आगरा में आफत बनी बारिश: सपा सांसद रामजीलाल सुमन का धरना भीगा

आगरा। आगरा में सोमवार को हुई तेज बारिश ने लोगों को परेशान कर दिया, जिसका असर राजनीतिक कार्यक्रमों पर भी देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन केंद्र सरकार के खिलाफ गांधी स्मारक पर धरना देने पहुंचे थे, लेकिन तेज बारिश के चलते उन्हें अपने समर्थकों के साथ खुले में बैठने के बजाय गांधी स्मारक के हॉल में धरना देना पड़ा। सांसद और उनके करीब 250 समर्थक एक पोस्टर में वीर सावरकर की तस्वीर को महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह से ऊपर लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं। सांसद ने लगाए गंभीर आरोप रामजीलाल सुमन ने आरोप लगाया कि पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी पोस्टर में महात्मा गांधी से ऊपर किसी का फोटो लगाना “मानसिक विकृति” को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार आरएसएस (RSS) की तानाशाही नीतियों पर चल रही है। सांसद ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 10 सालों में 193 विपक्षी नेताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए, लेकिन सिर्फ 2 पर ही दोष सिद्ध हो पाया। उन्होंने कहा कि इसका सीधा मतलब है कि सरकार इन एजेंसियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ करती है।

आगरा में SDM को ‘शहीद का पाठ’ पढ़ाते दिखे सपा सांसद रामजीलाल सुमन

आगरा। अक्सर अपनी बेबाकी के लिए चर्चा में रहने वाले सपा सांसद रामजीलाल सुमन एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार वे आगरा के खेरागढ़ क्षेत्र में एक एसडीएम (उप जिलाधिकारी) की सरेआम क्लास लेते हुए दिखाई दिए हैं, जिसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। 22 सेकंड के इस वीडियो में राज्यसभा सदस्य सुमन एसडीएम को शहीद के सम्मान का महत्व समझाते नजर आ रहे हैं, जबकि एसडीएम भीड़ के सामने हाथ बांधे खड़े दिखाई दे रहे हैं। शहीद लाखन सिंह लोधी के सम्मान में देरी पर भड़के सांसद यह पूरा मामला तब सामने आया जब रविवार को सपा सांसद रामजीलाल सुमन आगरा के खेरागढ़ तहसील के खानपुर गांव में शहीद सार्जेंट लाखन सिंह लोधी के परिजनों से मिलने पहुंचे थे। परिजनों ने सांसद को बताया कि सार्जेंट लाखन सिंह लोधी की शहादत को लगभग डेढ़ महीना बीत चुका है, लेकिन उनके समाधि स्थल का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हुआ है। इसी जानकारी पर सांसद सुमन एसडीएम पर भड़क गए। रामजीलाल सुमन के साथ उनके आवास पर कुछ दिन पहले ही शहीद के परिजन पहुंचे थे, जहां उन्होंने बताया था कि लाखन सिंह लोधी पंजाब के जालंधर में सार्जेंट पद पर तैनात थे और उन्होंने भारतीय वायुसेना में 17 साल देश की सेवा की। 30 जून को हुई थी शहादत, प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप सार्जेंट लाखन सिंह लोधी की 30 जून को सेवारत रहते हुए मृत्यु हो गई थी। 2 जुलाई को उनके पैतृक गांव खानपुर में वायुसेना के अधिकारियों ने राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया था। हालांकि, उस दौरान स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी मौजूद नहीं थे। शहीद की प्रतिमा स्थापना और समाधि स्थल के निर्माण में स्थानीय प्रशासन की ओर से हो रही देरी से परिजनों में नाराजगी थी। इसी के बाद सांसद सुमन रविवार को खानपुर गांव पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले सार्जेंट के चित्र पर माल्यार्पण किया। फिर एसडीएम ऋषि राज से कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीद की प्रतिमा स्थापना में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा शासन और प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे बड़ा उदाहरण और कुछ नहीं हो सकता। “धरना देंगे अगर काम शुरू नहीं हुआ!” रामजीलाल सुमन ने एसडीएम को साफ चेतावनी दी कि समाधि स्थल का चयन प्रशासनिक अधिकारियों ने ही किया था, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “समयबद्ध रूप से समाधि स्थल के निर्माण का कार्य प्रारंभ करवाएं। नहीं तो वे यहीं पर धरना देंगे।” वायरल वीडियो में सांसद सुमन एसडीएम से कहते सुनाई दे रहे हैं, “नहीं तो हम यहीं पर भूख हड़ताल करेंगे। कितना महत्वपूर्ण मामला कि एक जवान की देश की खातिर जान चली गई, हम उसको सम्मान देने के लिए तैयार नहीं हैं।” इस पर एसडीएम ऋषि राज यह कहते हुए दिख रहे हैं, “सर, मैं पूरा प्रयास कर रहा हूं। अभी दो दिन पहले ही मिला हूं।” सांसद ने जवाब में कहा, “आपका इसका हल निकालिए। आपको हर कीमत पर यहां मूर्ति लगवानी है। इसके बाद यहां पार्क बनेगा। यह आपकी जिम्मेदारी है।” यह घटना शहीदों के प्रति सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही पर नए सिरे से बहस छेड़ सकती है।

आगरा में सपा सांसद रामजीलाल सुमन का ‘आक्रामक’ बयान: बोले- “जब तक दलित-पिछड़ों को हिंदू समाज का अंग नहीं समझेंगे, धर्म परिवर्तन नहीं रुकेगा!”

आगरा। आगरा में हालिया धर्मांतरण के खुलासे के बाद अब समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन का एक बेहद आक्रामक बयान सामने आया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि “जब तक हिंदू धर्म के जो ठेकेदार हैं, अपना मिजाज नहीं बदलेंगे, सोचने का तरीका नहीं बदलेंगे, दलितों-पिछड़ों को हिंदू समाज का अंग नहीं समझेंगे, तब तक धर्म परिवर्तन की संभावनाओं को कोई रोक नहीं सकता।” “असमानता के चलते हो रहा धर्मांतरण” सांसद रामजीलाल सुमन ने शनिवार को फिरोजाबाद में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि हिंदू धर्म में व्याप्त असमानता के चलते ही धर्म परिवर्तन हो रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक ऊंच-नीच का भेदभाव रहेगा, तब तक धर्म परिवर्तन होता रहेगा। उनके इस बयान के बाद जब दैनिक भास्कर ने उनके आवास पर इस मुद्दे पर बातचीत की, तो उन्होंने अपनी बात को और विस्तार दिया। “हमारे आचरण, व्यवहार और सोच से हुआ धर्म परिवर्तन” सपा सांसद का कहना है कि जो सनातन के मानने वाले लोग हैं, उन्होंने जब दलितों का मंदिर जाना रोक दिया, तो वे बजाय मंदिर के गुरुद्वारा-मस्जिद में चले गए। उन्होंने साफ कहा कि “कुल मिलाकर ये है कि धर्म परिवर्तन हमारे आचरण की वजह से हुआ…हमारे व्यवहार से हुआ, हमारे संस्कार और सोच से हुआ।” उन्होंने धर्मांतरण का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि हमने कुछ वर्गों को जानबूझकर अलग कर दिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष को मंदिर में नहीं जाने दिया गया, और उज्जैन में बीजेपी के एमएलए को मंदिर में नहीं जाने दिया गया। सांसद ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का भी उदाहरण दिया, कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री आवास छोड़ा तो उसे गंगाजल से साफ किया गया था। रामजीलाल सुमन के अनुसार, “ये सबका सीधा-सीधा मतलब ये है कि कुछ वर्गों को आपने जानबूझकर अलग कर रखा है।” “लालच नहीं, असमानता है धर्मांतरण की वजह” धर्मांतरण के मामले को नया न बताते हुए रामजीलाल सुमन ने तर्क दिया कि अगर धर्मांतरण किसी लालच में होता है या किसी अन्य वजह से होता है तो वे इसके विरोधी हैं। मगर, हमें असल वजह पर जाना होगा कि इस देश में धर्मांतरण क्यों होता है? उनका मानना है कि “देश में धर्मांतरण तब होता है, जब किसी मजहब या धर्म में समानता का भाव नहीं होता। तब लोग दूसरे रास्ते की तलाश करते हैं।” कुछ लोग हिंदू राष्ट्र बनाने की बात करते हैं, इस पर सांसद ने कहा कि इंडोनेशिया के बाद सबसे अधिक मुसलमान हमारे देश में रहते हैं। दलित, पिछड़े लोग हैं। उनका साफ कहना है कि “अगर समानता का व्यवहार नहीं करेंगे तो आप जो करना चाहते हैं, वह नहीं होगा।”

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