
आगरा। आगरा में प्रॉपर्टी खरीदने का मन बना रहे लोगों के लिए ये खबर थोड़ी राहत और थोड़ी उलझन लेकर आई है। पहले 4 अगस्त से सर्किल रेट बढ़ने की ख़बरों ने अफरा-तफरी मचा दी थी, लेकिन अब जिला मजिस्ट्रेट (DM) अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने निबंधन विभाग को प्रस्तावित रेटों की फाइल लौटा दी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रस्ताव में कुछ कमियां हैं जिन्हें दूर किया जाए, और नए सर्किल रेट अगस्त के दूसरे सप्ताह में हर हाल में लागू कर दिए जाएंगे।
क्यों टली तारीख? DM ने दिए ये निर्देश
दरअसल, प्रस्तावित सर्किल रेटों पर पहले भी कई क्षेत्रों से आपत्तियां मिली थीं, जिनका अभी तक निस्तारण नहीं हो पाया है। अधिवक्ताओं का कहना था कि फतेहाबाद रोड की तरफ शहर का तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन वहां उस अनुपात में सर्किल रेट नहीं बढ़ाए जा रहे हैं। इसी तरह कई अन्य क्षेत्रों में भी सर्किल रेट में असमानता थी। DM ने इन सभी असमानताओं को दूर करने के लिए कहा है, ताकि नए रेट्स में पारदर्शिता और समानता लाई जा सके।
कितने बढ़ सकते हैं रेट्स? जानिए संभावित बढ़ोत्तरी
सर्किल रेट में बदलाव होने से आगरा में मकान, दुकान और खेत खरीदना महंगा हो जाएगा। अनुमान है कि जिले में 50% तक जमीनों के रेट बढ़ सकते हैं।
- शहर में: 30 से 35% तक।
- सेगमेंट रोड पर (शहर में): 40 से 50% तक।
- ग्रामीण क्षेत्र में (आवासीय-व्यवसायिक): 25 से 30% तक।
- ग्रामीण क्षेत्र में (सेगमेंट रोड पर): 30 से 35% तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है।
पिछली बार अगस्त 2017 में सर्किल रेट में बदलाव हुआ था, तब शहरी क्षेत्र में 27% और ग्रामीण क्षेत्र में 20 से 25% की बढ़ोत्तरी हुई थी। 2021 में नए सिरे से निर्धारण होना था, लेकिन शासन के निर्देश पर इसे रोक दिया गया था।
प्रमुख क्षेत्रों में इतनी बढ़ सकती है कीमत:
- संजय प्लेस, सदर बाजार, एमजी रोड, फतेहाबाद रोड (कॉमर्शियल क्षेत्र): 40 से 50% तक।
- शहर के अन्य क्षेत्र: 30 से 40% तक।
- ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख इलाके: 25 से 30% तक।
- आवास विकास क्षेत्र: यहां भी सर्किल रेट बढ़ने की संभावना है।
DM अरविंद मल्लप्पा बंगारी का कहना है: “निबंधन विभाग को सर्किल रेट की कुछ कमियों को दूर करने के लिए कहा गया है। अगस्त के दूसरे सप्ताह में नये सर्किल रेट हर कीमत पर लागू कर दिए जाएंगे।”
तो अब देखना यह होगा कि ये ‘कमियां’ कब तक दूर होती हैं और आगरा में प्रॉपर्टी खरीदने का सपना देखने वालों की जेब पर कितना बोझ बढ़ता है।