यालय की स्थापना होने से पूरे क्षेत्र का समुचित शैक्षिक विकास होगा, और यह कदम हजारों परिवारों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अब देखना होगा कि सरकार इस महत्वपूर्ण मांग पर कब तक सकारात्मक निर्णय लेती है।