ADA का अवैध निर्माण पर बड़ा एक्शन: आगरा में तीन बिल्डिंगें सील

आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) ने शहर में चल रहे अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शुक्रवार को तीन निर्माणाधीन इमारतों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की। ADA की टीमों ने न सिर्फ इन बिल्डिंगों को सील किया, बल्कि उन पर नोटिस भी चस्पा किए हैं। नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी में कार्रवाई ADA ने अपनी पहली कार्रवाई रकाबगंज वार्ड में की, जहाँ नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी में गंगाराम नामक व्यक्ति द्वारा स्वीकृत मानचित्र (approved map) का उल्लंघन कर निर्माण किया जा रहा था। ADA ने पहले ही चेतावनी दी थी, लेकिन निर्माण कार्य नहीं रोका गया। दो मंजिल का निर्माण पूरा होने के बाद, ADA की टीम ने मौके पर पहुँचकर बिल्डिंग को उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 28 क (1) के तहत सील कर दिया। लोहामंडी वार्ड में दो पर कार्रवाई इसके बाद ADA ने लोहामंडी वार्ड में दो अलग-अलग अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की। कृष्णापुरी में केदारनाथ और भरत सिंह द्वारा बिना मानचित्र स्वीकृत कराए ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि अवैध निर्माणों के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा।

आगरा में अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम टीम को लौटना पड़ा, स्थानीय लोगों ने किया विरोध

आगरा। आगरा के आवास विकास सेक्टर-7 में बुधवार को नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई भारी हंगामे के कारण रुक गई। जोनल अधिकारी सी.पी. सिंह के नेतृत्व में गई निगम की टीम को स्थानीय लोगों के विरोध के बाद बिना कार्रवाई किए ही खाली हाथ लौटना पड़ा। यह कार्रवाई इलाके के एक निवासी ललित अग्रवाल की आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत के बाद शुरू हुई थी। उन्होंने शिकायत में कहा था कि कई लोगों ने अपने घरों के सामने अवैध रूप से रैंप बना लिए हैं, जिससे राहगीरों और वाहनों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। जैसे ही नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची, स्थानीय लोगों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। लोगों ने आरोप लगाया कि उनके नाम से की गई शिकायत फर्जी है और शिकायतकर्ता ललित अग्रवाल ने उनके जाली हस्ताक्षर कर दिए हैं। अधिकारियों ने लोगों को समझाया कि सरकारी भूमि पर रैंप बनाना अवैध है और इसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। हालांकि, तनाव बढ़ने पर निगम टीम को पीछे हटना पड़ा। लोगों ने कहा कि वे खुद ही रैंप हटा लेंगे और निगम को कार्रवाई नहीं करने देंगे। नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने कहा है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने लोगों को खुद अतिक्रमण हटाने का मौका दिया है, लेकिन अगर तय समयसीमा में रैंप नहीं हटे तो निगम सख्त कार्रवाई करेगा।

आगरा में ADA का अवैध निर्माणों पर एक्शन, बुलडोजर चलाकर कॉलोनी ध्वस्त और एक बिल्डिंग सील

आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) ने शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। मंगलवार को ADA ने दो अलग-अलग कार्रवाई करते हुए एक अवैध कॉलोनी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और ताजमहल के पास बन रही एक निर्माणाधीन बिल्डिंग को सील कर दिया। इस सख्त कार्रवाई से अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मच गया है। हिंगोट खेरिया में ध्वस्त हुई 6 हजार वर्गमीटर की अवैध कॉलोनी ताजगंज क्षेत्र के अमर एन्क्लेव, मौजा हिंगोट खेरिया में बंटू यादव, भरत सिंह और कमल सिंह द्वारा 6 हजार वर्गमीटर में एक अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही थी। ADA अधिकारियों ने जब उनसे निर्माण की अनुमति मांगी तो वे इसे नहीं दिखा पाए। इसके बाद ADA ने कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाकर पूरी कॉलोनी को ध्वस्त कर दिया। अवैध रूप से लगाए गए गेट, पक्की सड़कें और बाउंड्रीवाल भी बुलडोजर से उखाड़ दिए गए। ADA ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति के किसी भी तरह का निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा-27 के तहत की गई। ताजमहल के पास बन रही अवैध बिल्डिंग सील दूसरी ओर, ADA ने ताजमहल के प्रतिबंधित क्षेत्र में बन रही एक और अवैध बिल्डिंग को सील कर दिया। ताजगंज स्थित तांगा स्टैंड के पास सुनील राठौर और मनीष वर्मा द्वारा बिना किसी मानचित्र स्वीकृति के यह निर्माण कराया जा रहा था। बिल्डिंग को टीनशेड से छिपाने की कोशिश की गई थी। जब ADA अधिकारियों ने निर्माणकर्ताओं से अनुमति मांगी तो वे कोई भी वैध कागजात नहीं दिखा पाए। इसके बाद ADA ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा-28क(1) के तहत इस अवैध बिल्डिंग को सील कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां! ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में धड़ल्ले से चल रहा अवैध निर्माण, VIDEO वायरल; ASI ने दर्ज कराई FIR, फिर भी नहीं रुक रहा काम

आगरा। देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट, के स्पष्ट आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आगरा में ताजमहल की 500 मीटर की परिधि के अंदर धड़ल्ले से अवैध निर्माण कार्य चल रहा है, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना तब सामने आई है जब कुछ दिन पहले ही पूर्वी गेट के पास एक रेस्टोरेंट मालिक ने भी इसी तरह का अवैध निर्माण करवाया था, जिस पर कार्रवाई अभी लंबित है। टीन शेड के पीछे चल रहा काम, सड़क पर बिखरी ईंटें वायरल वीडियो में ताजमहल के पास टांगा स्टैंड के निकट एक टीन शेड के पीछे अवैध निर्माण कार्य चलता हुआ साफ दिखाई दे रहा है। निर्माण सामग्री, विशेषकर ईंटें, सड़क पर ही बिखरी पड़ी हैं, जिससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई निर्माण पर रोक का मज़ाक उड़ाया जा रहा है। पुरातत्व विभाग (ASI) के सहायक संरक्षक प्रिंस वाजपेयी ने बताया कि उन्हें टांगा स्टैंड के पास सुनील राठौर नामक व्यक्ति द्वारा अवैध निर्माण कराए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पुलिस अधिकारियों और संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। आश्चर्यजनक रूप से, सुनील राठौर के खिलाफ 2021 और 2023 में भी थाना ताजगंज में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। सील हुए निर्माण, ध्वस्तीकरण के आदेश, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं! प्रिंस वाजपेयी ने यह भी खुलासा किया कि पूर्व में प्रशासन द्वारा इन निर्माणों पर सील लगा दी गई थी और उनके ध्वस्तीकरण के आदेश भी जारी हो चुके हैं। हालांकि, आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) ने अब तक उन्हें ध्वस्त नहीं किया है। कुछ दिन पहले भी सुनील राठौर को दो बार नोटिस दिया गया था, और पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार को भी इस संबंध में पत्र भेजकर शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अवैध निर्माण रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्वी गेट के पास भी था अवैध रेस्टोरेंट निर्माण, कार्रवाई का इंतजार यह पहला मामला नहीं है। कुछ दिन पहले भी ताजमहल के पूर्वी गेट से लगभग 150 मीटर की दूरी पर एक रेस्टोरेंट संचालक ने रेस्टोरेंट के पीछे टीन शेड डालकर अवैध निर्माण कर लिया था। एएसआई विभाग के अधिकारियों को जानकारी मिलने पर संचालक को नोटिस दिया गया था और ध्वस्तीकरण के आदेश जारी कर एफआईआर भी करा दी गई थी। लेकिन, दुर्भाग्यवश, अब तक उस अवैध निर्माण को भी ध्वस्त नहीं किया गया है। यह स्थिति सवाल उठाती है कि जब सुप्रीम कोर्ट जैसे सर्वोच्च न्यायालय ने ताजमहल जैसे विश्व धरोहर स्थल की सुरक्षा के लिए कड़े निर्देश दिए हैं, तो स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग उनका पालन क्यों नहीं कर रहे हैं। इन अवैध निर्माणों से न केवल ताजमहल की ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को खतरा है, बल्कि यह कानून के शासन का भी खुलेआम उल्लंघन है।

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