आगरा में यमुना खतरे के निशान से 3 फीट ऊपर, 40 गांवों में बाढ़ का खतरा; हाई अलर्ट

आगरा। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण आगरा में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार शाम को नदी का जलस्तर खतरे के निशान (495 फीट) से लगभग 3 फीट ऊपर यानी 497 फीट तक पहुंच गया। इसके बाद पूरे जिले में बाढ़ को लेकर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। यमुना का पानी अब किनारे तोड़कर शहर के निचले इलाकों में घुसने लगा है। पोइया और मनोहरपुर में पानी सड़क तक आ गया है। दयालबाग और बल्केश्वर के डूब क्षेत्र में भी पानी भरने लगा है। शहरी और ग्रामीण इलाकों के करीब 500 परिवारों पर विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है और अब तक 50 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। ताजमहल की बाउंड्री तक पहुंचा पानी, घाट डूबे यमुना के रौद्र रूप के कारण शहर के कई प्रमुख घाट और ऐतिहासिक स्थल जलमग्न हो गए हैं: प्रशासन की अपील और तैयारी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नदी में जाने और नाव चलाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। सभी घाटों पर लोगों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने जरूरी सामान और दस्तावेजों को सुरक्षित रखें और बाढ़ शरणालयों में शरण लें। किसी भी आपात स्थिति के लिए जिला स्तर पर 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम के नंबर 0562-2260550 और 09458095419 जारी किए गए हैं।

आगरा में यमुना खतरे के निशान से ऊपर, ताज की बाउंड्री तक पहुंचा पानी; 8 चितास्थल डूबे

आगरा। आगरा में यमुना नदी एक बार फिर उफान पर है। गोकुल बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से दो फीट ऊपर आ गया है। नदी का पानी ताजमहल की बाउंड्री तक पहुंच गया है, वहीं कैलाश घाट, बल्केश्वर घाट और ताजगंज शमशान घाट के आठ चितास्थल भी डूब गए हैं। गोकुल बैराज से लगातार छोड़ा जा रहा है पानी गोकुल बैराज से मंगलवार को एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया, जबकि सोमवार को भी 99 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसके कारण आगरा में यमुना का जलस्तर बढ़कर 497 फीट पर पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान 495 फीट पर है। पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश के कारण हथिनीकुंड बैराज से भी पानी की मात्रा बढ़ गई है। सुबह नौ बजे 3.22 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिसके 5 सितंबर तक आगरा पहुंचने की संभावना है। इससे यमुना का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। खेतों में फंसे 25 किसान, 5 परिवार हुए शिफ्ट यमुना के रौद्र रूप के कारण तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। बल्केश्वर स्थित पार्वती घाट और ताजगंज मोक्षधाम के चितास्थल पानी में डूब गए हैं। तनौरा-नूरपुर और मेहरा नाहरगंज के लगभग 25 किसान तीन घंटे तक अपने खेतों में फंसे रहे, जिन्हें बाद में स्टीमर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। सदर तहसील के डौकी क्षेत्र में यमुना किनारे रहने वाले पांच परिवारों को अपने घरों तक पानी पहुंचने के कारण सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होना पड़ा है। वे फिलहाल अपने रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं। इन गांवों पर बाढ़ का खतरा प्रशासन ने यमुना के किनारे स्थित कई गांवों को बाढ़ के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी दी है। तहसील सदर में तनौरा, नूरपुर, कैलाश, नगला बूढ़ी सहित कई गांव प्रभावित हो सकते हैं, जबकि तहसील फतेहाबाद में भरापुर, बमरौली, भडायना जैसे गांव खतरे में हैं। प्रशासन की अपील और तैयारी एडीएम (एफआर) शुभांगी शुक्ला ने नागरिकों से अपील की है कि वे जरूरी कागजात को वॉटरप्रूफ बैग में रखें, सूखे अनाज और मवेशियों के चारे को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें। उन्होंने गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों से बाढ़ के शरणांलयों में जाने की अपील की है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला स्तर पर 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जिसका मोबाइल नंबर 0562-2260550 और 09458095419 है। इसके अलावा, तनौरा-नूरपुर में बाढ़ चौकी भी स्थापित की गई है।

आगरा में यमुना खतरे के निशान के करीब, निचले इलाकों में घुसा पानी; 35 गांवों पर मंडराया संकट

आगरा। आगरा में यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और अब यह खतरे के निशान के करीब पहुँच गया है। मथुरा के गोकुल बैराज से दो दिनों में 39600 लाख लीटर पानी छोड़े जाने के बाद आगरा में यमुना का जलस्तर 493.5 फीट तक पहुँच गया है, जो कि खतरे के निशान (495 फीट) से सिर्फ 1.5 फीट नीचे है। यमुना के उफान पर होने से प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है, और नदी के निचले इलाकों में पानी घुसना शुरू हो गया है। फतेहाबाद और बाह क्षेत्र के खेतों तक पहुंचा पानी यमुना नदी में लगातार पानी छोड़े जाने के कारण वह अपने पूरे उफान पर है। शनिवार और रविवार को गोकुल बैराज से लगभग 1.5 लाख क्यूसेक (लगभग 424.75 करोड़ लीटर) पानी छोड़ा गया है। इसके चलते आगरा के फतेहाबाद और बाह क्षेत्र में नदी किनारे के खेतों तक पानी पहुँचने लगा है, जिससे बाजरे और तिल की फसलों पर संकट मंडरा रहा है। बटेश्वर के घाट पर स्थित महिला स्नानागार पूरी तरह डूब गया है। घाट पर बढ़े हुए जलस्तर को देखते हुए तीर्थ स्थल ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि लोग सीढ़ियों से उतरकर यमुना स्नान न करें। तराई के 35 गांवों में बढ़ी धड़कनें यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से बाह क्षेत्र के लगभग 35 गांवों के लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। तराई के गाँव जैसे रामपुर चंद्रसेनी, बलाई, सुंसार, बिठौली, विक्रमपुर घाट, चरीथा, गढ़ी बरौली, और बाग गुड़ियाना में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इन्हीं गांवों के नदी से जुड़ने वाले रास्तों पर सबसे पहले पानी भरता है। ग्रामीणों की निगाहें लगातार नदी के जलस्तर पर टिकी हुई हैं। पहले चंबल ने दिखाया था रौद्र रूप यमुना से पहले, चंबल नदी भी अपना रौद्र रूप दिखा चुकी थी। चंबल नदी में आई बाढ़ की वजह से आगरा के बाह और पिनाहट के कई गांवों में पानी घुस गया था, जिससे लगभग 6-7 दिनों तक लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। कई लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था। हालांकि, अब चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा ने बताया कि यमुना के जलस्तर पर लगातार कड़ी नजर रखी जा रही है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी तैयारियां पूरी हैं और किसी को भी किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।

आगरा मेट्रो लाएगी ‘जाम’ से राहत! गुरु का ताल पर पिलर, तो कामायनी कट खुलने से हजारों को फायदा

आगरा। आगरा मेट्रो का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन ‘गुरु का ताल कट’ पर पिलर निर्माण से वाहनों का दबाव बढ़ने की आशंका है। इसी समस्या से निपटने के लिए यूपी मेट्रो रेल कारपोरेशन (UPMRC) ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से कामायनी कट को फिर से खोलने की मांग की है। अगर यह कट खुल जाता है, तो सिकंदरा तिराहा पर लगने वाले जाम से हजारों स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है! हालांकि, यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण पिलर की खुदाई का काम फिलहाल रोकना पड़ा है। गुरु का ताल पर ‘बदलाव’, अब कामायनी कट पर नज़र नेशनल हाईवे-19 स्थित गुरु का ताल कट के आधे हिस्से में मेट्रो पिलर बनने जा रहा है। इसे देखते हुए इस कट को पूरी तरह बंद करने की तैयारी है, जो इसी सप्ताह शुरू होगा। वाहनों का दबाव कम करने के लिए UPMRC ने NHAI मथुरा खंड से कामायनी कट को खोलने की अनुमति मांगी है। यह कट खुलने से भावना एस्टेट सहित आसपास के हजारों लोगों को फायदा होगा। अभी ये लोग सिकंदरा तिराहा या फिर गुरु का ताल कट से गलत साइड से गुजरते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। बता दें कि कामायनी कट अक्टूबर 2020 में बंद किया गया था, जिसके बाद से गुरु का ताल तिराहा पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया है और अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। मेट्रो का काम जारी: रात में ट्रैफिक डायवर्ट खंदारी चौराहा से सिकंदरा तिराहा तक तीन किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ट्रैक बन रहा है। ISBT तक ट्रैक बन चुका है। अब ISBT से गुरु का ताल कट होते हुए सिकंदरा तिराहा तक काम चल रहा है। गुरु का ताल कट के आधे हिस्से पर स्टेशन का पिलर बनेगा। UPMRC ने पुराने कट से 80 मीटर की दूरी पर एक नया कट बनाया है, जो डीवीवीएनएल कार्यालय की तरफ है। यह नया कट इसी सप्ताह चालू हो जाएगा और पुराना कट एक साल के लिए पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। UPMRC के अधिकारियों ने बताया कि कामायनी कट पर तीन महीने में काम पूरा हो जाएगा। NHAI से इसे खोलने की अनुमति मांगी गई है। यदि अनुमति मिलती है, तो एक पिलर से दूसरे पिलर के बीच डिवाइडर नहीं बनेगा, जिससे यातायात सुगम रहेगा। मेट्रो पिलर बनाने का काम तेजी से चल रहा है, जिसके लिए रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक ट्रैफिक को डायवर्ट या बंद करने की अनुमति ली गई है। इस दौरान 16 रिग मशीनों से खुदाई और पिलर पर स्पान व गर्डर चढ़ाने का काम होगा। यमुना का जलस्तर बढ़ा, पिलर का काम रुका यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण UPMRC ने नदी पर पिलर की खुदाई का काम फिलहाल रोक दिया है। जलस्तर सामान्य होने के बाद ही यह कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा।

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