
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में अब बेसमेंट में कोई भी अस्पताल, क्लीनिक या डे-केयर सेंटर संचालित नहीं हो सकेगा। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने मंगलवार को इस संबंध में सख्त आदेश जारी किए हैं। उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि बेसमेंट में ऑपरेशन थिएटर (OT), आईसीयू या वार्ड का संचालन नहीं होगा। यदि कहीं भी मरीज बेसमेंट में भर्ती मिले तो संबंधित चिकित्सक और अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अरुण श्रीवास्तव को 15 दिन के भीतर बेसमेंट में चल रहे सभी चिकित्सा संस्थानों की सर्वे रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। जिले में लगभग 1300 चिकित्सा संस्थान पंजीकृत हैं, जिनमें से 2025-26 के लिए अभी तक करीब 700 का पंजीकरण हुआ है।
अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर भी सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी ने अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर्स पर भी लगाम कसने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सीएमओ को आदेश दिया है कि मुखबिरों के माध्यम से लिंग परीक्षण करने वालों को चिह्नित किया जाए। इसके साथ ही, सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर चिकित्सकों की बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य की जाएगी।
डीएम ने बेसमेंट में चल रहे अस्पतालों के साथ-साथ अल्ट्रासाउंड सेंटर्स की जांच के लिए अपर नगर मजिस्ट्रेट और पीसीपीएनडीटी नोडल अधिकारी की एक विशेष टीम भी बनाई है। यह टीम सेंटर्स की जियो-टैगिंग और फोटोग्राफी सहित विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। सीएमओ डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि शहर में लगभग 300 अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं, जिनकी मशीनों से लेकर चिकित्सकों की जांच कर रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
बैठक में तीन नए अल्ट्रासाउंड सेंटरों के आवेदन स्वीकार किए गए, जबकि आठ के नवीनीकरण की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, डीएम ने उन सेंटरों की सील की हुई मशीनों की भी जांच के आदेश दिए हैं जिनके आवेदन निरस्त हो चुके हैं। पिछले एक साल में 50 से अधिक अस्पतालों की जांच की गई है और अवैध संचालकों के खिलाफ कई केस दर्ज किए गए हैं।