उत्तर प्रदेश का पहला टेस्ट ट्यूब बेबी 27 वर्ष का हुआ, आगरा के मल्होत्रा अस्पताल में मनाया गया जश्न

रेनबो आईवीएफ ने साझा की ऐतिहासिक उपलब्धि की खुशियाँ, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की सफलता का प्रतीक बना उत्सव

आगरा, शुक्रवार, 1 अगस्त 2025, रात्रि 7:15 बजे

आगरा: उत्तर प्रदेश के चिकित्सा इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाले पहले निजी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में जन्मे उत्सव ने आज अपने जीवन के 27 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस विशेष अवसर को यादगार बनाने के लिए, मल्होत्रा टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर और रेनबो अस्पताल के परिसर में उनका जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों ने उत्सव को केक काटकर और गुलदस्ते भेंट कर बधाई दी और इस ऐतिहासिक क्षण की खुशियाँ साझा कीं।

यह आयोजन सिर्फ एक जन्मदिन का जश्न नहीं था, बल्कि यह आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की एक बड़ी सफलता और आशा का प्रतीक था, जिसने हज़ारों परिवारों के जीवन में उजाला किया है।

चिकित्सा विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

रेनबो आईवीएफ की एमडी और जानी-मानी बांझपन विशेषज्ञ डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने इस अवसर पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, “उत्सव का जन्म हमारे लिए एक ऐतिहासिक पल था, जिसे हम कभी नहीं भूल सकते। आज जब वह 27 वर्ष का हो चुका है, तो यह हमारे लिए और भी अधिक गर्व का विषय है। यह आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की एक बड़ी सफलता को दर्शाता है और हमें आगे भी इसी तरह के काम करते रहने के लिए प्रेरित करता है।”

उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल के एमडी और प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने इस तकनीक के सामाजिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “इस तकनीक ने न केवल उत्सव के परिवार को खुशियाँ दीं, बल्कि इसने उन हज़ारों दंपतियों के लिए भी संतान सुख का मार्ग प्रशस्त किया, जो किसी कारणवश प्राकृतिक रूप से माता-पिता नहीं बन पा रहे थे। उत्सव की यह कहानी उन सभी के लिए एक प्रेरणा है।”

आईवीएफ और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निहारिका मल्होत्रा ने कहा, “उत्सव की यह यात्रा हम सभी के लिए गर्व का विषय है। यह न केवल हमारे अस्पताल के लिए, बल्कि पूरे चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।”

रेनबो आईवीएफ के निदेशक और जाने-माने एंब्रोलॉजिस्ट डॉ. केशव मल्होत्रा ने आईवीएफ तकनीक की बढ़ती सफलता के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि अब तक रेनबो आईवीएफ के माध्यम से 20,000 से अधिक परिवारों को संतान सुख मिल चुका है। उन्होंने आगरा की लैब को देश की सबसे आधुनिक लैब में से एक बताते हुए कहा कि यहाँ की उन्नत तकनीक और विशेषज्ञता ने सफलता दर को काफी बढ़ाया है।

आईवीएफ तकनीक: एक वरदान

उत्सव का जन्म 27 साल पहले आईवीएफ (In Vitro Fertilization) तकनीक के माध्यम से हुआ था। यह तकनीक उन दंपतियों के लिए एक वरदान साबित हुई है, जिन्हें बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ता है। आईवीएफ तकनीक के तहत, अंडे और शुक्राणु को शरीर के बाहर एक लैब में मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है, और फिर उस भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। उत्सव का 27 वर्ष का होना इस तकनीक की दीर्घकालिक सुरक्षा और सफलता का एक ठोस प्रमाण है।

यह जश्न न केवल उत्सव के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि यह उन सभी परिवारों के लिए एक आशा की किरण भी है, जो संतान सुख की कामना कर रहे हैं। मल्होत्रा अस्पताल और रेनबो आईवीएफ की यह उपलब्धि आगरा और उत्तर प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र में एक गौरवशाली अध्याय जोड़ती है।

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