
आगरा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) दिल्ली ने आगरा में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) आगरा के प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार पांडे को जिले का नया सीबीएसई जिला समन्वयक (District Coordinator) नियुक्त किया गया है। उन्होंने इस पद पर सुमीत राहुल गोयनका मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य रामानंद चौहान का स्थान लिया है। यह नियुक्ति आगरा के सीबीएसई स्कूलों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव है।
कौन हैं रविंद्र कुमार पांडे?
रविंद्र कुमार पांडे दिल्ली पब्लिक स्कूल, आगरा के प्रधानाचार्य हैं। डीपीएस आगरा अप्रैल 2002 में स्थापित हुआ था और यह दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी के तत्वावधान में चलता है। रविंद्र कुमार पांडे के पास शिक्षा और प्रशासन में लंबा अनुभव है। उनके नेतृत्व में डीपीएस आगरा ने सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है।
इससे पहले जिला समन्वयक रहे रामानंद चौहान सुमीत राहुल गोयनका मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य हैं, जो 1991 में स्थापित एक प्रतिष्ठित संस्थान है।
जिला समन्वयक का क्या है महत्व और कार्य?
सीबीएसई जिला समन्वयक (District Coordinator) एक महत्वपूर्ण पद होता है जो जिले में सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के बीच समन्वय स्थापित करता है और बोर्ड की विभिन्न गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने में मदद करता है। इसके प्रमुख कार्य और महत्व निम्नलिखित हैं:
- परीक्षाओं का सफल संचालन: जिला समन्वयक का एक मुख्य कार्य जिले में सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं (कक्षा 10वीं और 12वीं) का सफल और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करना होता है। इसमें परीक्षा केंद्रों का प्रबंधन, प्रश्न पत्रों का वितरण, उत्तर पुस्तिकाओं का संग्रह और मूल्यांकन प्रक्रिया में सहयोग शामिल है।
- बोर्ड और स्कूलों के बीच कड़ी: यह पद सीबीएसई बोर्ड और जिले के स्कूलों के बीच एक सेतु का काम करता है। बोर्ड के नए निर्देशों, नीतियों और सर्कुलरों को स्कूलों तक पहुँचाना और स्कूलों की समस्याओं या सुझावों को बोर्ड तक पहुँचाना इनकी जिम्मेदारी होती है।
- प्रशिक्षण और कार्यशालाएं: शिक्षकों और स्कूल प्रशासन के लिए सीबीएसई द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और सेमिनारों का समन्वय करना।
- शिकायत निवारण: स्कूलों, छात्रों या अभिभावकों से संबंधित सीबीएसई नियमों या प्रक्रियाओं से जुड़ी शिकायतों का समाधान करना या उन्हें उचित स्तर तक पहुँचाना।
- अकादमिक गुणवत्ता: जिले के सीबीएसई स्कूलों में अकादमिक गुणवत्ता और मानकों को बनाए रखने में सहयोग करना।
- डाटा संग्रह और रिपोर्टिंग: बोर्ड द्वारा मांगे गए विभिन्न प्रकार के डेटा को स्कूलों से एकत्र करना और उसे निर्धारित समय सीमा में बोर्ड को भेजना।