रेहन कलां में ‘रेनीवैल’ प्रोजेक्ट पर सवाल: जिला पंचायत अध्यक्ष ने मांगी IIT रुड़की की रिपोर्ट, भूजल पर असर की चिंता

May 30, 2025 | 02:05 AM. आगरा।

आगरा जिले के रहन कलां गांव में शुरू होने जा रहे बड़े पैमाने के ‘रेनीवैल’ भूगर्भ जल दोहन प्रोजेक्ट को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने सिंचाई विभाग से आईआईटी रुड़की द्वारा तैयार की गई उस विस्तृत रिपोर्ट की जानकारी मांगी है, जो इस परियोजना का आधार है। उन्होंने कहा कि रुड़की विश्वविद्यालय जल संरचनाओं के अध्ययन में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थान है, इसलिए इतनी बड़ी जलराशि के नियमित दोहन से आगरा के जलभृत तंत्र (Aquifer system) पर पड़ने वाले असर को जानना बेहद ज़रूरी है।

डॉ. मंजू भदौरिया

यमुना नदी के तटीय गांव रहन कलां में दो करोड़ घन लीटर जल दोहन की क्षमता वाले पांच रेनीवैल बनाए जाने हैं, जिनमें से एक को स्टैंडबाई रखा जाएगा, जबकि चार लगातार भूगर्भ जल का दोहन करेंगे। इस पूरी योजना के लिए रुड़की विश्वविद्यालय से अध्ययन करवाया गया है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सिंचाई विभाग और कार्य करने को अधिकृत उप्र जल निगम ने इस बारे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक को जानकारी देना ज़रूरी नहीं समझा।

भूजल स्तर और यमुना के बहाव पर संभावित प्रभाव

डॉ. भदौरिया ने विभाग के संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है कि जिला सिंचाई बंधु अध्यक्ष के रूप में वह यह जानना चाहती हैं कि जनपद के किस विकास खंड में इस विशाल जल दोहन का भूजल स्थिति पर क्या असर पड़ेगा। दरअसल, आगरा जनपद के अधिकांश विकास खंड पहले से ही अतिदोहित श्रेणी में हैं और उनका जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। डॉ. भदौरिया ने संबंधित अधिकारियों से यह भी बताने को कहा है कि रहन कलां में भूजल दोहन के बाद यमुना नदी में आगे के बहाव की क्या स्थिति रहेगी।

सिविल सोसाइटी ने भी उठाई चिंता

यह उल्लेखनीय है कि इस वृहद जल दोहन योजना के बारे में जनप्रतिनिधियों को कोई जानकारी नहीं है, और आम लोगों को जो जानकारी है भी, वह सटीक नहीं है। रुड़की विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट और संस्तुतियां सिंचाई विभाग के लोअर खंड और उप्र जल निगम की स्थानीय इकाई को भेजी जा चुकी हैं।

सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा के सेक्रेटरी अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना और असलम सलीमी ने एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया से उनके कैंप कार्यालय में मुलाकात की। उन्होंने एत्मादपुर तहसील के रहन कलां गांव में ‘जल दोहन योजना’ के संबंध में जानकारी प्राप्त कर यमुना नदी के स्वाभाविक बहाव पर पड़ने वाले प्रभावों को स्पष्ट करवाने का अनुरोध किया।

सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा के प्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि तटीय गांव में बड़े पैमाने पर जल दोहन होने से यमुना नदी के पानी से जलभृत तंत्र का स्वाभाविक रिचार्ज प्रभावित होगा, और गैर-मानसून महीनों में शायद ही डाउनस्ट्रीम में नदी के बहाव की स्थिति रह सकेगी। सोसायटी के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि जनपद से होकर बहने वाली उटंगन और खारी नदियां, जो अंतर-राज्यीय होने के बावजूद अब जल-शून्य स्थिति में हैं (क्योंकि इनका पानी राजस्थान ने अवैध तरीके से रोक रखा है), अब यदि रेनीवैल प्रोजेक्ट प्रभावी हो गया, तो गैर-मानसून सत्र में यमुना नदी भी रहन कलां गांव के बाद एत्मादपुर, फतेहाबाद और बाह तहसील में जल-शून्य स्थिति में पहुंच जाएगी।

प्रोजेक्ट का विवरण और प्रभाव की अनिश्चितता

रेहन कलां गांव, यमुना एक्सप्रेसवे को लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले आगरा विकास प्राधिकरण के लिंक एक्सप्रेसवे पर स्थित है और ताज ट्रेपेजियम जोन का एक महत्वपूर्ण आलू उत्पादक गांव है।

उल्लेखनीय है कि सादाबाद तहसील के ग्राम अकोस के पास यमुना, मथुरा जिले की सीमा से बाहर निकलती है और फिर कुछ दूर तक मथुरा और आगरा जिलों की सीमा बनाती हुई आगरा जनपद में प्रवेश करती है। यह आगरा में 145 किमी बहकर उदी गांव के पास बाह तहसील से इटावा में प्रवेश करती है। आगरा के बाद यमुना नदी में केवल उटंगन नदी ही जल योगदान देती थी, किंतु इसका पानी अब राजस्थान में रोका हुआ है।

यह जल दोहन प्रोजेक्ट यमुना नदी पर प्रशासनिक इकाई के रूप में अधिकृत अधीक्षण अभियंता तृतीय वृत्त, सिंचाई वृत्त कार्य, आगरा के अधीन कार्यरत अधिशासी अभियंता लोअर खंड के तहत आता है। वहीं, निगम की ओर से कार्यदायी अधिकारी अधिशासी अभियंता एहित शामुद्दीन प्रोजेक्ट को कोऑर्डिनेट कर रहे हैं। दोनों ही अधिकारियों के पास रुड़की विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई स्टडी रिपोर्ट पहुंच चुकी है।

सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा के सेक्रेटरी अनिल शर्मा ने जिला पंचायत अध्यक्ष को बताया कि प्रचलित जानकारी के अनुसार, पांचों रेनीवैल भारी डिस्चार्ज क्षमता के होंगे। इनमें से एक स्टैंडबाई रहेगा, जबकि चार लगातार भूगर्भ जल का दोहन करेंगे। प्रत्येक रेनीवैल की गहराई 30 मीटर तक होगी। नदी के एक्वीफर और सीपेज से इन कुओं में पानी पहुंचेगा, और इसे ही रेनीवैल के पंपों से लिफ्ट किया जाएगा। प्रोजेक्ट के प्रत्येक रेनीवैल की क्षमता प्रतिदिन 2 करोड़ लीटर पानी के दोहन की होगी।

हालांकि, रेनीवैल प्रोजेक्ट से औद्योगिक परियोजनाओं को भरपूर पानी मिलेगा, लेकिन यमुना नदी के बहाव की स्थिति, ट्यूबवेल, हैंडपंप, कुएं और गांवों की पाइपलाइन से पानी सप्लाई योजना पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसकी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं है, जो स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

Pawan Singh

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