
देवरिया/सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश में एक ऐसा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जो ‘भैंस समेत खोया’ जैसी पुरानी कहावतों को भी पीछे छोड़ देगा! देवरिया पीडब्ल्यूडी (PWD) के कुछ अफसरों और कर्मचारियों ने मिलकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के महज 5 घंटे के एक कार्यक्रम को 3 दिन का दिखाकर, और 34 फर्जी सप्लाई ऑर्डर बैकडेट में चढ़ाकर, 76 लाख रुपए के वास्तविक काम के बदले 4.27 करोड़ रुपए का भुगतान कराने की कोशिश की। इस पूरे ‘खेल’ का पर्दाफाश एक ‘बाबू’ ने किया, जिसने ईमानदारी की मिसाल कायम की।
क्या है पूरा ‘खेला’? 5 घंटे के इवेंट पर 4.27 करोड़ का ‘बिल’
यह मामला लगभग 3 साल 10 महीने पुराना है। 17 अक्टूबर, 2021 को कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने देवरिया में एक कृषि मेला आयोजित किया था, जिसमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्य अतिथि थे। यह कार्यक्रम केवल 5 घंटे चला था।
लेकिन, उपमुख्यमंत्री का कार्यक्रम जारी होते ही, पीडब्ल्यूडी ने 9 सप्लाई ऑर्डर निकालकर 76 लाख रुपए के आपूर्ति कार्य का दावा किया। चौंकाने वाली बात यह है कि जो एस्टीमेट बनाया गया, उसमें एक दिन के कार्यक्रम को 3 दिन का दिखाकर, कई मदों में मनमाने ढंग से पैसा बढ़ाया गया। इस तरह, कुल टैक्स जोड़कर यह राशि 4.27 करोड़ रुपए हो गई, जिसकी डिमांड सीधे शासन को भेज दी गई।
कैसे खुला ये ‘काला चिट्ठा’? एक ‘बाबू’ ने ऐसे उड़ाई गर्दा!
इस पूरे घोटाले का खुलासा तब हुआ जब सर्किल के एक बाबू ने डिस्पैच रजिस्टर में 34 फर्जी आपूर्ति ऑर्डरों को अलग-अलग पुरानी तारीखों में चढ़ा दिया। स्थानीय ठेकेदारों को जब इसकी भनक लगी, तो उन्होंने एसई जैनूराम से शिकायत की। एसई ने एक्सईएन अनिल जाटव से 76 लाख रुपए के वास्तविक कार्य के भुगतान की जानकारी मांगी।
जब एक्सईएन जाटव ने आपूर्ति पत्र पर पूर्व एक्सईएन कमल किशोर सोनकर के साइन देखे, तो उन्हें शक हुआ। जाटव ने 1 मई, 2024 को सिद्धार्थनगर में तैनात सोनकर को हस्ताक्षर सत्यापन के लिए पत्र लिखा। 19 दिन बाद सोनकर ने अपने हस्ताक्षरों को फर्जी बताया, जिसके बाद इस पूरे मामले में एक-एक कर परतें खुलती चली गईं।
कौन-कौन है इस ‘भ्रष्टाचार की दावत’ में शामिल?
एक प्रमुख अख़बार की निजी जांच के अनुसार, इस गड़बड़ी में कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं:
- तत्कालीन एक्सईएन कमल किशोर सोनकर: एस्टीमेट पर इनके हस्ताक्षर हैं, हालांकि अब ये इन्हें फर्जी बता रहे हैं।
- सेवानिवृत्त एई संजय राय: एस्टीमेट पर इनके भी हस्ताक्षर मिले हैं।
- जेई अनूप सिंह: इनके भी हस्ताक्षर एस्टीमेट पर हैं।
- जेई साहेब हुसैन (मुख्य आरोपी): हिडेन कैमरे पर कुछ बाबुओं ने इन्हें इस ‘खेल’ का मास्टरमाइंड बताया। 4.27 करोड़ रुपए का एस्टीमेट इन्होंने ही बनाया था।
- बाबू मोहन वर्मा, जयराम प्रजापति, अनिल सिंह और बाबू उपेंद्र कुमार: बजट पास कराने और बैकडेटिंग में इनकी भूमिका सामने आई है।
- वर्तमान एक्सईएन अनिल जाटव: उन पर भी इस गड़बड़ी की आंच आई है। जेई साहेब हुसैन ने दावा किया है कि उन पर और तत्कालीन एक्सईएन सोनकर का पैसा निकालने का दबाव था।
हिडेन कैमरे पर कुछ बाबुओं ने साहेब हुसैन को इस पूरे खेल का मुख्य खिलाड़ी बताया। एक बाबू उपेंद्र ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने जेईटी आरके सिंह के कहने पर बैकडेट में 34 सप्लाई ऑर्डर के कागज चढ़ाए।
एक प्रमुख अख़बार की निजी जांच टीम ने इस खेल के मास्टरमाइंड साहेब हुसैन से बात करने की कई बार कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया और न ही मुलाकात की। उनकी तलाश में टीम उनके सरकारी आवास भी पहुंची, लेकिन वहां ताला बंद मिला।
जेई हुसैन का ‘बड़ा बयान’: एक्सईएन के दबाव में बनाया ‘फर्जी’ बजट!
लगातार दो दिनों तक संपर्क करने के बाद, तीसरे दिन एक्सईएन अनिल जाटव के कहने पर जेई साहेब हुसैन ने बात की। जब उनसे पूछा गया कि किसके कहने पर एक दिन के कार्यक्रम को तीन दिन का दिखाया गया, तो उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया– तत्कालीन एक्सईएन कमल किशोर सोनकर के दबाव में ऐसा किया गया। जेई हुसैन ने इस खेल में मुख्य भूमिका बाबू मोहन वर्मा की बताई, और कहा कि उन्हें कागज बनाने के लिए वर्तमान एक्सईएन अनिल जाटव या तत्कालीन एक्सईएन सोनकर ने कहा होगा।
जेई साहेब हुसैन के इस खुलासे के बाद एक प्रमुख अख़बार की निजी जांच टीम देवरिया से सिद्धार्थनगर पहुंची, जहां एक्सईएन कमल किशोर सोनकर तैनात थे। इनके हस्ताक्षर से ही 4.27 करोड़ रुपए का बिल बना था। टीम ने सोनकर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कैमरे पर कोई बयान देने से इनकार कर दिया।
यह मामला यूपी में सरकारी विभागों में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार की एक और कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस बड़े घोटाले में शामिल सभी दोषियों पर क्या और कितनी सख्त कार्रवाई करती है।