
आगरा। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC) में इलाज कराने पहुंचे मरीजों के लिए एक चौंकाने वाली खबर है। अगर आज आप डॉक्टर का पर्चा लेकर एमआरआई (MRI) जांच कराने पहुंचेंगे, तो आपको सीधे तीन महीने बाद यानी अक्टूबर की डेट मिलेगी! जी हां, एक पत्रकार ने जब खुद मरीज बनकर पता किया तो यही जवाब मिला। जिन मरीजों ने शुक्रवार को पर्चा बनवाया है, उन्हें सितंबर या अक्टूबर की तारीखें दी जा रही हैं, जिससे मरीज बुरी तरह परेशान हैं।
‘जैक’ का खेल: आम आदमी 3 महीने में, खास आदमी 7 दिन में
यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि अगर आप ‘जैक’ (पैरवी या जुगाड़) लगाओगे, तो यही एमआरआई जांच मात्र 7 दिनों में भी हो सकती है। एक मरीज ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, “पिता के लिए शुक्रवार को पर्चा बनवाया है, 9 सितंबर की डेट मिली। पत्नी के एमआरआई के लिए भी सितंबर की डेट मिली थी, लेकिन फिर एक ‘जैक’ लगाई तो एक हफ्ते में ही नंबर आ गया।” मरीज ने तो यहाँ तक सलाह दी कि “आप भी जैक ढूंढ लो, जल्दी काम हो जाएगा।”
लंबी लाइनें और एकमात्र मशीन: 15 MRI पर 100 मरीज
एसएन मेडिकल कॉलेज में एमआरआई की केवल एक ही मशीन है। इस एक मशीन पर प्रतिदिन लगभग 15 एमआरआई हो रहे हैं, जबकि मरीजों की संख्या प्रतिदिन 100 तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि मरीजों को पहले पर्चा बनवाने के लिए डेढ़ से दो घंटे लाइन में लगना पड़ता है, फिर डॉक्टर से जांच लिखवानी होती है, और उसके बाद रेडियोडायग्नोस्टिक सेंटर के कमरा नंबर 9 में लंबी लाइन में लगकर एमआरआई की तारीख लेनी पड़ती है।
SNMC में एमआरआई की फीस 3 से 4 हजार रुपये के बीच है, जबकि प्राइवेट में यह खर्चा 8-9 हजार रुपये आता है, जिसके कारण लोग सरकारी अस्पताल की ओर रुख करते हैं।
प्रिंसिपल बोले: “अगले साल तक मिल सकती है दूसरी मशीन”
प्रिंसिपल डॉ. प्रशांत गुप्ता का कहना है कि इमरजेंसी या भर्ती मरीजों के एमआरआई समय पर हो रहे हैं, लेकिन ओपीडी वाले मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि शासन को एक और मशीन का प्रस्ताव भेजा गया है और उम्मीद है कि अगले साल तक एक और मशीन मिल जाएगी।
यह व्यवस्था उन आम मरीजों के लिए किसी आफत से कम नहीं है, जिन्हें तत्काल जांच की जरूरत होती है। क्या ‘उत्तम प्रदेश’ के स्वास्थ्य इंतजामों में ‘जैक’ ही अब एकमात्र रास्ता रह गया है?