सीएम योगी की ‘बाबूलाल’ पर तीसरी चुटकी: “अब तो रिटायरमेंट की ओर हैं आप!” – फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर के बढ़ते कद से जोड़कर देखे जा रहे हैं सियासी मायने
आगरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंगलवार को आगरा दौरे में विकास कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ उनके हास्य-विनोद का अंदाज भी देखने को मिला, लेकिन इस बार उनकी चुटकी के पीछे गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। मंडलीय समीक्षा बैठक के दौरान सीएम योगी ने फतेहपुर सीकरी विधानसभा के विधायक चौधरी बाबूलाल पर फिर से चुटकी लेते हुए कहा, “बाबूलाल जी अब तो आप रिटायरमेंट की ओर हो…अब क्या करोगे।” यह पिछले एक साल में तीसरी बार है जब मुख्यमंत्री ने विधायक बाबूलाल पर इस तरह की टिप्पणी की है, जिसे अब फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर के प्रदेश और देश की राजनीति में बढ़ते कद से जोड़कर देखा जा रहा है। जब सीएम ने विधायकों का हालचाल लिया और बाबूलाल पर पड़ी नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को मंडलायुक्त सभागार में विकास के विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की संयुक्त बैठक में शामिल हुए। बैठक में पहुंचने के बाद सीएम योगी ने वहां मौजूद सभी विधायकों का हालचाल लेना शुरू किया। उसी दौरान उनकी नजर फतेहपुर सीकरी से भाजपा विधायक चौधरी बाबूलाल पर पड़ी। सीएम रुके, मुस्कुराए और कहा, “बाबूलाल जी अब तो आप रिटायरमेंट की ओर हो।” मुख्यमंत्री की इस चुटकी पर अन्य विधायकों की हंसी छूट गई, और सीएम योगी भी मुस्कुरा दिए। पिछले एक साल में तीसरी बार मिला ‘सीएम का कटाक्ष’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विधायक चौधरी बाबूलाल पर यह कोई पहली टिप्पणी नहीं है। लोकसभा चुनाव के बाद से यह तीसरा मौका है, जब सीएम योगी ने मजाकिया अंदाज में बाबूलाल को निशाना बनाया है: सियासी गलियारों में चर्चा तेज: क्या बाग़ी तेवर का नतीजा है यह? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस तीसरी चुटकी के गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं, खासकर फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के संदर्भ में। सूत्रों के अनुसार, जब कोई भाजपा में एक बार बागी तेवर दिखाता है तो संगठन भी सतर्क हो जाता है, और उन्हें कई पार्टी कार्यक्रमों में नहीं बुलाया जाता। जानकारों का मानना है कि सांसद राजकुमार चाहर का प्रदेश और देश की राजनीति में कद इतना बढ़ गया है कि उनके खिलाफ जाने वाले को इसका ‘परिणाम’ भुगतना पड़ सकता है। हाल ही में हुए जिलाध्यक्ष की दौड़ में भी सांसद चाहर के समर्थित उम्मीदवार को ही पद प्राप्त हुआ था, जो उनके बढ़ते प्रभाव का एक और संकेत है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ‘रिटायरमेंट’ का यह शब्द वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, और यह टिप्पणी बाबूलाल के भविष्य की राजनीतिक भूमिका या पार्टी के संभावित फैसलों की ओर एक सूक्ष्म इशारा हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस ‘मजाकिया संदेश’ का आगामी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।