Agra News: घटिया निर्माण पर विधायक पुत्र आगबबूला; ठेकेदार बोला- ‘परिवहन मंत्री से लाया हूं काम’, VIDEO VIRAL

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Agra News घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग पर विधायक पुत्र चौधरी रामेश्वर ने ठेकेदार को रोका, तो ठेकेदार ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का नाम लेकर धमकाया और कहा ‘कर लो जो करना है’। भाजपा विधायक के प्रतिनिधि और मंत्री के आदमी के बीच विवाद ने भ्रष्टाचारी गठजोड़ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगरा में सरकारी निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की सीमाओं को पार करते हुए एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ भाजपा विधायक बाबूलाल के पुत्र और उनके प्रतिनिधि चौधरी रामेश्वर और एक भ्रष्ट ठेकेदार के बीच घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को लेकर तीखी तकरार हुई। हद तो तब हो गई जब ठेकेदार ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का नाम लेकर विधायक पुत्र को खुलेआम धमकी दी और दबंगई दिखाई। निर्माण कार्य और विधायक पुत्र का विरोध ठेकेदार की दबंगई और मंत्री का नाम भ्रष्ट ठेकेदार ने निर्माण कार्य में कमी निकालने पर विधायक पुत्र की बात सुनने के बजाय, सीधे दबंगई पर उतर आया। भ्रष्टाचार पर उठे गंभीर सवाल यह पूरा घटनाक्रम भ्रष्टाचार के उस गठजोड़ को उजागर करता है, जहाँ सत्ताधारी पार्टी के मंत्री का नाम लेकर ठेकेदार घटिया काम करने की हिम्मत जुटा रहा है। इस घटना ने आगरा में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार के स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगरा में शुल्क नियामक समिति के गठन पर बवाल, “दोषी स्कूल” और स्कूलों के CA को सदस्य बनाने पर अभिभावकों में भारी रोष

तिथि: 22 जुलाई 2025 स्थान: आगरा आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार के 2018 के शासनादेश के लगभग सात साल बाद, आगरा में अभिभावकों के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार जिला शुल्क नियामक समिति (DFRC) का गठन तो हो गया, लेकिन इसका स्वरूप सामने आते ही यह विवादों के केंद्र में आ गई है। अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए बनी इस समिति में ही अभिभावकों को जगह नहीं दी गई है। उल्टे, समिति में एक ऐसे स्कूल के प्रतिनिधि और एक ऐसे चार्टर्ड अकाउंटेंट को सदस्य बना दिया गया है, जिन पर सीधे तौर पर निजी स्कूलों के साथ मिलकर काम करने और अभिभावकों के हितों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप हैं। प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA) संस्था के राष्ट्रीय संयोजक, दीपक सिंह सरीन ने इस “गुपचुप” और “हितों के टकराव” वाली समिति के गठन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। क्यों है विवाद? आरोपों में घिरा स्कूल ही बना ‘न्याय का रक्षक’ दीपक सिंह सरीन ने बताया कि उनकी संस्था 2021 से लगातार DFRC के गठन की मांग कर रही थी, ताकि निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली और अन्य शिकायतों पर अभिभावकों को एक आधिकारिक मंच मिल सके। उन्होंने कहा, “देर से ही सही, समिति बनी तो, लेकिन इसका तरीका और संरचना देखकर लगता है कि यह अभिभावकों को न्याय देने के लिए नहीं, बल्कि स्कूलों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई है।” सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि समिति में डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) आगरा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पापा संगठन के अनुसार, इसी स्कूल के खिलाफ कई अभिभावकों ने गंभीर शिकायतें दर्ज करा रखी हैं, जिन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रमुख आरोप हैं: दीपक सरीन ने सवाल उठाया, “जिस स्कूल पर खुद नियमों के उल्लंघन के इतने गंभीर आरोप हों, उसे शुल्क नियामक समिति में सदस्य बनाकर ‘न्याय का रक्षक’ कैसे बनाया जा सकता है? यह तो चोर को ही तिजोरी की चाबी सौंपने जैसा है।” चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका पर भी सवाल समिति में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी बतौर सदस्य नियुक्त किया गया है। अभिभावक संगठन का आरोप है कि ये सीए कई निजी स्कूलों के साथ व्यावसायिक रूप से जुड़े हुए हैं और वर्षों से उनके वित्तीय सलाहकार रहे हैं। ऐसे में उनकी निष्पक्षता पर भरोसा कैसे किया जा सकता है? क्या जिला चयन समिति को पूरे आगरा में कोई ऐसा स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं मिला, जिसका निजी स्कूलों से कोई लेना-देना न हो? PAPA की मांगें और भविष्य की रणनीति इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं: संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे इस संबंध में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री और आगरा के जिलाधिकारी को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंप रहे हैं। यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई और समिति का पुनर्गठन नहीं हुआ, तो वे अभिभावकों के साथ मिलकर जिलाधिकारी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के लिए मजबूर होंगे। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, और सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वे अभिभावकों की जायज मांगों को सुनकर समिति का पुनर्गठन करते हैं या निजी स्कूल लॉबी के दबाव में इस विवादास्पद समिति को ही जारी रखते हैं।

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