Agra News: गिग वर्कर्स और हॉकर्स ने CM को भेजा ज्ञापन; सुरक्षा की मांग

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Agra News नगर निगम से परेशान छोटे व्यापारियों और गिग वर्कर्स ने एकजुट होकर एडीएम सिटी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। Amazon इंडिया वर्कर्स यूनियन, हॉकर्स जॉइंट एक्शन कमेटी और गिग वर्कर्स एसोसिएशन ने यूपी के 70 लाख से अधिक कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और लेबर अधिकारों की मांग की। Agra News नगर निगम के कथित उत्पीड़न से परेशान छोटे व्यापारियों और प्लेटफार्म वर्कर्स ने अब अपने हकों की लड़ाई तेज कर दी है। गुरुवार को एक समाजसेवी की मदद से गिग वर्कर्स एसोसिएशन (GigWA) और हॉकर्स जॉइंट एक्शन कमेटी (HJAC) ने एकजुट होकर एडीएम सिटी को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रमुख संगठन आए साथ इस मुहिम में तीन बड़े संगठनों ने हाथ मिलाया है: यह संगठन फूड, ग्रॉसरी, राइड शेयरिंग, घरेलू और पर्सनल केयर क्षेत्रों में काम करने वाले प्लेटफार्म वर्कर्स और पारंपरिक स्ट्रीट वेंडर्स का प्रतिनिधित्व करते हैं। क्या हैं मुख्य मांगें? ज्ञापन में उत्तर प्रदेश के हजारों प्लेटफार्म वर्कर्स को प्रभावित करने वाले लेबर अधिकारों और काम करने की स्थितियों के सिस्टेमैटिक उल्लंघन की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है। लाखों कामगारों का प्रतिनिधित्व ज्ञापन में बताया गया है कि ये यूनियन और फेडरेशन उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में फैले विशाल वर्कफोर्स का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनमें शामिल हैं: संगठनों ने मुख्यमंत्री से इन 70 लाख से अधिक कामगारों के हितों की रक्षा के लिए तुरंत और ऐतिहासिक दखल देने की अपील की है।

आगरा में ‘पेंशन’ का इंतज़ार: विधवा महिलाओं ने 10,000 दिए दलालों को, सालों से नहीं मिली पेंशन; CDO ऑफिस से बस एक जवाब – “आ जाएगी!”

आगरा। सरकार भले ही हर जरूरतमंद तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पहुंचाने का दावा करती हो, लेकिन आगरा में जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। संजय प्लेस स्थित CDO (मुख्य विकास अधिकारी) कार्यालय पर पिछले कई महीनों से विधवा, वृद्धा और दिव्यांग महिलाएं अपनी पेंशन न मिलने की शिकायतें लेकर चक्कर काट रही हैं। उनकी आपबीती सुनकर सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आती है, क्योंकि हर बार उन्हें सिर्फ एक ही जवाब मिलता है – “पेंशन आ जाएगी।” दो साल में सिर्फ एक बार मिली पेंशन, 10,000 रुपये भी डूबे बोदला निवासी सुमन देवी की कहानी तो और भी दर्दनाक है। वह विधवा हैं और बताती हैं कि पिछले दो साल में उन्हें सिर्फ एक बार ही पेंशन मिली है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में दो बार पेंशन भेजी जा चुकी है। सुमन पिछले 5 महीने से CDO कार्यालय के चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया जाता है। सुमन ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि जानकारी की कमी के चलते उन्होंने मोहल्ले के एक व्यक्ति को पेंशन बनवाने के लिए 10,000 रुपये दिए थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बाद में किसी और को 300 रुपये दिए, फिर भी कोई हल नहीं निकला। दलाल पैसे लेकर गायब हो जाते हैं और जरूरतमंद महिलाएं ठगी का शिकार होती हैं। एक साल से वृद्धा पेंशन का इंतजार, भटक रही हैं बुजुर्ग महिलाएं एक और वृद्धा, जयप्यारी देवी, ने बताया कि उन्हें पिछले एक साल से विधवा पेंशन नहीं मिली है। वह अकेले ही कई बार CDO कार्यालय के चक्कर लगा चुकी हैं, कई बार तो रास्ता भी भूल जाती हैं, लेकिन पेंशन की आस में उन्हें मजबूरी में आना पड़ता है। उन्हें भी हर बार यही कहकर भेज दिया जाता है कि “आ जाएगी आप जाओ।” एक महिला ने तो यहां तक बताया कि कार्यालय कर्मचारियों के अनुसार, उनकी पिछले 3 सालों से पेंशन किसी और बैंक खाते में ट्रांसफर हो रही है, जिसका उन्हें कोई अता-पता नहीं। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे पात्र लाभार्थियों को भी उनके हक का पैसा नहीं मिल रहा है, और अधिकारी टाल-मटोल कर रहे हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी बोले: “आधार लिंक न होना और जानकारी का अभाव कारण” इस मामले पर आगरा के जिला प्रोबेशन अधिकारी अतुल कुमार सोनी का कहना है कि विधवा पेंशन का लाभ अब तक 70,000 महिलाएं ले चुकी हैं। महिलाओं की शिकायतों पर उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं का अकाउंट आधार से लिंक नहीं है या KYC जैसी औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई हैं, उन्हीं के खाते में पेंशन नहीं गई है। उन्होंने महिलाओं में जानकारी के अभाव को भी इसका एक कारण बताया। पेंशन योजना के नियम: सरकार की विधवा पेंशन योजना के तहत 18 वर्ष से ऊपर की विधवाओं को ₹900 से ₹1,800 प्रति माह तक की राशि मिलती है। इसके लिए आधार से जुड़ा बैंक खाता, मृत्यु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। यूपी सरकार केंद्र की योजना के साथ मिलकर ₹1,000 मासिक तक की पेंशन देती है। हालांकि, जमीन पर हकीकत यह है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव और बिचौलियों के जाल में फंसकर जरूरतमंद महिलाएं अपने हक से वंचित हो रही हैं, और उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

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