आगरा के दवा बाजार में हड़कंप, जांच एजेंसियों के रडार पर 60% दुकानदार

आगरा। फव्वारा स्थित आगरा का दवा बाजार, जो पूरे ब्रज क्षेत्र में दवाओं की आपूर्ति का एक बड़ा केंद्र है, अब शासन-प्रशासन की कड़ी निगरानी में आ गया है। हाल ही में ड्रग विभाग और एसटीएफ की छापेमारी के दौरान करीब 60 प्रतिशत दुकानदारों का दुकानें बंद करके गायब हो जाना यह साफ दर्शाता है कि यहां नकली और प्रतिबंधित दवाओं का कारोबार बड़े पैमाने पर हो सकता है। अब ऐसे सभी दुकानदारों की गहन जांच का ऐलान कर दिया गया है। छापेमारी से फैली घबराहट अगस्त के अंतिम सप्ताह में जब ड्रग विभाग और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने फव्वारा दवा बाजार में छापा मारा, तो बाजार में हड़कंप मच गया। छापे की खबर मिलते ही लगभग 60 प्रतिशत दुकानदारों ने आनन-फानन में अपने शटर गिरा दिए और तीन से चार दिनों तक अपनी दुकानें नहीं खोलीं। जबकि कुछ व्यापारी बेखौफ होकर अपना कारोबार करते रहे। दुकानें बंद करने वाले ये सभी कारोबारी अब जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गए हैं। औषधि विभाग की विशेष सचिव रेखा एस. चौहान ने भी अपने आगरा दौरे पर यह साफ कर दिया कि जिन दुकानदारों ने छापेमारी के डर से दुकानें बंद की थीं, उन सभी की जांच होगी। उन्होंने कहा कि अगर कारोबार नियमों के तहत हो रहा था, तो डरने की कोई वजह नहीं थी। चार आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल इस मामले में अब तक हे मां मेडिको और बंसल मेडिकल स्टोर के संचालक समेत चार आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। यह घटना यह संकेत देती है कि नकली दवाओं का जाल सिर्फ कुछ दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पूरे बाजार में फैले हो सकते हैं। सूत्रों का मानना है कि छापेमारी के बाद कई कारोबारियों ने अपने गोदामों से नकली और अवैध दवाओं को हटाने की कोशिश की है। ताजगंज के नगला पैमा में दवाओं को जलाए जाने की हालिया घटना को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। शासन की गंभीरता को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

आगरा पहुंचते ही राज्यपाल के कुलपति ने छुए पैर: वीडियो वायरल होने से विवाद, कार्यकाल विस्तार की अटकलें तेज!

आगरा। आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी द्वारा राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के पैर छूने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना ने शहर में एक नई बहस छेड़ दी है और कुलपति के इस कृत्य पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। राज्यपाल दो दिवसीय दौरे पर आगरा में हैं, जहां वह कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। गेस्ट हाउस पहुंचते ही कुलपति ने छुए पैर, फिर पुलिस कमिश्नर ने किया सैल्यूट राज्यपाल आनंदी बेन पटेल बुधवार दोपहर को यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस पहुंचीं। वह शहर में कई कार्यक्रमों में भाग लेंगी, जिनमें ब्रिटिश समय की क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी का उद्घाटन और नेशनल चैंबर का कार्यक्रम शामिल है। यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में राज्यपाल के स्वागत के लिए अधिकारियों के साथ कुलपति प्रो. आशु रानी भी मौजूद थीं। जैसे ही राज्यपाल अपनी गाड़ी से उतरीं, कुलपति ने उन्हें बुके भेंट किया और फिर उनके पैर छुए। इस दृश्य के तुरंत बाद, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने उन्हें सैल्यूट किया, और कुलसचिव अजय मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों ने भी उन्हें बुके दिए। इस दौरान उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी वहां उपस्थित थे। कार्यकाल विस्तार की अटकलें और जांच का सामना कुलपति प्रो. आशु रानी के पैर छूने का वीडियो सामने आते ही यह घटना चर्चा का विषय बन गई है। सूत्रों का कहना है कि कुलपति का कार्यकाल सितंबर में समाप्त हो रहा है और वह अपना कार्यकाल विस्तार करवाना चाहती हैं। इस पृष्ठभूमि में उनके इस कृत्य को कार्यकाल विस्तार के प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, कुलपति प्रो. आशु रानी के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। उनके खिलाफ कोर्ट में मुकदमे दर्ज हुए हैं, लोकपाल में शिकायतें पहुंची हैं और जांच भी शुरू हो गई है। यही नहीं, उनके खिलाफ विजिलेंस जांच भी चल रही है। ऐसे में, इस वायरल वीडियो ने उनकी स्थिति को और भी पेचीदा बना दिया है। राज्यपाल 31 जुलाई को यूनिवर्सिटी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगी, जिससे इस मामले को लेकर आगे क्या रुख रहता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

आगरा में असलहा बाबू ‘निलंबित’: UIN में की ‘अजीब हेराफेरी’, पंजाब के शख्स के नाम पर चढ़ा दिया आगरा का लाइसेंस!

आगरा। आगरा में शस्त्र लाइसेंस के यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) में एक बड़ी हेराफेरी का मामला सामने आया है। यहां के असलहा बाबू ने पंजाब के गुरुदासपुर में रहने वाले एक व्यक्ति के नाम पर गलत UIN दर्ज कर दिया। शुरुआती जांच में दोषी पाए जाने पर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने असलहा बाबू प्रशांत कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। छुट्टी के दिन कैसे इस्तेमाल हुई आईडी? दरअसल, यह गड़बड़ी तब सामने आई जब गुरुदासपुर निवासी अर्जन सिंह के नाम पर UIN 295200034518182018 को अप्रैल 2025 में आगरा के आयुध कार्यालय से बदल दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि अर्जन सिंह का आगरा से कोई संबंध नहीं है। मामला संज्ञान में आने के बाद ADM प्रोटोकॉल प्रशांत तिवारी को इसकी जांच सौंपी गई। उन्होंने असलहा बाबू प्रशांत कुमार से जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि जिस दिन ये UIN दर्ज की गई, उस दिन वह छुट्टी पर थे। ऐसे में सवाल उठ खड़ा हुआ कि जब असलहा बाबू छुट्टी पर थे, तो पोर्टल की लॉगिन आईडी का पासवर्ड किसी दूसरे के पास कैसे पहुँचा, क्योंकि बिना पासवर्ड के पोर्टल की लॉगिन आईडी खुल ही नहीं सकती थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए DM ने असलहा बाबू प्रशांत कुमार को शुरुआती चरण में दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है। अब इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच ADM न्यायिक धीरेंद्र सिंह को सौंप दी गई है। ओम प्रकाश सिंह की UIN से जुड़ा था मामला, एक और गड़बड़ी भी मिली यह पूरा मामला जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर में तैनात रहे ओम प्रकाश सिंह से जुड़ा है। उन्होंने 2010 में शस्त्र लाइसेंस बनवाया था। सेवानिवृत्त होने के बाद वे झुंझुनू स्थित अपने पैतृक निवास आ गए। मई 2025 में जब वे अपने लाइसेंस का नवीनीकरण कराने झुंझुनू के आयुध विभाग के कार्यालय पहुँचे, तो उन्हें पता चला कि उनके UIN पर गुरुदासपुर के अर्जन सिंह का नाम आगरा से चढ़ा दिया गया था। ADM प्रोटोकॉल प्रशांत तिवारी ने बताया कि ओम प्रकाश सिंह ने लाइसेंस तो बनवा लिया था, लेकिन शस्त्र नहीं खरीदा था। जांच में एक नाम रेशम सिंह का भी सामने आया है, जिनकी UIN में भी इसी तरह की गड़बड़ी होने की जानकारी मिली है। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने कहा, “असलहा बाबू को निलंबित कर दिया गया है। जांच चल रही है। गुरुदासपुर, ऊधमपुर और झुंझुनू के जिलाधिकारी से जवाब मांगा है जो कि अब तक नहीं मिला है।” यह मामला शस्त्र लाइसेंस प्रणाली में बड़े पैमाने पर धांधली की ओर इशारा कर रहा है, जिसकी गहन जांच की आवश्यकता है।

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