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आगरा: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदर्शन

आगरा। आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर समाजवादी छात्र सभा ने जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क कैंपस में बैनर और पोस्टर लेकर नारेबाजी की और पैदल मार्च करते हुए कुलपति सचिवालय तक पहुँचे। छात्र सभा ने चेतावनी दी है कि अगर 1 अक्टूबर तक चुनाव की तारीख घोषित नहीं की गई तो कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में पिछले कई सालों से छात्र संघ चुनाव नहीं हो रहे हैं, जिससे छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है। कुलपति के मौके पर मौजूद न होने पर कार्यकर्ताओं ने कुलपति सचिवालय का गेट तोड़ने की भी कोशिश की, लेकिन इससे पहले ही परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश ने उनका ज्ञापन स्वीकार कर लिया। डॉ. ओमप्रकाश ने कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि 10 दिन के भीतर चुनाव कराने पर निर्णय लिया जाएगा और इसके लिए चुनाव कमेटी का गठन किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर 1 अक्टूबर तक तिथि घोषित नहीं होती है तो वे न केवल सड़कों पर उतरेंगे, बल्कि विश्वविद्यालय में ताला डालने का भी काम करेंगे। इस प्रदर्शन में पंकज कसाना, तेजू यादव, मानवेंद्र सिंह, राजा यादव, प्रदीप यादव, ललित जाट, अभय जाट, माधव यादव, बृज कसाना, नितिन कसाना, भरत कसाना, अमन यादव, अनिकेत पिपल, रोहित यादव, अमन अब्बास, सक्षम गौतम, प्रकाश जुरैल, करन गुप्ता आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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आगरा विश्वविद्यालय की बदहाली: राज्यपाल के आने से पहले टूटे टॉयलेट, टूटी सीटें और गंदगी का अंबार; छात्र बोले – “बेसिक सुविधाएं भी नहीं!”

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में आगामी 20 अगस्त को प्रस्तावित दीक्षांत समारोह से पहले परिसर की बदहाली ने छात्रों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। कार्यक्रम का आयोजन स्वामी विवेकानंद परिसर (पूर्व में खंदारी परिसर) स्थित शिवाजी मंडपम में किया जाना है, जहां स्वयं राज्यपाल की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। हालांकि, परिसर में मौजूद संस्थाओं के टॉयलेट टूटे पड़े हैं, कैंटीन की सीटें खराब हैं, और चारों ओर गंदगी का ढेर लगा हुआ है, जिससे छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टॉयलेट में कचरा, टूटी कैंटीन और चारों ओर गंदगी: छात्रों की जुबानी बदहाली की कहानी विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद परिसर में लगभग 8 संस्थान हैं, जहां करीब 3 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। छात्रों को टॉयलेट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी भटकना पड़ रहा है। छात्र नितिन ने बताया कि 20 अगस्त को दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आ रही हैं, लेकिन शिवाजी मंडपम के पास बहुत गंदगी है। कैंटीन की सीटें टूटी पड़ी हैं और पार्क में पानी की बोतलें बिखरी पड़ी हैं। कैंटीन के सामने वाले दूसरे पार्क में स्थित एक टॉयलेट की एक महीने से सफाई नहीं हुई है, जिससे छात्रों को भारी असुविधा हो रही है। छात्र नितिन ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सफाई व्यवस्था में लापरवाही का आरोप लगाया। एक अन्य छात्र आकाश शर्मा ने परिसर की और भी भयावह तस्वीर पेश की। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम स्थल के पीछे एक पेड़ टूटा पड़ा है और शिवाजी मंडपम के चारों तरफ बारिश के कारण काई जम गई है, जिससे दीक्षांत समारोह में आने वाले किसी भी व्यक्ति को चोट लगने का खतरा है। परिसर में स्थित टीचर्स कॉलोनी की दीवारें भी टूटी पड़ी हैं, और डिपार्टमेंट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग विभाग के टॉयलेट भी खराब पड़े हैं, जिससे लोगों को भारी दिक्कतें हो रही हैं। राज्यपाल के काफिले के रास्ते में भी बदहाली, छात्रों ने की सुधार की मांग छात्रों ने मांग की है कि दीक्षांत समारोह से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से ले। उन्होंने कैंटीन और टॉयलेट की तुरंत सफाई कराने, टूटी हुई सीटों की मरम्मत करने और जिन जगहों की मरम्मत की आवश्यकता है, वहां तत्काल कार्य कराने की अपील की है। छात्रों का कहना है कि जब राज्यपाल का काफिला इन्हीं रास्तों से गुजरेगा, तो विश्वविद्यालय की ऐसी दयनीय स्थिति पर सवाल उठेंगे। यह देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन राज्यपाल के आगमन से पहले इन मूलभूत समस्याओं को कितनी गंभीरता से लेता है और छात्रों को स्वच्छ एवं सुरक्षित परिसर उपलब्ध करा पाता है या नहीं।

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आगरा यूनिवर्सिटी में ‘जातिवाद’ का आरोप: राज्यपाल के सामने भगाए गए सफाई कर्मचारी, बोले- “शिक्षकों ने छीनी खाने की प्लेटें, कार्रवाई न हुई तो दीक्षांत समारोह में देंगे धरना!”

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में आज (शनिवार) सफाई कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के हालिया विजिट के दौरान प्रो. शरद उपाध्याय, प्रो. अनिल गुप्ता और प्रो. संतोष बिहारी शर्मा जैसे शिक्षकों ने उनके साथ अभद्रता की, जातिवादी टिप्पणियां कीं और उन्हें खाने के पंडाल से भगा दिया, यहाँ तक कि उनके हाथों से खाने की प्लेटें तक छीन ली गईं। सफाई कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे 20 अगस्त को होने वाले दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के सामने ही धरना प्रदर्शन करेंगे और हड़ताल पर चले जाएंगे। “बाबा साहब के नाम पर यूनिवर्सिटी, फिर भी दुर्व्यवहार!” विश्वविद्यालय के सफाई प्रभारी शेखर चौधरी ने बताया कि राज्यपाल के आगमन पर उनकी पूरी टीम ने दो-तीन दिनों तक लगातार काम करके विश्वविद्यालय के हर कोने को चमकाया। जब राज्यपाल के आगमन पर खाने का इंतजाम था, तो सफाई कर्मचारी भी शामिल होने पहुंचे। लेकिन वहाँ उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। शेखर चौधरी ने गुस्से में कहा, “जिस विश्वविद्यालय का नाम ही बाबा साहब के नाम पर है, वहीं हमारे साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। सफाई कर्मचारियों के लिए विश्वविद्यालय में बैठने और नहाने की कोई व्यवस्था नहीं है। हम गंदगी साफ करते हैं, इसके बावजूद हमारी शिकायतों को अनसुना कर दिया जाता है।” उन्होंने मांग की, “अगर ऐसा व्यवहार करना है तो कुलपति हमारा खाना ही अलग करा दें।” “पंडाल से बाहर निकाला, मांगें नहीं मानी तो हड़ताल” सफाई कर्मचारी धर्म सिंह ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, “शिक्षकों और अधिकारियों ने हमारे हाथ से प्लेटें छीन लीं। हमें चाणक्य भवन में खाने के पंडाल से भगा दिया गया और बाहर निकाल दिया गया।” कई सफाई कर्मचारियों ने बताया कि वे बैठने की व्यवस्था के लिए कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि “अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो 20 अगस्त को राज्यपाल के सामने धरना देंगे, प्रदर्शन करेंगे और सफाई कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे।” यह घटना विश्वविद्यालय परिसर में जातिवाद और कर्मचारियों के प्रति दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों को सामने लाती है, जो कि बाबा साहब के नाम पर बने संस्थान के मूल्यों के विपरीत है।

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आगरा यूनिवर्सिटी में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का ‘नाइट स्टे’: NAAC सहित कई मुद्दों पर अधिकारियों संग की समीक्षा, आज मिलेंगी प्रिंसिपलों से

आगरा। उत्तर प्रदेश की कुलाधिपति (राज्यपाल) आनंदीबेन पटेल ने बुधवार रात डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के खंदारी स्थित गेस्ट हाउस में ‘नाइट स्टे’ किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों की गहन समीक्षा की गई। गेस्ट हाउस में हुई अहम बैठक, इन मुद्दों पर हुई चर्चा बुधवार को आगरा में दो कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद, कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस पहुंचीं, जहाँ उच्च शिक्षा मंत्री भी उनके स्वागत के लिए मौजूद थे। यहीं पर अधिकारियों के साथ बैठक हुई, जिसमें कई अहम मुद्दों पर कुलाधिपति को विस्तृत जानकारी दी गई। बैठक में मुख्य रूप से इन विषयों पर चर्चा हुई: आज योग वाटिका का उद्घाटन और प्रिंसिपलों से भेंट गुरुवार (आज) सुबह कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल खंदारी परिसर में नव निर्मित योग वाटिका का उद्घाटन करेंगी। इसके बाद वे सरकारी कॉलेज प्रतिनिधियों और AIDED कॉलेजों के प्राचार्यों (प्रिंसिपलों) के साथ एक बैठक करेंगी। इस बैठक के बाद, वे कृषि विज्ञान केंद्र, इटावा के लिए रवाना होंगी। कुलाधिपति का यह दौरा विश्वविद्यालय के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा और सुधार पर केंद्रित रहा है।

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आगरा पहुंचीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल: नेशनल चैंबर में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ दिए, क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी का भी करेंगी उद्घाटन

आगरा। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बुधवार दोपहर आगरा पहुंचीं। शहर आगमन पर मेयर हेमलता दिवाकर और पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने साफा पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। राज्यपाल ने अपने दौरे की शुरुआत नेशनल चैंबर के स्थापना दिवस कार्यक्रम से की, जहाँ उन्होंने 6 अध्यक्षों को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया। “भारत एक अर्थव्यवस्था नहीं, रोल मॉडल बन गया है”: राज्यपाल नेशनल चैंबर के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आगरा जैसी ऐतिहासिक नगरी व्यापार के क्षेत्र में निरंतर उल्लेखनीय कार्य कर रही है और देश के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने इस गौरवशाली अवसर पर पूर्व अध्यक्षों और व्यापारियों को धन्यवाद दिया, जो देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। राज्यपाल ने जोर देकर कहा, “भारत एक अर्थव्यवस्था नहीं, एक रोल मॉडल बन गया है। भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व दे रहा है।” उन्होंने बताया कि देश में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं, और आज का युवा नए विचारों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “आई लव यू युवा को रोजगार मिल रहा है, यह किसी क्रांति से कम नहीं है।” राज्यपाल ने सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार पूरी नीयत और नीति से इस दिशा में काम कर रही है और उन्हें समाजसेवियों और उद्योगों का सहयोग चाहिए। उन्होंने सभी से भारत सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर काम करने का आह्वान किया। इन दिग्गजों को मिला ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कार्यक्रम में केके पालीवाल, शांति स्वरूप गोयल, अमरनाथ गोयल, राजकुमार अग्रवाल, प्रेम सागर अग्रवाल, प्रदीप कुमार और अतुल कुमार गुप्ता को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किए। इस कार्यक्रम के बाद, राज्यपाल ब्रिटिश समय की क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी का उद्घाटन करेंगी, जिसका 3.30 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार किया गया है। इसमें अब डिजिटल लाइब्रेरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। वर्ष 1911 में स्थापित यह लाइब्रेरी अब 19 कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा के साथ पुनः शुरू हो गई है, और 100 से अधिक लोग इसके सदस्य बन चुके हैं। राज्यपाल विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के साथ ही डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति और अन्य अधिकारियों के साथ भी बैठक करेंगी। बुधवार रात को वे यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में ही रुकेंगी और 31 जुलाई को सुबह प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न विद्यालयों के प्रिंसिपलों के साथ बैठक करने के बाद इटावा के लिए रवाना होंगी।

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आगरा पहुंचते ही राज्यपाल के कुलपति ने छुए पैर: वीडियो वायरल होने से विवाद, कार्यकाल विस्तार की अटकलें तेज!

आगरा। आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी द्वारा राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के पैर छूने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना ने शहर में एक नई बहस छेड़ दी है और कुलपति के इस कृत्य पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। राज्यपाल दो दिवसीय दौरे पर आगरा में हैं, जहां वह कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। गेस्ट हाउस पहुंचते ही कुलपति ने छुए पैर, फिर पुलिस कमिश्नर ने किया सैल्यूट राज्यपाल आनंदी बेन पटेल बुधवार दोपहर को यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस पहुंचीं। वह शहर में कई कार्यक्रमों में भाग लेंगी, जिनमें ब्रिटिश समय की क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी का उद्घाटन और नेशनल चैंबर का कार्यक्रम शामिल है। यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में राज्यपाल के स्वागत के लिए अधिकारियों के साथ कुलपति प्रो. आशु रानी भी मौजूद थीं। जैसे ही राज्यपाल अपनी गाड़ी से उतरीं, कुलपति ने उन्हें बुके भेंट किया और फिर उनके पैर छुए। इस दृश्य के तुरंत बाद, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने उन्हें सैल्यूट किया, और कुलसचिव अजय मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों ने भी उन्हें बुके दिए। इस दौरान उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी वहां उपस्थित थे। कार्यकाल विस्तार की अटकलें और जांच का सामना कुलपति प्रो. आशु रानी के पैर छूने का वीडियो सामने आते ही यह घटना चर्चा का विषय बन गई है। सूत्रों का कहना है कि कुलपति का कार्यकाल सितंबर में समाप्त हो रहा है और वह अपना कार्यकाल विस्तार करवाना चाहती हैं। इस पृष्ठभूमि में उनके इस कृत्य को कार्यकाल विस्तार के प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, कुलपति प्रो. आशु रानी के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। उनके खिलाफ कोर्ट में मुकदमे दर्ज हुए हैं, लोकपाल में शिकायतें पहुंची हैं और जांच भी शुरू हो गई है। यही नहीं, उनके खिलाफ विजिलेंस जांच भी चल रही है। ऐसे में, इस वायरल वीडियो ने उनकी स्थिति को और भी पेचीदा बना दिया है। राज्यपाल 31 जुलाई को यूनिवर्सिटी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगी, जिससे इस मामले को लेकर आगे क्या रुख रहता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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आगरा यूनिवर्सिटी के 3 लॉ कॉलेजों में प्रवेश पर रोक: बार काउंसिल ऑफ इंडिया का बड़ा फैसला, 2025-26 सत्र में नहीं होंगे दाखिले

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से संबद्ध तीन लॉ कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए प्रवेश पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने रोक लगा दी है। BCI ने देश भर के कुल 11 लॉ कॉलेजों में दाखिले रोकने का आदेश जारी किया है, जिनमें आगरा के ये तीन कॉलेज प्रमुखता से शामिल हैं। अलीगढ़ का एक कॉलेज भी इस सूची में है। औचक निरीक्षण में मिली खामियां, BCI ने जारी किया पत्र BCI की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि उच्च स्तरीय औचक निरीक्षण निगरानी समिति ने देश के लॉ कॉलेजों का निरीक्षण किया था। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही यह बड़ा फैसला लिया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि इन संस्थानों को सत्र 2025-26 के लिए भारतीय विधि शिक्षा परिषद से अनुमोदन पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। जिन आगरा यूनिवर्सिटी से संबद्ध तीन कॉलेजों में प्रवेश पर रोक लगाई गई है, उनके नाम हैं: इसके अलावा, अलीगढ़ के राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध आरजे लॉ कॉलेज खैर पर भी रोक लगाई गई है। पहले भी 67 बीएड कॉलेजों पर लग चुकी है रोक यह पहली बार नहीं है जब आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों पर प्रवेश को लेकर इस तरह की रोक लगी हो। इससे पहले नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने भी देश में 2200 बीएड, एमएड और बीपीएड कॉलेजों पर प्रवेश पर रोक लगाई थी। इनमें आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध 67 बीएड, तीन एमएड और बीपीएड कॉलेज शामिल थे। उन कॉलेजों ने सत्र 2021-22 और 2022-23 की परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट जमा नहीं कराई थी। BCI का यह कदम लॉ शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जो उन संस्थानों पर कार्रवाई कर रहा है जो निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं।

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आगरा के KMI में गूंजी ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ की धुन: अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में पं. बनारसी दास चतुर्वेदी को नमन, मॉरीशस से भी जुड़े वक्ता

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ (KMI) में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा: कल, आज और कल’ विषय पर आधारित एक द्विसाप्ताहिक अंतरविषयी अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार का सत्र विशेष रूप से महान साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी पं. बनारसी दास चतुर्वेदी को समर्पित रहा, जहाँ उनके साहित्यिक और सामाजिक योगदान को याद किया गया। प्रवासी साहित्य के पुरोधा पं. बनारसी दास चतुर्वेदी को किया याद कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए आगरा कॉलेज की हिंदी विभाग की आचार्य प्रो. शेफाली चतुर्वेदी ने पं. बनारसी दास चतुर्वेदी के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रवासी साहित्य की बात करते समय पं. बनारसी दास चतुर्वेदी को छोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने गिरमिटिया मजदूरों की दासता से मुक्ति के लिए लगातार प्रयत्न किए, और उनके जीवन पर्यंत संघर्ष ने भारतीय ज्ञान परंपरा और प्रवासी भारतीयों के बीच सेतु का काम किया। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल चतुर्वेदी ने अपने नाना पं. बनारसी दास चतुर्वेदी को याद करते हुए बताया कि राज्यसभा के सदस्य रहते हुए उन्होंने केवल एक ही बात की चिंता की थी – वह किस तरह शहीदों को सम्मान दिला सकें और उनके परिवार के सदस्यों के पालन-पोषण की व्यवस्था कर सकें। विदेशों से भी जुड़े विद्वान, सनातन धर्म के प्रसार पर हुई चर्चा कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मॉरीशस के महात्मा गांधी संस्थान, मोका से वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. तनुजा पदारथ ने ऑनलाइन जुड़कर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि फिजी, दक्षिण अफ्रीका, गयाना, सूरीनाम जैसे देशों में जहाँ भारतीय मूल के लोग पहुँचे, वे अपने साथ भारत से श्री रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, गंगाजल आदि वस्तुएं लेकर गए। उनके आगमन से ही इन देशों में सनातन धर्म और काली माई की परंपरा देखी जाती है। यह भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार को दर्शाता है। विद्वानों ने सराहा चतुर्वेदी का योगदान, भारतीय ज्ञान पर हुई गहन चर्चा बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग से प्रो. गुंजन ने कहा कि एक व्यक्ति जब महापुरुष हो जाता है, तो वह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज का हो जाता है। यह बात पं. बनारसी दास चतुर्वेदी के योगदान पर भी लागू होती है। दयालबाग विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग से डॉ. निशीथ गौड़ ने कहा कि पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी का योगदान भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भ में पुनः परिभाषित करने जा रहा है। साहित्यकार देवेश बाजपेई ने भी पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी और गिरमिटिया प्रवासी भारतीयों पर अपने विचार रखे। सांध्यकालीन सत्र का अध्यक्षीय उद्बोधन प्रो. सुगम आनंद ने दिया। विशिष्ट अतिथि के रूप में आरबीएस कॉलेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. युवराज सिंह उपस्थित थे। आकाशवाणी से अनेन्द्र सिंह और केंद्रीय हिंदी संस्थान से डॉ. राजश्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। केएमआई के संस्कृत विभाग की व्याख्याता डॉ. वर्षा रानी ने भी अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। कार्यशाला का संचालन डॉ. रमा और डॉ. शीरीन ज़ैदी ने कुशलतापूर्वक किया। यह कार्यशाला भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं को उजागर करने और उसे आधुनिक संदर्भ में समझने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रही है।

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