Agra News: सेंट एंड्रूज पब्लिक स्कूल में शिक्षक की पिटाई से छात्र को पड़ने लगे दौरे, सिर में गंभीर चोट के बाद प्रिंसिपल से मिले अभिभावक, स्कूल में तनाव

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Agra News सेंट एंड्रूज पब्लिक स्कूल में एक शिक्षक द्वारा छात्र की क्रूरतापूर्वक पिटाई का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्कूल प्रशासन और अभिभावकों के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। आरोप है कि शिक्षक की पिटाई से छात्र के सिर में गंभीर चोट आई, जिसके चलते उसे लगातार दौरे पड़ने लगे हैं। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद स्कूल पर कड़ी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। घटनाक्रम: क्लासरूम से अस्पताल तक VIRAL VIDEO के अनुसार, यह घटना हाल ही में स्कूल के क्लासरूम में हुई। एक शिक्षक ने किसी बात पर नाराज़ होकर एक छात्र की कथित तौर पर पिटाई कर दी। अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षक ने छात्र को सिर पर गहरी चोट पहुँचाई। अभिभावकों का बयान है कि स्कूल से घर लौटने के बाद छात्र की तबीयत बिगड़ गई। शुरुआती जांच के बाद पता चला कि उसे लगातार दौरे पड़ रहे हैं। चिकित्सक ने इस समस्या को सिर की अंदरूनी चोट से जोड़कर देखा है। पीड़ित छात्र को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। इस घटना से पूरे परिवार में भय और आक्रोश का माहौल है। वीडियो वायरल, अभिभावकों का आक्रोश घटना की जानकारी मिलते ही अन्य छात्रों के अभिभावकों में भी गुस्सा फैल गया। इसी बीच, पिटाई से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो में शिक्षक द्वारा बच्चे को अमानवीय तरीके से मारा जाते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, यह वीडियो किस तारीख का है और इसमें कौन सा शिक्षक है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन अभिभावकों ने दावा किया है कि यह वीडियो इसी घटना से संबंधित है। वीडियो वायरल होने के बाद स्कूल में अध्यापकों के हिंसक व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रिंसिपल से मुलाकात और प्रशासन की प्रतिक्रिया छात्र के गंभीर स्वास्थ्य की सूचना मिलने और वीडियो वायरल होने के बाद, पीड़ित छात्र के माता-पिता समेत बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल प्रिंसिपल से मिलने पहुंचे। अभिभावकों ने तत्काल प्रभाव से दोषी शिक्षक को बर्खास्त करने और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। प्रिंसिपल साहिबा खान (या संबंधित प्रिंसिपल) ने अभिभावकों से मुलाकात की और मामले की गहन जांच का आश्वासन दिया है। स्कूल प्रबंधन ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और कहा है कि बच्चों के प्रति किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, अभिभावकों का कहना है कि वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और शिक्षक पर फौरन FIR दर्ज कराई जानी चाहिए। कानूनी और शैक्षिक प्रावधान बाल अधिकार विशेषज्ञों ने कहा है कि स्कूल परिसर में शारीरिक दंड पूरी तरह से प्रतिबंधित है। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत यह एक गंभीर अपराध है। अभिभावकों ने यह भी मांग की है कि शिक्षा विभाग और बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) इस मामले में हस्तक्षेप करे। यह घटना आगरा के स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा और शिक्षकों के व्यवहार पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़ा करती है। पुलिस ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन अभिभावक थाने में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।

आगरा में अमानवीय घटना: मां ने नवजात बच्ची को झाड़ियों में फेंका, राहगीर की सूझबूझ से बची जान!

आगरा। आगरा के एत्मादपुर थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक मां ने अपनी नवजात बच्ची को जन्म के तुरंत बाद सड़क किनारे झाड़ियों में फेंक दिया। यह अमानवीय कृत्य खंदौली क्षेत्र के जलेसर रोड स्थित फाजिलपुर के पास हुआ। गनीमत रही कि एक राहगीर की सूझबूझ और तत्परता से इस मासूम की जान बच गई। झाड़ियों में रोने की आवाज़ सुनकर राहगीर ने बचाया फाजिलपुर निवासी कुलदीप परमार जब उस रास्ते से गुजर रहे थे, तो उन्हें झाड़ियों के भीतर से किसी बच्चे के रोने की आवाज़ सुनाई दी। आवाज सुनकर कुलदीप ने तुरंत झाड़ियों की तलाशी ली और वहाँ कपड़ों में लिपटी एक नवजात बच्ची को पड़ा हुआ पाया। मानवता दिखाते हुए, कुलदीप ने बिना किसी देरी के पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर सूचना दी। अस्पताल में भर्ती कराने के लिए 3 घंटे की मशक्कत सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुँची और बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर सीएचसी खंदौली ले गई। 108 एंबुलेंस चालक प्रदीप कुमार ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत आल यूपी एंबुलेंस ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रवि सिसोदिया को जानकारी दी। रवि सिसोदिया के अनुसार, शुरू में कुछ जिम्मेदार अधिकारियों ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद, रवि सिसोदिया ने जिलाधिकारी (DM) और एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से संपर्क किया। उनके हस्तक्षेप के बाद ही, देर रात बच्ची का एसएन मेडिकल कॉलेज में इलाज शुरू हो सका। लगभग तीन घंटे की मशक्कत और वेलफेयर एसोसिएशन व जिलाधिकारी के अथक प्रयासों के बाद ही इस मासूम बच्ची को चिकित्सा सुविधा मिल पाई। बच्ची का वजन मात्र डेढ़ किलो है और उसे कपड़ों में लपेटकर झाड़ियों में छोड़ दिया गया था। फिलहाल, बच्ची की स्थिति पर डॉक्टरों द्वारा कड़ी नजर रखी जा रही है। यह घटना समाज में संवेदनहीनता और नवजात शिशुओं के प्रति बढ़ती लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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