
आगरा। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने आगरा में चल रहे मेट्रो प्रोजेक्ट में एक बार फिर बदलाव किया है। इस बार यह तय किया गया है कि फतेहाबाद रोड पर बने मेट्रो स्टेशनों की तुलना में हाईवे पर बनने वाले स्टेशनों का कॉनकोर्स एरिया (Concourse area) कम किया जाएगा। इसका मतलब है कि जहाँ यात्री टिकट लेंगे, उस कवर्ड एरिया को अब छोटा किया जाएगा।
क्या है कॉनकोर्स एरिया?
कॉनकोर्स एरिया एक ऐसा बड़ा हॉल या क्षेत्र होता है जहाँ लोग आमतौर पर इकट्ठा होते हैं। यह हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों या कन्वेंशन सेंटरों पर देखा जा सकता है। यह यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह जाने का रास्ता देता है और यहाँ अक्सर बोर्डिंग गेट और अन्य सुविधाएँ भी होती हैं।

बदलाव क्यों और कैसे?
मेट्रो के पहले कॉरिडोर पर हाईवे पर खंदारी, आईएसबीटी, गुरुद्वारा गुरु का ताल और सिकंदरा जैसे एलिवेटेड स्टेशन बनने हैं। इससे पहले इसी कॉरिडोर पर ताज ईस्ट गेट, बसई, और फतेहाबाद रोड मेट्रो स्टेशन बन चुके हैं, जिनका संचालन UPMRC कर रहा है। इन मौजूदा स्टेशनों के कॉनकोर्स एरिया का उपयोग उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पा रहा है।
इसी को देखते हुए, यह तय किया गया है कि हाईवे पर बनने वाले एलिवेटेड स्टेशनों का कॉनकोर्स एरिया कम किया जाएगा। इस बचे हुए अधिकांश एरिया में अब कमरे बनाए जाएंगे, जहाँ मेट्रो संचालन से संबंधित स्टाफ बैठेगा या फिर ऑपरेटिंग सिस्टम लगाए जाएंगे।
यात्री अब टिकट लेकर सीधे प्लेटफॉर्म पर जाएंगे। वे सीढ़ियों से चढ़कर कॉनकोर्स एरिया में पहुँचेंगे, वहाँ टिकट लेंगे, अपनी चेकिंग करवाएंगे और सीधे प्लेटफॉर्म पर पहुँचकर मेट्रो का इंतज़ार करेंगे। कॉनकोर्स एरिया में उनके बैठने की कोई व्यवस्था नहीं होगी।
दो कॉरिडोर पर तेज़ी से चल रहा काम
UPMRC आगरा में दो मेट्रो कॉरिडोर तैयार कर रहा है। पहला कॉरिडोर सिकंदरा से ताज ईस्ट गेट तक है, और दूसरा कालिंदी विहार से आगरा कैंट स्टेशन तक बन रहा है।
पहले कॉरिडोर पर फिलहाल ताज ईस्ट गेट से मनःकामेश्वर मंदिर स्टेशन तक मेट्रो का संचालन हो रहा है। इससे आगे इसी कॉरिडोर पर मेडिकल कॉलेज, आगरा कॉलेज, राजामंडी और आरबीएस कॉलेज जैसे अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों का काम लगभग पूरा हो चुका है। यहाँ सिविल वर्क चल रहा है और अक्टूबर तक मेट्रो चलने की संभावना है।