
आगरा। भारत के महान क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह का आगरा से गहरा और ऐतिहासिक संबंध रहा है। इतिहासकार बताते हैं कि उन्होंने अपने फरारी काल का लगभग एक साल आगरा में बिताया था। इस दौरान वह नूरी गेट स्थित छन्नामल की हवेली में 5 रुपये महीने के किराएदार के रूप में रहे और यहीं से उन्होंने केंद्रीय असेंबली में बम फेंकने की योजना बनाई थी। इतना ही नहीं, अपनी पहचान छिपाने के लिए वह आगरा कॉलेज, आगरा में एक छात्र बनकर भी रहे।
आगरा कॉलेज में छात्र बन फैलाई क्रांति की अलख
आगरा कॉलेज, आगरा के प्रोफेसर अनुराग पालीवाल ने बताया कि जब भगत सिंह आगरा आए, तब तक वह देश के बड़े आंदोलनकारियों में शुमार हो चुके थे। नूरी गेट पर एक किराएदार के रूप में वह अपना पूरा समय एक कमरे में नहीं बिता सकते थे। इसलिए उन्होंने आगरा कॉलेज, आगरा में प्रवेश लिया और एक छात्र के रूप में अपनी पहचान छिपाकर रहे।
प्रो. पालीवाल ने आगे बताया कि जब उनका आगरा से जाने का समय आया, तो उन्होंने अपनी असली पहचान उजागर की। उन्होंने कॉलेज की छत (गम्मत) पर चढ़कर भारत का तिरंगा फहराया और उसके बाद अपना परिचय दिया। इस घटना ने आगरा में छात्र क्रांति आंदोलन को नई हवा दी। इसके बाद वह आगरा से चले गए।

असेंबली बम: बहरों को जगाने का प्रयास, आगरा से भी मिला सहयोग
आंदोलन सलाहकार प्रोफेसर विश्वकांत ने बताया कि भगत सिंह ने आगरा कॉलेज में क्रांति की अलख जगाई और आगरा में छात्र आंदोलन को तेज़ किया। वह कहीं न कहीं प्रेरणा के स्रोत रहे हैं।
प्रो. विश्वकांत ने स्पष्ट किया कि असेंबली में जो बम फोड़ा गया था, उसका उद्देश्य किसी को शारीरिक हानि पहुँचाना नहीं था। “लेकिन जो देश में बहरे बैठे थे, उन्हें जगाना था।” इस घटना के बाद आगरा ने भी क्रांति में एक अलग रूप में अपना सहयोग दिया और आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भगत सिंह का आगरा में बिताया गया समय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण अध्याय का हिस्सा बन गया।