
13 नवंबर 2024, आगरा।
हलवाई बोले:
कुछ ब्लैकमेलिंग मानसिकता के लोग और खराब मानसिकता के अधिकारी,हमारे व्यवसाय को खराब कर रहे हैं।
भय के वातावरण में व्यापार करने को मजबूर।
डीएम के आश्वासन के बाद हलवाईयों ने अपनी दुकानें खोली
डीएम ने कहा बिना वजह किसी का उत्पीड़न नहीं होने देंगे
सूत्रों की मानें तो विगत दिवस श्री दाऊ जी मिष्ठान भंडार से एक अधिकारी और वकील द्वारा जबरन सैंपल लेने की कोशिश की गई। इस घटना से सभी हलवाइयों का धैर्य जवाब दे गया। आजकल सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे वीडियो देखने को मिल जाते हैं की किसी खाद्य सामग्री में कुछ गडबड निकल गयी है, कोई कीड़ा निकल आया या फिर सामग्री खराब है, इस प्रकार की वाइरल वीडियो से हलवाइयों का व्यापार बहुत बुरी तरह से प्रभावित होता है। एक तरफ उनकी साख घटती हैं तो दूसरी तरफ उनके ग्राहक भी उन्हें संदेह की निगाह से देखते हुए दूर हो जाते हैं।
सूत्र बताते हैं कि खाद्य विभाग मे ज़बरदस्त महीनेदारी वसूली जाती है। इसमें जीप ड्राइवर से लेकर ऑफिस के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक दुकान दुकान से महीनेदारी इकट्ठे करते हैं और यह बहुत ही सिस्टेमैटिकली होता है। कोई भी।दुकानदार बिना इनको पैसा दिए बगैर काम नहीं कर सकता। सूत्र आगे बताते हैं कि अगर कभी संपलिंग भी की जाती है तो उसके लिए अलग से पैसे लिए जाते हैं। एक सूत्र ने तो यहाँ तक दावा किया कि अतिरिक्त पैसे लेकर सैंपल की रिपोर्ट ठीक आ जाती है।
परंतु यह भी सत्य है कि अपने व्यापार में अधिक लाभ कमाने की नीयत से अक्सर।खराब खाद्य सामग्री भी ग्राहकों को बेच दी जाती है। विशेषकर त्योहारों पर अधिक बिक्री होने के कारण पहले से ही मिठाइयों को बनाया जाता है ताकि उस खास दिन उसकी बिक्री ठीक तरह से हो सके। दूसरी तरफ बल्क ऑर्डर में मिठाई खरीदने वाले प्रतिष्ठान भी कम दोषी नहीं होते क्योंकि एक तरफ वह कम दाम पर।मिठाई की मांग करते हैं और उसे समय से पहलेअपने प्रतिष्ठान में रख लेते हैं। अक्सर ऐसी ही मिठाइयों का वितरण होता है और कर्मचारी उन्हें अपने घर ले जाते हैं। कोई कोई साहसिक व्यक्ति सामने आता है और वह प्रतिष्ठान को अपनी शिकायत दर्ज भी कराता है।
आम ग्राहक क्या कहता है
ताज न्यूज को ग्राहकों ने बातचीत मे कहा की पूरे साल चुप रहने वाले विभाग खास मौकों पर ही जागते है, उनकी छुपी ऐसे ही नहीं होती, अधिकारियों के यहाँ डिब्बों मे यही कर्मचारी मिठाई पहुचाते है। मगर हलवाई से इतनी महंगी मिठाई खरीदने के बाद हमे स्वकच्छता और गुनवत्ता का भरोसा तो मिलन ही चाहिए।
कुछ दिन पूर्व विवादों से सदैव नाता रखने वाले एक अस्पताल ने श्री मोर मुकुट हलवाई से बल्क ऑर्डर में दिवाली के लिए मिठाई खरीदी थी और उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी।अखबारों और सोशल मीडिया में खबर आने के बाद इस मामले पर स्थानीय प्रशासन सचेत हुआ और उन्होंने कार्यवाही की। इस कार्यवाही से सारे हलवाई लामबंद हो गए और उन्होंने।प्रशासन को अपना मांग पत्र सौंपने का निर्णय लिया।
आज सुबह से ही सभी हलवाइयों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और सुभाष पार्क पर इकट्ठा हो गए। वहाँ से एक जुलूस के रूप में निकल कर उन्होंने डीएम को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मुख्यमंत्री को संबोधित था जिसमें उन्होंने भय युक्त वातावरण में व्यापार करने की बात कही, यह भी कहा कि कुछ।असमाजिक तत्व और खराब मानसिकता के अधिकारी व्यापार का माहौल।बिगाड़ रहे हैं और इस वजह से वह और उनका परिवार असुरक्षित महसूस करता है।
मोटे तौर पर देखा जाए तो हलवाईयों की बात ठीक लगती है क्योंकि वह अपना व्यापार सुचारू रूप से चलाने के लिए सुविधाशुल्क के रूप में एक मोटी रकम का भुगतान भी करते हैं। एक बार यदि किसी दुकान पर छापा पड़ जाता है तो फिर उस दुकान के ब्रांड पर दाग लगना निश्चित हो जाता है। उसके व्यापार पर बहुत बड़ा फर्क आ जाता है। अक्सर करके असरदार लोग और दबंग अपनी दबंगई दिखाने के लिए हलवाइयों पर अनुचित दबाव भी बनाते हैं। हलवाइयों का सब्र आज जवाब दे गया और वह डीएम के पास अपनी फरियाद लेकर पहुँच गए। परंतु प्रश्न यह उठता है।कि क्या यह सब पहले से सबकी जानकारी में नहीं है?अगर जानकारी में है तो खाद्य विभाग के अधिकारी क्या कर रहे हैं?
अपने उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग तथा बदनाम करने की घटनाओं से आहत मिठाई विक्रेताओं ने आज अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। इसी दौरान डीएम को सीएम के नाम ज्ञापन भी दिया।
जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने मिठाई विक्रेताओं को भरोसा दिलाया है कि बेवजह उनका उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग किसी भी शिकायत पर कार्रवाई से पहले शिकायत की प्रामाणिकता परखेगा। डीएम से मिलने के बाद मिठाई विक्रेताओं ने अपने प्रतिष्ठान दोपहर बाद खोल दिए।
मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है, मुख्यमंत्री जी, हम आगरा के मिठाई विक्रेता भयमुक्त नहीं, भय युक्त वातावरण में हैं। व्यापार करना मुश्किल हो रहा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में सभी व्यापारी और उद्यमी भयमुक्त वातावरण में काम कर रहे हैं, लेकिन आगरा में इस वातावरण के विपरीत कुछ असामाजिक तत्व और खराब मानसिक मानसिकता के अधिकारी व्यापार को, खासकर मिठाई विक्रेताओं के बीच भय पैदा कर व्यापार को हानि पहुंचाने में लगे हुए हैं। मिठाई विक्रेताओं ने इसी के विरोध में 13 नवंबर को अपने प्रतिष्ठान भी बंद रखे हैं, क्योंकि ऐसे माहौल में वे व्यापार करने में असमर्थ हैं।
ज्ञापन में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है कि किसी भी मिठाई विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई से पहले नोटिस देकर उसका पक्ष सुना जाए। शिकायत की वैधता की जांच हो कि कहीं यह दुर्भावनावश तो नहीं कि गई है। बाल, मच्छर जैसी शिकायत पर सफाई की जांच होनी चाहिए न कि सैंपलिंग हो। सैंपलिंग उस मिठाई की ही ली जाए, जिसकी शिकायत सामने आई हो। फर्जी वीडियो डालने वालों पर भी सख्त कार्रवाई हो। मिठाई विक्रेताओं ने अनुरोध किया है कि उनके इन बिंदुओं पर भी ध्यान दें ताकि वह भी भयमुक्त वातावरण में व्यापार कर सकें।
मिठाई विक्रेताओं को ब्लैकमेलिंग और बदनाम किए जाने तथा खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से किये जा रहे कथित उत्पीड़न को लेकर आगरा स्वीट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने विगत दिवस आपात बैठक कर आज अपने प्रतिष्ठान बंद रखने का फैसला लिया था। इसी क्रम में आज सुबह से ही मिठाई के सभी बड़े ब्रांड के प्रतिष्ठान बंद रहे। मिठाई विक्रेताओं के इस आंदोलन को नेशनल चैंबर समेत अन्य व्यापारी संगठनों का भी समर्थन था।
मिठाई विक्रेता विरोध प्रदर्शन के लिए सुभाष पार्क पर एकत्रित हुए और वहां से अपने हाथों में बैनर लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे।
विरोध प्रदर्शन में आगरा स्वीट एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद गोयल, उपाध्यक्ष राजकुमार भगत, सचिव जय अग्रवाल, नैशनल चैम्बर के खाद्य प्रसंस्करण के चेयरमैन शिशिर भगत, नैशनल चैम्बर के उपाध्यक्ष अम्बा प्रसाद, कोषाध्यक्ष नीतेश अग्रवाल, व्यापार मंडल से जय पुरसनानी, फेडरेशन ऑफ उद्योग व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष हरेश अग्रवाल, अमित गोयल, राजेश अग्रवाल, रोहित मित्तल, संदीप अग्रवाल, अमित अग्रवाल, विकास अग्रवाल, संजू बंसल, पंकज अग्रवाल, रजत खण्डेलवाल, उमेश गुप्ता, प्रदीप भगत, राजेन्द्र गुप्ता, पवन गुप्ता, अशोक लालवानी आदि उपस्थित रहे।



