एसएन मेडिकल कॉलेज में पीजी छात्रों का बीएलएस-एसीएलएस प्रशिक्षण सफल

आगरा, उत्तर प्रदेश: एसएन मेडिकल कॉलेज के अत्याधुनिक एनईएलएस स्किल सेंटर ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह कार्यक्रम पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) छात्रों के लिए बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) और एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट (ACLS) प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाता है।

यह गहन प्रशिक्षण सत्र एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. (प्रो.) प्रशांत गुप्ता के मार्गदर्शन और कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ। इसमें कुल 50 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को आपातकालीन स्थितियों में जीवन बचाने की महत्वपूर्ण तकनीकें सिखाई गईं। इस प्रशिक्षण को सफल बनाने में मेडिकल कॉलेज के कई अनुभवी और समर्पित रिसोर्स फैकल्टी का योगदान रहा, जिनमें डॉ. अर्चना अग्रवाल, डॉ. योगिता द्विवेदी, डॉ. अनुभव गोयल, डॉ. अर्पिता सक्सेना, डॉ. राजीव पुरी, डॉ. चंद्र प्रकाश, डॉ. सूर्यकमल वर्मा, डॉ. सुप्रिया, डॉ. दीपिका और डॉ. अंकिता शामिल हैं। इस बीएलएस-एसीएलएस प्रमाणन के लिए यूपीएमसीआई (UPMCI) द्वारा 6 क्रेडिट आवर्स भी स्वीकृत किए गए हैं, जो इस प्रशिक्षण के महत्व को और बढ़ाता है।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने स्वयं किया। उन्होंने अपने संबोधन में बीएलएस और एसीएलएस दोनों के महत्व पर जोर दिया, यह बताते हुए कि ये जीवन रक्षक तकनीकें आपातकालीन स्थितियों में कितनी आवश्यक हैं। उप प्राचार्य डॉ. टी पी सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहे, जो कार्यक्रम की गंभीरता और प्रासंगिकता को दर्शाता है।

बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS)

बीएलएस में वे आवश्यक तकनीकें शामिल हैं जो किसी व्यक्ति की जान बचाने में मदद कर सकती हैं, खासकर जब उनकी सांस या दिल अचानक काम करना बंद कर दे। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रक्रियाएँ शामिल हैं:

  1. कार्डियक अरेस्ट की पहचान: दिल के दौरे के तुरंत लक्षणों को पहचानना, ताकि बिना किसी देरी के आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
  2. सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन): यह छाती पर दबाव डालने और बचाव साँसें देने की एक विधि है, जो हृदय और फेफड़ों के कार्य को बनाए रखने में मदद करती है जब तक कि उचित चिकित्सा सहायता न मिल जाए।
  3. स्वचालित बाहरी डिफिब्रिलेटर (AED) का उपयोग: यह एक पोर्टेबल चिकित्सा उपकरण है जो हृदय को सामान्य गति में लाने के लिए नियंत्रित विद्युत झटका देता है, खासकर जब हृदय की लय असामान्य हो जाती है।

एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS)

एएलएस में बीएलएस की तकनीकों के अलावा, और भी उन्नत और विशिष्ट जीवन रक्षक प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इसका उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा देखभाल को अगले स्तर तक ले जाना है, ताकि गंभीर स्थितियों में मरीज को अधिक प्रभावी ढंग से स्थिर किया जा सके। इसमें शामिल मुख्य तकनीकें हैं:

  1. एडवांस्ड एयरवे मैनेजमेंट: यह श्वासनली में विशेष ट्यूब डालकर वायुमार्ग को सुरक्षित करने की एक उन्नत विधि है, जिससे मरीज को पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
  2. इंट्रावेनस दवाएं: नसों के माध्यम से सीधे दवाएं देना, जो हृदय और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के कार्य को समर्थन देती हैं और गंभीर आपात स्थितियों में मरीज की स्थिति को स्थिर करती हैं।
  3. कार्डियक रिदम मॉनिटरिंग और मैनेजमेंट: हृदय की लय की लगातार निगरानी करना और आवश्यकतानुसार उपचार करना, जिसमें डिफिब्रिलेशन (एक और तरह का विद्युत झटका) या पेसिंग (हृदय गति को नियंत्रित करना) जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।

इन दोनों तकनीकों का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य व्यक्ति की जान बचाना और उनके स्वास्थ्य को स्थिर करना है, जब तक कि उन्हें अस्पताल में आगे के विस्तृत और विशेषज्ञ इलाज के लिए नहीं पहुंचा दिया जाता। यह प्रशिक्षण सुनिश्चित करता है कि एसएन मेडिकल कॉलेज के स्नातकोत्तर विद्यार्थी किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने और रोगियों को जीवन दान देने के लिए पूरी तरह से तैयार रहें।

Pawan Singh

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