DM का डंडा, फीस-यूनिफॉर्म पर स्कूलों को कड़ा संदेश!

23 जुलाई 2025 स्थान: आगरा आगरा। जिला शुल्क नियामक समिति (DFRC) के गठन को लेकर मचे घमासान के ठीक एक दिन बाद, आज कलेक्ट्रेट सभागार में हुई एक हंगामेदार बैठक में जिलाधिकारी ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए कई बड़े फैसले सुनाए, जिन्हें अभिभावकों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अभिभावकों का मूल मुद्दा, यानी समिति की विवादास्पद संरचना, अभी भी जस का तस बना हुआ है, जिसके पुनर्गठन का उन्होंने आग्रह किया है। आज आयोजित बैठक में, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA) के राष्ट्रीय संयोजक दीपक सिंह सरीन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के सामने समिति के सदस्यों पर अपनी आपत्तियों को जोरदार ढंग से रखा। “यह असली कमेटी है या डमी?” – जिलाधिकारी के सामने गरजे अभिभावक बैठक में दीपक सिंह सरीन ने सीधे तौर पर सवाल उठाते हुए कहा, “पहले से ही शिक्षा विभाग के सवालों के कटघरे में खड़े स्कूल और उन्हीं स्कूलों से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट को इस कमेटी में रखना बच्चों के हितों के साथ अन्याय है। ये लोग कभी भी छात्रों और अभिभावकों के साथ न्याय नहीं कर सकते।” उन्होंने समिति में शामिल एक अन्य तथाकथित “पेरेंट्स एसोसिएशन” के सदस्य पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी छात्र हित में कोई ठोस काम नहीं किया है। सरीन ने जिलाधिकारी से सीधे पूछा, “महोदय, हमें यह बताया जाए कि यह जिला शुल्क नियामक समिति वास्तव में न्याय के लिए बनाई गई है या फिर केवल जनता को उलझाने के लिए एक डमी कमेटी बना दी गई है? क्योंकि इसमें अधिकांश सदस्य वे हैं जिनका छात्र हितों से कोई सरोकार नहीं रहा है।” जिलाधिकारी के बड़े निर्देश, अभिभावकों को मिली राहत अभिभावकों की शिकायतों और तर्कों को गंभीरता से सुनने के बाद, जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण और तत्काल प्रभावी निर्देश दिए: फैसले मील का पत्थर, पर पहली शर्त- कमेटी में बदलाव जिलाधिकारी द्वारा लिए गए इन फैसलों की सराहना करते हुए, PAPA के संयोजक दीपक सिंह सरीन ने कहा, “निस्संदेह, ये कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। हम जिलाधिकारी महोदय की इस पहल का स्वागत करते हैं।” लेकिन उन्होंने अपनी मूल मांग को दोहराते हुए कहा, “इन सभी सुधारों का लाभ अभिभावकों को तभी मिलेगा, जब न्याय करने वाली कुर्सी पर सही और निष्पक्ष लोग बैठे हों। इसलिए, सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता जिला शुल्क नियामक समिति के सदस्यों में बदलाव करना है। जब तक यह कमेटी स्कूल संचालकों के प्रभाव से मुक्त नहीं होगी, तब तक यह ठीक से काम नहीं कर पाएगी।” अब सभी की निगाहें DIOS द्वारा किए जाने वाले “पुनः निरीक्षण” और जिलाधिकारी के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं कि क्या आगरा के अभिभावकों को वास्तव में एक निष्पक्ष शुल्क नियामक समिति मिल पाएगी।

आगरा में शुल्क नियामक समिति के गठन पर बवाल, “दोषी स्कूल” और स्कूलों के CA को सदस्य बनाने पर अभिभावकों में भारी रोष

तिथि: 22 जुलाई 2025 स्थान: आगरा आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार के 2018 के शासनादेश के लगभग सात साल बाद, आगरा में अभिभावकों के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार जिला शुल्क नियामक समिति (DFRC) का गठन तो हो गया, लेकिन इसका स्वरूप सामने आते ही यह विवादों के केंद्र में आ गई है। अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए बनी इस समिति में ही अभिभावकों को जगह नहीं दी गई है। उल्टे, समिति में एक ऐसे स्कूल के प्रतिनिधि और एक ऐसे चार्टर्ड अकाउंटेंट को सदस्य बना दिया गया है, जिन पर सीधे तौर पर निजी स्कूलों के साथ मिलकर काम करने और अभिभावकों के हितों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप हैं। प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA) संस्था के राष्ट्रीय संयोजक, दीपक सिंह सरीन ने इस “गुपचुप” और “हितों के टकराव” वाली समिति के गठन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। क्यों है विवाद? आरोपों में घिरा स्कूल ही बना ‘न्याय का रक्षक’ दीपक सिंह सरीन ने बताया कि उनकी संस्था 2021 से लगातार DFRC के गठन की मांग कर रही थी, ताकि निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली और अन्य शिकायतों पर अभिभावकों को एक आधिकारिक मंच मिल सके। उन्होंने कहा, “देर से ही सही, समिति बनी तो, लेकिन इसका तरीका और संरचना देखकर लगता है कि यह अभिभावकों को न्याय देने के लिए नहीं, बल्कि स्कूलों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई है।” सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि समिति में डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) आगरा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पापा संगठन के अनुसार, इसी स्कूल के खिलाफ कई अभिभावकों ने गंभीर शिकायतें दर्ज करा रखी हैं, जिन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रमुख आरोप हैं: दीपक सरीन ने सवाल उठाया, “जिस स्कूल पर खुद नियमों के उल्लंघन के इतने गंभीर आरोप हों, उसे शुल्क नियामक समिति में सदस्य बनाकर ‘न्याय का रक्षक’ कैसे बनाया जा सकता है? यह तो चोर को ही तिजोरी की चाबी सौंपने जैसा है।” चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका पर भी सवाल समिति में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी बतौर सदस्य नियुक्त किया गया है। अभिभावक संगठन का आरोप है कि ये सीए कई निजी स्कूलों के साथ व्यावसायिक रूप से जुड़े हुए हैं और वर्षों से उनके वित्तीय सलाहकार रहे हैं। ऐसे में उनकी निष्पक्षता पर भरोसा कैसे किया जा सकता है? क्या जिला चयन समिति को पूरे आगरा में कोई ऐसा स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं मिला, जिसका निजी स्कूलों से कोई लेना-देना न हो? PAPA की मांगें और भविष्य की रणनीति इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं: संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे इस संबंध में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री और आगरा के जिलाधिकारी को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंप रहे हैं। यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई और समिति का पुनर्गठन नहीं हुआ, तो वे अभिभावकों के साथ मिलकर जिलाधिकारी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के लिए मजबूर होंगे। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, और सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वे अभिभावकों की जायज मांगों को सुनकर समिति का पुनर्गठन करते हैं या निजी स्कूल लॉबी के दबाव में इस विवादास्पद समिति को ही जारी रखते हैं।

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