
किरावली, आगरा। तहसील किरावली के रायभा गांव में अंग्रेजों के जमाने से स्थापित रेलवे स्टेशन को बंद करने की चर्चाओं ने पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इस रेलवे स्टेशन पर करीब सात लोकल पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव है, जिससे आसपास के बीस गांवों के हजारों मजदूर रोज आगरा, मथुरा और भरतपुर जाकर अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। स्टेशन बंद होने की खबर से इन सभी मजदूरों और नियमित यात्रियों की आजीविका पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
हजारों यात्रियों और मजदूरों की जीवनरेखा है रायभा स्टेशन
रायभा रेलवे स्टेशन से रोजाना हजारों की संख्या में मंथली सीजन टिकट (MST) जारी होते हैं, जिनका उपयोग बड़ी संख्या में नियमित यात्री करते हैं। यह स्टेशन इन मजदूरों और यात्रियों के लिए एक जीवनरेखा के समान है, जो उन्हें काम के लिए बड़े शहरों तक पहुंचने में मदद करता है। अगर यह स्टेशन बंद होता है, तो इन हजारों परिवारों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर प्रभावित होगी।
किसान सेना प्रमुख मुकेश डागुर ने मोर्चा संभाला, लोगों में गहरा आक्रोश
इस गंभीर मुद्दे को लेकर किसान सेना प्रमुख मुकेश डागुर ने रायभा रेलवे स्टेशन का दौरा किया। उन्होंने वहां नियमित यात्रियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। स्टेशन सुपरिंटेंडेंट रामवीर सिंह ने भी पुष्टि की कि स्टेशन को बंद करने की चर्चाएं चल रही हैं।
इसके बाद मुकेश डागुर ने रायभा, सहता, नगला लालदास, कूकथला, कठवारी, जनौथ, मगुर्रा सहित करीब दस गांवों का दौरा किया। हर जगह लोगों में इस मुद्दे को लेकर गहरा आक्रोश और चिंता देखी गई।
11 अगस्त को रेलवे DRM और रोडवेज GM का घेराव
मुकेश डागुर ने इस अन्याय के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वे स्टेशन को किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने देंगे। इसी कड़ी में, सोमवार, 11 अगस्त को किसान सेना बड़ी संख्या में किसानों के साथ मिलकर रेलवे के DRM (मंडलीय रेल प्रबंधक) का घेराव करेगी।
इसके साथ ही, मुकेश डागुर ने रोडवेज द्वारा हाल ही में जेंगारा-बाजना के लिए शुरू की गई बस सेवा को एक सप्ताह बाद ही बंद कर दिए जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि इस बस सेवा को दोबारा शुरू कराने के लिए भी उसी दिन रोडवेज के GM (महाप्रबंधक) का घेराव किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर डॉ. सूरज सिंह सिकरवार, मुकेश सिकरवार, प्रधान जगवीर सिंह, बन्नो प्रधान, सत्यवीर शर्मा, जीतू जादौन, चौधरी मोहित प्रधान, शेलू चौधरी, धीनू जादौन, बंटी जादौन, खेमसिंह कुशवाह, बंटी सिकरवार आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। यह आंदोलन दर्शाता है कि स्थानीय लोग अपनी आजीविका और सुविधाओं के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।