आगरा के श्री जगन्नाथ मंदिर में 15वां स्थापना दिवस धूमधाम से मना: नारंगी श्रंगार में सजे भगवान, वृंदावन के संतों ने दिया ‘सच्ची भक्ति’ का संदेश

आगरा। आगरा के कमला नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में बुधवार को 15वां स्थापना दिवस भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र का सूर्य आभा लिए नारंगी वस्त्रों में भव्य श्रंगार किया गया, जिसने भक्तों का मन मोह लिया। पूरे मंदिर परिसर को नारंगी गुड़हल और गुलाब के फूलों से सजाया गया था, जिससे वातावरण अत्यंत मनमोहक हो गया। वृंदावन के संतों ने साझा किए अनुभव, बताया ‘सच्ची भक्ति’ का अर्थ कार्यक्रम की शुरुआत वृंदावन से पधारे परम पूज्य राधा गोविंद महाराज और हरविजय दास ने की। उन्होंने मंदिर की स्थापना से लेकर अब तक के अपने अनुभव साझा किए और भक्तों को सच्ची भक्ति का अर्थ समझाया। संतों ने कहा कि सच्चा भक्त वही है, जो भगवान के साथ-साथ लोगों से भी प्रेम और आदर से पेश आए। उन्होंने जोर देकर कहा, “भक्ति केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि अच्छा व्यवहार, सरलता और जरूरतमंदों की मदद भी है।” गीता का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भगवान ने कहा है कि जो मन और बुद्धि मुझे अर्पित कर दे, वही मेरा प्रिय भक्त है। [— विज्ञापन —] संकीर्तन और भंडारे में उमड़े श्रद्धालु कार्यक्रम के दौरान भक्तों ने ‘हरे राम हरे कृष्णा’ संकीर्तन कर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भगवान का फूल बंगला सजाया गया और भंडारे में सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया। इस पावन अवसर पर आगरा इस्कॉन अध्यक्ष अरविंद प्रभु, वैकुण्ड दास, विश्वास प्रभु, शशांक प्रभु, ओमप्रकाश अग्रवाल, अदिति गौरांगी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भगवान का विशेष श्रंगार और भाव-विभोर कर देने वाला संकीर्तन रहा, जिसमें सभी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हुए। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि यह आयोजन हर साल आस्था और सेवा के भाव के साथ होता है, जिससे भक्तों में एकता, प्रेम और भक्ति की भावना मजबूत होती है। और खबरें भी हैं…

आगरा में जन्माष्टमी महोत्सव की धूम: जनक पार्क बनेगा बांके बिहारी धाम, रामकुमार लक्खा और राजू बाबरा की भजन संध्या; मिलेगा ‘बिहारी जी का खजाना’

आगरा। श्री महालक्ष्मी भक्त मंडल परिवार की ओर से इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी पर आगरा में तीन दिवसीय भव्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार को कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आयोजन समिति के कार्यालय का शुभारंभ किया गया, जिसके बाद दोपहर में जनक पार्क में पदाधिकारियों ने सोलह पृष्ठीय आमंत्रण-पत्र का विमोचन कर पूरे शहर को इस पावन आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। जनक पार्क बनेगा बांके बिहारी मंदिर का स्वरूप जनकपुरी महोत्सव के अध्यक्ष मुरारी प्रसाद अग्रवाल, संयोजक नितिन कोहली, पार्षद पंकज अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, हरिओम बाबा और भाजपा नेता गिर्राज बंसल ने कार्यालय का शुभारंभ किया। अध्यक्ष विशाल बिंदल ने बताया कि 14 से 17 अगस्त तक जनक पार्क को वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के स्वरूप में सजाया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आगरा में ही वृंदावन जैसा अनुभव मिल सके। तीन दिवसीय महोत्सव में होंगे ये खास कार्यक्रम महोत्सव की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया गया कि इन तीन दिनों में कई विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होगा: संयोजक अविनाश राणा ने बताया कि इस भजन संध्या में टी-सीरीज के प्रसिद्ध भजन सम्राट रामकुमार लक्खा, सुप्रसिद्ध गायक राजू बाबरा और कोमल शर्मा अपनी मधुर भजनों से भक्तों को सराबोर करेंगे। भजन संध्या से पहले दोपहर में गोवर्धन के दानघाटी मंदिर से लाई गई श्री गिर्राज जी की शिला का महाअभिषेक होगा, जिसके बाद गिर्राज जी श्रृंगार के भव्य दर्शन होंगे। श्रद्धालुओं को मिलेगा ‘बिहारी जी का खजाना’ और ‘श्याम रसोई’ का आनंद सह-संयोजक नीरज वर्मा ने बताया कि भजन संध्या के दौरान शहर के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की तादाद में आए श्रद्धालु श्याम रसोई का आनंद लेंगे, जहाँ उनके लिए भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही, श्री बांके बिहारी जी मंदिर के सेवारत द्वारा हर भक्त को ‘बिहारी जी का खजाना’ वितरित किया जाएगा, जो इस उत्सव को और भी खास बना देगा। महालक्ष्मी मंदिर ट्रस्टी अनुज कपूर ने सभी का धन्यवाद व्यक्त किया। इस अवसर पर संरक्षक मोहन गर्ग, संस्थापक विकास मित्तल, महामंत्री अतुल अग्रवाल, कोषाध्यक्ष अमित गुप्ता, उपाध्यक्ष अमित अग्रवाल, सियाराम पवन कुमार, रितेश गुप्ता, करतार सिंह शास्त्री, चिराग बंसल, आनंद शर्मा, हरीश पंजवानी, अंशुल अग्रवाल, केके अग्रवाल, एसपी सिंह, रवि, राकेश गुप्ता, उमेश यादव, दीपक सविता, पार्थ, अश्मित, श्रेष्ठ सहित तमाम कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। यह महोत्सव आगरा में कृष्ण भक्ति और सांस्कृतिक एकता का एक अनूठा संगम होगा।

अनिरुद्धाचार्य के ‘विवादित बयान’ पर महिला आयोग आग-बबूला: अध्यक्ष बोलीं- ‘बुद्धि नहीं या शोहरत संभाल नहीं पा रहे, आयोग लेगा संज्ञान!’

आगरा। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य द्वारा युवतियों को लेकर की गई विवादित टिप्पणी पर अब उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अनिरुद्धाचार्य के बयान पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा है कि “या तो उनमें बुद्धि नहीं है या फिर उन्हें कम उम्र में शोहरत मिल गई है, जो वो संभाल नहीं पा रहे हैं।” महिला आयोग ने उनके बयान का संज्ञान लेने की बात कही है। ’25 की अविवाहित का चरित्र ठीक नहीं, 14 में शादी कर दो’ – बयान पर बवाल दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब मथुरा जिले के वृंदावन स्थित गौरी गोपाल आश्रम में एक धार्मिक आयोजन के दौरान कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने कथित तौर पर कहा कि “25 वर्ष की अविवाहित लड़कियों का चरित्र ठीक नहीं होता। लड़कियों की शादी 14 वर्ष की उम्र में ही कर देनी चाहिए, इससे वे परिवार में अच्छे से घुल मिल जाएंगी।” उनके इस बयान पर देशभर में, विशेषकर महिलाओं और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है। महिला आयोग अध्यक्ष बबीता चौहान का तीखा हमला: “विनाशकाल विपरीत बुद्धि” राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने अनिरुद्धाचार्य की टिप्पणी की घोर निंदा करते हुए कहा है कि “उन्होंने महिलाओं और बेटियों को लेकर बेहद हल्की बात की है। कोई भी इतनी गंदी और घटिया भाषा का प्रयोग नहीं कर सकता है।” उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि व्यासपीठ पर बैठकर इतने बड़े कथावाचक ऐसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं, जबकि उन्हें सुनने हजारों की भीड़ आती है, जिसमें 80 फीसदी महिलाएं होती हैं। चौहान ने आगे कहा, “या तो उनमें बुद्धि नहीं है या कम उम्र में इतनी शोहरत मिल गई कि उनकी समझ नहीं आ रहा कि उसका उपयोग कैसे करें।” उन्होंने अनिरुद्धाचार्य के लिए बस इतना कहा कि “विनाशकाल विपरीत बुद्धि।” बबीता चौहान ने साफ कहा कि उनके द्वारा महिलाओं के लिए इससे ज्यादा घटिया शब्दों का चयन नहीं हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा, “आयोग की ओर से हम इसका संज्ञान लेंगे। इस पर जो भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, वह होगी।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल माफी मांग लेना कोई समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि वो खुद भी कथावाचकों के मंच पर जाकर बच्चियों से आह्वान करती हैं कि कथा सुनने आएं, ऐसे में ऐसे कथावाचकों की गलती स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अनिरुद्धाचार्य के बयान की कड़े शब्दों में निंदा की।

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