11 फ्लॉप फिल्मों के बाद ‘बेरोजगार’ हुए अमिताभ बच्चन, ‘जंजीर’ मिलते ही पूछा- ‘क्या मैं कर पाऊंगा?’, जावेद अख्तर बोले- ‘आपसे बेहतर कोई नहीं’

मुंबई। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के करियर की शुरुआत में लगातार कई फिल्में फ्लॉप रहीं, जिसके चलते वह लगभग बेरोजगार हो गए थे। फिर फिल्म ‘जंजीर’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बनी, जिसने उन्हें ‘एंग्री यंग मैन’ का खिताब दिया और हिंदी सिनेमा के शिखर पर पहुंचाया।


जावेद अख्तर ने किया खुलासा: ‘वो एक ज्वालामुखी थे’

हाल ही में ‘हुक ग्लोबल’ को दिए एक इंटरव्यू में प्रसिद्ध पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने ‘जंजीर’ से जुड़े कई राज खोले। उन्होंने बताया कि सलीम-जावेद की जोड़ी अमिताभ बच्चन को ‘एंग्री यंग मैन’ बनाने का श्रेय नहीं ले सकती, लेकिन उन्हें ‘जंजीर’ के लिए बच्चन को लेने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था, क्योंकि उस वक्त उन्हें व्यावसायिक तौर पर कमजोर माना जाता था।

जावेद अख्तर ने कहा, “बहुत कम लोग थे जो उनका (अमिताभ का) बहुत सम्मान करते थे, तब भी जब उनकी लगातार 11 फिल्में फ्लॉप हो गई थीं, जैसे जया (जो उस समय उनकी पत्नी नहीं थीं)। जया जानती थीं कि अमिताभ क्या कर सकते हैं। उन्हें उनके टैलेंट पर पूरा भरोसा था। ऋषिकेश मुखर्जी को भी अमिताभ के टैलेंट पर बहुत भरोसा था, इसलिए वो उन्हें बार-बार काम देते रहे।”

अख्तर ने आगे कहा, “हमने उन्हें एक फ्लॉप फिल्म में देखा था, लेकिन हमें दिखा कि यह एक ज्वालामुखी है, जो कभी भी फट सकता है। वह अपनी सबसे खराब फिल्मों में भी बहुत अच्छे थे। फिल्म खराब थी, स्क्रिप्ट खराब थी, डायलॉग और स्क्रीनप्ले भी कमजोर था, लेकिन उनका काम शानदार था। हमें पूरा विश्वास था कि यह एक बड़ा सितारा है जिसे बस सही मौके की तलाश थी।”


‘परवाना’ की ‘आंखों की आग’ ने बनाया ‘विजय’

जावेद अख्तर ने बताया कि उस वक्त अमिताभ बच्चन डॉक्टर, शायर जैसे सौम्य किरदार निभा रहे थे, लेकिन फिल्म ‘परवाना’ में उन्होंने एक डार्क किरदार निभाया था। एक सीन में जब वह ओमप्रकाश पर गुस्सा करते हैं, तो उनकी आंखों में जो आग थी, वह उन्हें चौंका गई। उस इंटेंसिटी को देख वह समझ गए कि वही ‘जंजीर’ के असली ‘विजय’ हैं।

‘जंजीर’ की स्क्रिप्ट सुनाने का किस्सा बताते हुए जावेद ने बताया, “मुझे पूरा भरोसा था कि इस रोल को उनसे बेहतर कोई नहीं कर सकता। हम बस एक बार ही मिले थे। मैंने उन्हें कॉल किया और कहा- ‘एक स्क्रिप्ट है, मिलकर सुनाना चाहता हूं।’ वह तुरंत तैयार हो गए क्योंकि उनके पास काम नहीं था। मैंने पूरी स्क्रिप्ट सुनाई। वह मुझे हैरानी से देखने लगे और बोले- ‘क्या आपको लगता है मैं ये रोल निभा सकता हूं?‘ मैंने कहा- ‘इस देश में आपसे बेहतर कोई ये नहीं कर सकता।‘”

‘जंजीर’ (1973) को प्रकाश मेहरा ने निर्देशित और निर्मित किया था। फिल्म की कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी। यह फिल्म अमिताभ बच्चन के करियर की बड़ी हिट साबित हुई। इसके बाद सलीम-जावेद ने ‘दीवार’ और ‘शोले’ जैसी फिल्में लिखीं, जिनमें अमिताभ नजर आए और वह हिंदी सिनेमा के बड़े स्टार बने।

admin

Related Posts

‘आठवाँ सुर’: ब्रज की धरती पर गूंजेगा नई मीरा का प्रेम गीत, पोस्टर हुआ लॉन्च

प्रकाशित: शाम 06:30 बजे, 26 जुलाई 2025 | स्थान: आगरा आगरा। संगीत की दुनिया में सात सुरों का महत्व सर्वविदित है, लेकिन जब प्रेम और भक्ति का संगम हो, तो…

‘जेठालाल’ गायब तो क्या हुआ? दिलीप जोशी ने नहीं छोड़ा ‘तारक मेहता…’, असित मोदी ने बताया ‘राज़’!

टीवी के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ को लेकर हाल ही में एक बड़ी अफवाह उड़ी कि क्या ‘जेठालाल’ यानी दिलीप जोशी और ‘बबीता जी’ यानी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *