
आगरा। इस रक्षाबंधन पर भले ही लोग सोने और चांदी की राखियां खरीद रहे हों, लेकिन आगरा में नगर निगम की गौशाला में बनी राखियां लोगों के बीच खूब चर्चा बटोर रही हैं और पसंद भी की जा रही हैं! ये अनोखी राखियां गाय के गोबर से तैयार की गई हैं और पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली हैं। हाउस टैक्स या अन्य काम के लिए निगम परिसर आ रहे लोग इन राखियों को खरीद भी रहे हैं।
फेंकने पर उगेगा तुलसी का पौधा: पर्यावरण को मिलेगा ‘सकारात्मक’ रूप
नगर निगम आगरा अपनी गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार नए-नए उत्पाद तैयार कर रहा है। दीपावली पर ईको-फ्रेंडली लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और होली पर गोकाष्ठ (गोबर की लकड़ी) तैयार की जाती है। इसी कड़ी में इस बार रक्षाबंधन के लिए गाय के गोबर से बनी राखियां नगर निगम परिसर में उपलब्ध कराई गई हैं।
स्टॉल संचालक प्रांकुर जैन ने बताया कि इन राखियों को बनाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को सकारात्मक रूप देना है। इन राखियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें तुलसी का बीज डाला गया है। राखी का त्योहार खत्म होने के बाद जब इसे फेंका जाएगा या गमले में डाला जाएगा, तो इससे तुलसी का पौधा उग आएगा! यह वाकई एक अभिनव और पर्यावरण-हितैषी पहल है।
रंग-बिरंगी राखियां और ‘सीड बॉल’ भी उपलब्ध
प्रांकुर जैन ने बताया कि लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए रंग-बिरंगी राखियां बनाई जा रही हैं, जो मात्र ₹15 से ₹20 में नगर निगम परिसर स्थित दुकान पर उपलब्ध हैं।
इसके अलावा, नगर निगम ने कई अन्य ईको-फ्रेंडली उत्पाद भी तैयार किए हैं। इनमें सीड बॉल भी शामिल हैं, जिनमें सहजन, जामुन और नीम के बीज डाले गए हैं। इन सीड बॉल को मानसून में सड़क किनारे, पार्क या नमी वाली जगह पर फेंकने से पौधे उग आएंगे, जिससे हरियाली बढ़ेगी।
यह पहल न केवल गौशालाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रही है। इस रक्षाबंधन पर आप भी इन अनोखी राखियों को अपनाकर प्रकृति के प्रति अपना प्यार दिखा सकते हैं।