आगरा के KMI में गूंजी ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ की धुन: अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में पं. बनारसी दास चतुर्वेदी को नमन, मॉरीशस से भी जुड़े वक्ता

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ (KMI) में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा: कल, आज और कल’ विषय पर आधारित एक द्विसाप्ताहिक अंतरविषयी अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार का सत्र विशेष रूप से महान साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी पं. बनारसी दास चतुर्वेदी को समर्पित रहा, जहाँ उनके साहित्यिक और सामाजिक योगदान को याद किया गया। प्रवासी साहित्य के पुरोधा पं. बनारसी दास चतुर्वेदी को किया याद कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए आगरा कॉलेज की हिंदी विभाग की आचार्य प्रो. शेफाली चतुर्वेदी ने पं. बनारसी दास चतुर्वेदी के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रवासी साहित्य की बात करते समय पं. बनारसी दास चतुर्वेदी को छोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने गिरमिटिया मजदूरों की दासता से मुक्ति के लिए लगातार प्रयत्न किए, और उनके जीवन पर्यंत संघर्ष ने भारतीय ज्ञान परंपरा और प्रवासी भारतीयों के बीच सेतु का काम किया। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल चतुर्वेदी ने अपने नाना पं. बनारसी दास चतुर्वेदी को याद करते हुए बताया कि राज्यसभा के सदस्य रहते हुए उन्होंने केवल एक ही बात की चिंता की थी – वह किस तरह शहीदों को सम्मान दिला सकें और उनके परिवार के सदस्यों के पालन-पोषण की व्यवस्था कर सकें। विदेशों से भी जुड़े विद्वान, सनातन धर्म के प्रसार पर हुई चर्चा कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मॉरीशस के महात्मा गांधी संस्थान, मोका से वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. तनुजा पदारथ ने ऑनलाइन जुड़कर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि फिजी, दक्षिण अफ्रीका, गयाना, सूरीनाम जैसे देशों में जहाँ भारतीय मूल के लोग पहुँचे, वे अपने साथ भारत से श्री रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, गंगाजल आदि वस्तुएं लेकर गए। उनके आगमन से ही इन देशों में सनातन धर्म और काली माई की परंपरा देखी जाती है। यह भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार को दर्शाता है। विद्वानों ने सराहा चतुर्वेदी का योगदान, भारतीय ज्ञान पर हुई गहन चर्चा बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग से प्रो. गुंजन ने कहा कि एक व्यक्ति जब महापुरुष हो जाता है, तो वह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज का हो जाता है। यह बात पं. बनारसी दास चतुर्वेदी के योगदान पर भी लागू होती है। दयालबाग विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग से डॉ. निशीथ गौड़ ने कहा कि पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी का योगदान भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भ में पुनः परिभाषित करने जा रहा है। साहित्यकार देवेश बाजपेई ने भी पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी और गिरमिटिया प्रवासी भारतीयों पर अपने विचार रखे। सांध्यकालीन सत्र का अध्यक्षीय उद्बोधन प्रो. सुगम आनंद ने दिया। विशिष्ट अतिथि के रूप में आरबीएस कॉलेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. युवराज सिंह उपस्थित थे। आकाशवाणी से अनेन्द्र सिंह और केंद्रीय हिंदी संस्थान से डॉ. राजश्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। केएमआई के संस्कृत विभाग की व्याख्याता डॉ. वर्षा रानी ने भी अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। कार्यशाला का संचालन डॉ. रमा और डॉ. शीरीन ज़ैदी ने कुशलतापूर्वक किया। यह कार्यशाला भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं को उजागर करने और उसे आधुनिक संदर्भ में समझने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रही है।

आगरा में सपा सांसद रामजीलाल सुमन का ‘आक्रामक’ बयान: बोले- “जब तक दलित-पिछड़ों को हिंदू समाज का अंग नहीं समझेंगे, धर्म परिवर्तन नहीं रुकेगा!”

आगरा। आगरा में हालिया धर्मांतरण के खुलासे के बाद अब समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन का एक बेहद आक्रामक बयान सामने आया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि “जब तक हिंदू धर्म के जो ठेकेदार हैं, अपना मिजाज नहीं बदलेंगे, सोचने का तरीका नहीं बदलेंगे, दलितों-पिछड़ों को हिंदू समाज का अंग नहीं समझेंगे, तब तक धर्म परिवर्तन की संभावनाओं को कोई रोक नहीं सकता।” “असमानता के चलते हो रहा धर्मांतरण” सांसद रामजीलाल सुमन ने शनिवार को फिरोजाबाद में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि हिंदू धर्म में व्याप्त असमानता के चलते ही धर्म परिवर्तन हो रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक ऊंच-नीच का भेदभाव रहेगा, तब तक धर्म परिवर्तन होता रहेगा। उनके इस बयान के बाद जब दैनिक भास्कर ने उनके आवास पर इस मुद्दे पर बातचीत की, तो उन्होंने अपनी बात को और विस्तार दिया। “हमारे आचरण, व्यवहार और सोच से हुआ धर्म परिवर्तन” सपा सांसद का कहना है कि जो सनातन के मानने वाले लोग हैं, उन्होंने जब दलितों का मंदिर जाना रोक दिया, तो वे बजाय मंदिर के गुरुद्वारा-मस्जिद में चले गए। उन्होंने साफ कहा कि “कुल मिलाकर ये है कि धर्म परिवर्तन हमारे आचरण की वजह से हुआ…हमारे व्यवहार से हुआ, हमारे संस्कार और सोच से हुआ।” उन्होंने धर्मांतरण का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि हमने कुछ वर्गों को जानबूझकर अलग कर दिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष को मंदिर में नहीं जाने दिया गया, और उज्जैन में बीजेपी के एमएलए को मंदिर में नहीं जाने दिया गया। सांसद ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का भी उदाहरण दिया, कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री आवास छोड़ा तो उसे गंगाजल से साफ किया गया था। रामजीलाल सुमन के अनुसार, “ये सबका सीधा-सीधा मतलब ये है कि कुछ वर्गों को आपने जानबूझकर अलग कर रखा है।” “लालच नहीं, असमानता है धर्मांतरण की वजह” धर्मांतरण के मामले को नया न बताते हुए रामजीलाल सुमन ने तर्क दिया कि अगर धर्मांतरण किसी लालच में होता है या किसी अन्य वजह से होता है तो वे इसके विरोधी हैं। मगर, हमें असल वजह पर जाना होगा कि इस देश में धर्मांतरण क्यों होता है? उनका मानना है कि “देश में धर्मांतरण तब होता है, जब किसी मजहब या धर्म में समानता का भाव नहीं होता। तब लोग दूसरे रास्ते की तलाश करते हैं।” कुछ लोग हिंदू राष्ट्र बनाने की बात करते हैं, इस पर सांसद ने कहा कि इंडोनेशिया के बाद सबसे अधिक मुसलमान हमारे देश में रहते हैं। दलित, पिछड़े लोग हैं। उनका साफ कहना है कि “अगर समानता का व्यवहार नहीं करेंगे तो आप जो करना चाहते हैं, वह नहीं होगा।”

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