
आगरा। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने बीते हफ्ते में हजारों बैंक धारकों के खाते अचानक फ्रीज कर दिए हैं। बैंक से खाता फ्रीज होने का मैसेज आने के बाद से ग्राहक परेशान हैं और अपना खाता फिर से चालू कराने के लिए एक ब्रांच से दूसरे ब्रांच के चक्कर काट रहे हैं। बैंक कर्मियों की लापरवाही और बड़े अधिकारियों की अनदेखी से ग्राहकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
एक ग्राहक का दर्द: ‘बस तारीख पर तारीख मिल रही है’
एक ग्राहक, जिसने 2015 में PNB की राजा मंडी ब्रांच में अपना खाता खोला था और बाद में उसे शाहगंज ब्रांच में ट्रांसफर करा लिया था, उसने अपनी आपबीती सुनाई। 21 अगस्त को उनके पास खाता फ्रीज होने का मैसेज आया। अगले दिन, वह फतेहबाद ब्रांच गए, जहां उनसे KYC के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो के साथ फॉर्म जमा करने को कहा गया। फॉर्म जमा करने के बाद, उन्हें आश्वासन दिया गया कि खाता जल्द ही चालू हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
अगले दिन जब वह दोबारा गए तो उन्हें टाल दिया गया। तीसरी बार जाने पर उन्हें बताया गया कि उनका खाता शाहगंज ब्रांच से ही चालू होगा। कई दिनों तक परेशान होने के बाद जब वह शाहगंज ब्रांच पहुंचे, तो वहां भी उन्हें एक काउंटर से दूसरे काउंटर पर घुमाया गया। अंत में, एक वरिष्ठ कर्मचारी ने बताया कि खाता शाहगंज का है, लेकिन कस्टमर आईडी राजा मंडी ब्रांच की है, इसलिए उन्हें वहीं जाना होगा।
ग्राहक जब राजा मंडी ब्रांच पहुंचे तो वहां भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। एक महिला कर्मचारी ने केवल यह कहकर टाल दिया कि “फॉर्म छोड़ जाओ, हो जाएगा।” ग्राहक ने जब अपनी परेशानी बताई तो उनसे बहस की गई। आखिर में ब्रांच हेड मैनेजर ने हस्तक्षेप किया और कहा कि उनका काम शाहगंज से ही होगा। जब ग्राहक फिर से शाहगंज ब्रांच पहुंचे और बताया कि उन्हें राजा मंडी ब्रांच हेड ने भेजा है, तो वहां के कर्मचारियों ने आपस में यह कहकर बात की कि “इन्हें फिर से यहां भेज दिया।”
इस तरह, ग्राहक को बस एक ब्रांच से दूसरे ब्रांच घुमाया जा रहा है, और उनका काम नहीं हो रहा है। थक हारकर ग्राहक को अब रीजनल हेड से मिलने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों में बड़े अधिकारियों के हस्तक्षेप से ही समाधान निकलता है।
लापरवाही का खामियाजा: निजी बैंकों की ओर बढ़ रहे ग्राहक
ग्राहक ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंकों में कोई जवाबदेही नहीं है। लाखों रुपए की सैलरी लेने वाले कर्मचारी काम को टालने में लगे रहते हैं, और रीजनल और जोनल स्तर के बड़े अधिकारी भी ग्राहकों की समस्या पर ध्यान नहीं देते। इन सब कारणों से ग्राहक सरकारी बैंकों से निराश होकर निजी बैंकों की ओर रुख कर रहे हैं। ग्राहक ने कहा कि जब किसी इंसान के पैसे खाते में फंसे हों और वह उधार लेकर शर्मिंदा हो रहा हो, तो उसकी परेशानी किसी को नहीं दिखती। सरकारी खर्च पर चलने वाले इन अधिकारियों को ग्राहकों की चिंता नहीं है।