आगरा के टॉप स्कूलों में ‘बम की धमकी’: श्रीराम सेंटेनियल, DPS, जीडी गोयनका, सेंट पीटर्स सहित कई स्कूल निशाने पर! रात में आया खौफनाक मेल, सुबह पुलिस जांच में कुछ नहीं मिला!

आगरा। आगरा शहर में सोमवार-मंगलवार की रात को एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जब कई नामी स्कूलों को एक धमकी भरा ई-मेल मिला। रात 12:59 बजे भेजे गए इस मेल में श्रीराम सेंटेनियल स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, जीआई ग्लोबल पब्लिक स्कूल, आगरा पब्लिक स्कूल, जीडी गोयनका और सेंट पीटर्स जैसे स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी, जिससे सुबह होते ही शहर में हड़कंप मच गया। सुबह मेल देखा तो मचा ‘हड़कंप’, पुलिस को बुलाया मंगलवार सुबह जब स्कूल खुले, तो प्रिंसिपलों और स्कूल प्रबंधन ने इस धमकी भरे मेल को देखते ही तुरंत पुलिस को सूचना दी। इसके बाद बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की टीमें आनन-फानन में इन सभी स्कूल परिसरों में पहुंची और चप्पे-चप्पे की तलाशी ली, लेकिन राहत की बात यह रही कि कहीं भी कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला। मेल में लिखा था ‘बॉम्ब इन द स्कूल’, बच्चों की मौत की धमकी! यह धमकी भरा ई-मेल अंग्रेजी भाषा में था और इसका सब्जेक्ट “Bomb in the School” था। इसमें लिखा गया था कि स्कूल में बम लगाया गया है, जो कुछ ही देर में फट जाएगा। मेल में बच्चों की मौत और विनाश की बातें कहकर डराने की कोशिश की गई थी। मेल के अंत में “Silence and Road Kill इस टेरर अटैक की जिम्मेदारी लेता है” लिखा था। छुट्टी के बाद हुई जांच, बच्चों में नहीं फैला ‘पैनिक’ श्रीराम सेंटेनियल स्कूल की प्रिंसिपल मोनिका सहगल ने बताया कि जब तक पुलिस टीम जांच के लिए पहुंची, तब तक स्कूलों की छुट्टी हो चुकी थी। इस वजह से बच्चों में कोई घबराहट नहीं फैल पाई, जो एक राहत की बात रही। सभी स्कूलों में छुट्टी के बाद पूरी तरह से तलाशी ली गई, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। पुलिस साइबर सेल की मदद से इस ई-मेल की गंभीरता से जांच कर रही है। यह भी पता चला है कि दिल्ली और अन्य राज्यों के कई स्कूलों को भी इसी तरह के मेल मिले हैं, जिससे लगता है कि यह किसी बड़े शरारती तत्व या गिरोह का काम हो सकता है।

आगरा में शुल्क नियामक समिति के गठन पर बवाल, “दोषी स्कूल” और स्कूलों के CA को सदस्य बनाने पर अभिभावकों में भारी रोष

तिथि: 22 जुलाई 2025 स्थान: आगरा आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार के 2018 के शासनादेश के लगभग सात साल बाद, आगरा में अभिभावकों के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार जिला शुल्क नियामक समिति (DFRC) का गठन तो हो गया, लेकिन इसका स्वरूप सामने आते ही यह विवादों के केंद्र में आ गई है। अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए बनी इस समिति में ही अभिभावकों को जगह नहीं दी गई है। उल्टे, समिति में एक ऐसे स्कूल के प्रतिनिधि और एक ऐसे चार्टर्ड अकाउंटेंट को सदस्य बना दिया गया है, जिन पर सीधे तौर पर निजी स्कूलों के साथ मिलकर काम करने और अभिभावकों के हितों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप हैं। प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA) संस्था के राष्ट्रीय संयोजक, दीपक सिंह सरीन ने इस “गुपचुप” और “हितों के टकराव” वाली समिति के गठन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। क्यों है विवाद? आरोपों में घिरा स्कूल ही बना ‘न्याय का रक्षक’ दीपक सिंह सरीन ने बताया कि उनकी संस्था 2021 से लगातार DFRC के गठन की मांग कर रही थी, ताकि निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली और अन्य शिकायतों पर अभिभावकों को एक आधिकारिक मंच मिल सके। उन्होंने कहा, “देर से ही सही, समिति बनी तो, लेकिन इसका तरीका और संरचना देखकर लगता है कि यह अभिभावकों को न्याय देने के लिए नहीं, बल्कि स्कूलों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई है।” सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि समिति में डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) आगरा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पापा संगठन के अनुसार, इसी स्कूल के खिलाफ कई अभिभावकों ने गंभीर शिकायतें दर्ज करा रखी हैं, जिन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रमुख आरोप हैं: दीपक सरीन ने सवाल उठाया, “जिस स्कूल पर खुद नियमों के उल्लंघन के इतने गंभीर आरोप हों, उसे शुल्क नियामक समिति में सदस्य बनाकर ‘न्याय का रक्षक’ कैसे बनाया जा सकता है? यह तो चोर को ही तिजोरी की चाबी सौंपने जैसा है।” चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका पर भी सवाल समिति में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी बतौर सदस्य नियुक्त किया गया है। अभिभावक संगठन का आरोप है कि ये सीए कई निजी स्कूलों के साथ व्यावसायिक रूप से जुड़े हुए हैं और वर्षों से उनके वित्तीय सलाहकार रहे हैं। ऐसे में उनकी निष्पक्षता पर भरोसा कैसे किया जा सकता है? क्या जिला चयन समिति को पूरे आगरा में कोई ऐसा स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं मिला, जिसका निजी स्कूलों से कोई लेना-देना न हो? PAPA की मांगें और भविष्य की रणनीति इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं: संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे इस संबंध में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री और आगरा के जिलाधिकारी को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंप रहे हैं। यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई और समिति का पुनर्गठन नहीं हुआ, तो वे अभिभावकों के साथ मिलकर जिलाधिकारी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के लिए मजबूर होंगे। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, और सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वे अभिभावकों की जायज मांगों को सुनकर समिति का पुनर्गठन करते हैं या निजी स्कूल लॉबी के दबाव में इस विवादास्पद समिति को ही जारी रखते हैं।

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