‘हे माँ!’ आगरा में ड्रग विभाग का फिर छापा, 71 करोड़ की ‘नकली’ दवाओं के बाद अब ये बड़ा एक्शन

आगरा। आगरा के दवा बाजार में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। ड्रग विभाग ने दोपहर से ही एक बड़ी छापेमारी शुरू कर दी है, जो देर रात तक जारी है। बताया गया है कि मुख्यालय में शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई की जा रही है। असिस्टेंट ड्रग कमिश्नर अतुल उपाध्याय ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली थी कि ड्रग एक्ट के नियमों का उल्लंघन करते हुए तीन दुकानों से अवैध व्यापार किया जा रहा है। इन दुकानों के नाम हैं- राधे कृपा फार्मा, एन के एंटरप्राइजेज और गोगिया मेडिकल एजेंसी। आगरा मंडल के ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने इन तीनों दुकानों से जांच के लिए 12 सैंपल कलेक्ट किए हैं। ड्रग विभाग की टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन दुकानों का संबंध पहले चर्चा में आए ‘हे माँ’ या ‘बंसल मेडिको’ जैसे बड़े दवा माफिया नेटवर्क से तो नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि यह जांच नकली दवाओं के एक और बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर सकती है। अगस्त में भी हुई थी बड़ी कार्रवाई यह पहली बार नहीं है जब आगरा के दवा बाजार पर शिकंजा कसा गया है। अगस्त के अंत में ड्रग विभाग और एसटीएफ ने मिलकर एक बड़ी छापेमारी की थी, जिसमें 71 करोड़ रुपये से अधिक की दवाएं सील की गई थीं। उस दौरान नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था और कई गिरफ्तारियां भी हुई थीं, जिसमें हिमांशु अग्रवाल को 1 करोड़ रुपये की रिश्वत देने के आरोप में पकड़ा गया था। इस नई छापेमारी से यह आशंका जताई जा रही है कि आगरा का दवा बाजार अभी भी अवैध और नकली दवाओं के कारोबार का गढ़ बना हुआ है।

आगरा के दवा बाजार में हड़कंप, जांच एजेंसियों के रडार पर 60% दुकानदार

आगरा। फव्वारा स्थित आगरा का दवा बाजार, जो पूरे ब्रज क्षेत्र में दवाओं की आपूर्ति का एक बड़ा केंद्र है, अब शासन-प्रशासन की कड़ी निगरानी में आ गया है। हाल ही में ड्रग विभाग और एसटीएफ की छापेमारी के दौरान करीब 60 प्रतिशत दुकानदारों का दुकानें बंद करके गायब हो जाना यह साफ दर्शाता है कि यहां नकली और प्रतिबंधित दवाओं का कारोबार बड़े पैमाने पर हो सकता है। अब ऐसे सभी दुकानदारों की गहन जांच का ऐलान कर दिया गया है। छापेमारी से फैली घबराहट अगस्त के अंतिम सप्ताह में जब ड्रग विभाग और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने फव्वारा दवा बाजार में छापा मारा, तो बाजार में हड़कंप मच गया। छापे की खबर मिलते ही लगभग 60 प्रतिशत दुकानदारों ने आनन-फानन में अपने शटर गिरा दिए और तीन से चार दिनों तक अपनी दुकानें नहीं खोलीं। जबकि कुछ व्यापारी बेखौफ होकर अपना कारोबार करते रहे। दुकानें बंद करने वाले ये सभी कारोबारी अब जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गए हैं। औषधि विभाग की विशेष सचिव रेखा एस. चौहान ने भी अपने आगरा दौरे पर यह साफ कर दिया कि जिन दुकानदारों ने छापेमारी के डर से दुकानें बंद की थीं, उन सभी की जांच होगी। उन्होंने कहा कि अगर कारोबार नियमों के तहत हो रहा था, तो डरने की कोई वजह नहीं थी। चार आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल इस मामले में अब तक हे मां मेडिको और बंसल मेडिकल स्टोर के संचालक समेत चार आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। यह घटना यह संकेत देती है कि नकली दवाओं का जाल सिर्फ कुछ दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पूरे बाजार में फैले हो सकते हैं। सूत्रों का मानना है कि छापेमारी के बाद कई कारोबारियों ने अपने गोदामों से नकली और अवैध दवाओं को हटाने की कोशिश की है। ताजगंज के नगला पैमा में दवाओं को जलाए जाने की हालिया घटना को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। शासन की गंभीरता को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

आगरा में ड्रग विभाग की रेड में ₹1 करोड़ की घूस: दवा कारोबारी हिमांशु अग्रवाल को एसटीएफ ने हिरासत में लिया

आगरा। आगरा के दवा बाजार में नकली दवाओं को लेकर चल रही ड्रग विभाग और एसटीएफ की छापेमारी के दौरान एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जांच के बीच ही एक दवा कारोबारी हिमांशु अग्रवाल अपनी दुकान पर एक करोड़ रुपए कैश लेकर पहुंचा और अफसरों से कहा कि ‘पूरा कैश रख लो और मामला रफा-दफा करो।’ अचानक एक करोड़ रुपए का कैश देखकर अधिकारी कुछ देर के लिए सन्न रह गए। एसटीएफ की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रिश्वत देने की कोशिश कर रहे दवा कारोबारी हिमांशु अग्रवाल को मौके से हिरासत में ले लिया और उसे कोतवाली ले जाया गया। नकली दवाओं की शिकायत पर हुई थी छापेमारी यह पूरी कार्रवाई सनौफी नाम की एक दवा कंपनी की शिकायत पर शुरू हुई थी। कंपनी ने शिकायत की थी कि आगरा के मुबारक महल स्थित हेमा मेडिकल स्टोर और गोगिया मार्केट स्थित बंसल मेडिकल एजेंसी में उनके ब्रांड की नकली दवाएं बेची जा रही हैं। इसी शिकायत के आधार पर शुक्रवार को कानपुर और बस्ती मंडल के ड्रग विभाग की टीमों ने एसटीएफ के साथ मिलकर दोनों दुकानों और उनके गोदामों पर छापा मारा। शुक्रवार को देर रात होने के कारण टीमों ने दुकानों और गोदामों को सील कर दिया और शनिवार को फिर से जांच शुरू की। करोड़ों की दवाइयां बरामद, इनकम टैक्स को सूचना जांच के दौरान हेमा मेडिकल स्टोर से करीब साढ़े तीन करोड़ की दवाएं बरामद हुईं, जिन्हें ट्रक में भरकर कोतवाली ले जाया गया। इसी तरह, बंसल मेडिकल एजेंसी के गोदाम से भी एक करोड़ रुपए की दवाइयां बरामद की गईं, जो रेलवे के जरिए चेन्नई से लखनऊ के पते पर आ रही थीं, लेकिन आगरा में उतारी जा रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों फर्मों से कुल 3.23 करोड़ रुपए की दवाइयां बरामद हुई हैं। बरामद की गई दवाइयों में जायडस, ग्लेनमार्क और सन फार्मा जैसी कई नामी कंपनियों के ब्रांड मिले हैं, जिनके प्रतिनिधि इसे नकली बता रहे हैं। ड्रग विभाग ने 15 दवाइयों के नमूने जांच के लिए भेजे हैं। बाजार में सन्नाटा और दहशत का माहौल छापेमारी के बाद से पूरे दवा बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार और शनिवार को अधिकांश दुकानें बंद रहीं, और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। हिमांशु अग्रवाल से बरामद किए गए नोटों की गिनती के लिए मशीनें मंगवाई गईं और देर रात तक गिनती जारी रही। पुलिस ने इस मामले की जानकारी आयकर विभाग और विजिलेंस को भी दे दी है, जिसके बाद इस पूरे मामले में और भी खुलासे होने की उम्मीद है।

आगरा में यूरिया के ‘दुरुपयोग’ पर बड़ी कार्रवाई: 10 औद्योगिक इकाइयों पर छापा, 400 विक्रेताओं को नोटिस; सैंपलों की जांच जारी

आगरा। आगरा में फसलों के लिए प्रयोग होने वाले यूरिया के दुरुपयोग की आशंका पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला प्रशासन ने 10 औद्योगिक इकाइयों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह आशंका जताई गई थी कि पेंट, केमिकल, बायोफ्यूल और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में सब्सिडी वाले यूरिया का अवैध रूप से प्रयोग किया जा रहा है। टीम ने छापेमारी के दौरान सभी 10 औद्योगिक इकाइयों से एक-एक सैंपल भी कलेक्ट किया है, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। इसके अतिरिक्त, प्रशासन ने 400 यूरिया विक्रेताओं को नोटिस जारी कर उनकी बिक्री का विस्तृत ब्योरा तलब किया है। डीएम द्वारा गठित टीमों ने की छापेमारी यह कार्रवाई जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी द्वारा गठित टीमों ने यूरिया के दुरुपयोग की आशंका पर की है। जिन प्रमुख इकाइयों पर छापेमारी की गई, वे निम्न हैं: यूरिया के दुरुपयोग की शिकायतें मिली थीं डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बताया कि यूरिया एक सब्सिडी वाला उत्पाद है, जिसे सरकार मुख्य रूप से किसानों के लिए खरीदती है। ऐसी शिकायतें लगातार शासन तक पहुँच रही थीं कि कुछ औद्योगिक इकाइयाँ अपने उत्पादों में नाइट्रोजिनस कंपाउंड या फार्मेल्डिहाइड के स्थान पर किसानों को वितरित किए जाने वाले यूरिया का प्रयोग कर रही हैं। इन शिकायतों के मद्देनजर, डीएम ने ऐसी औद्योगिक इकाइयों की जांच के लिए तीन विशेष टीमें गठित की हैं, जिनमें यूरिया में मिलने वाले केमिकल का प्रयोग होता है। सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। और खबरें भी हैं…

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