आगरा में नकली दवा सिंडिकेट पर एसटीएफ का शिकंजा: कॉल डिटेल से पकड़े जाएंगे 50 संदिग्ध

आगरा। ताजनगरी में नकली दवाओं के बड़े सिंडिकेट पर एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मोती कटरा स्थित हे मां मेडिको से 15 बोरे नकली दवाएं बरामद होने के बाद शुरू हुई जांच में कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं। अब तक करीब 50 संदिग्ध एसटीएफ की रडार पर आ चुके हैं, जिनकी संलिप्तता का पता लगाने के लिए एसटीएफ टीम सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। रिश्वत कांड से और गहरी हुई जांच इस केस में उस वक्त नया मोड़ आया, जब जांच के दौरान आरोपियों ने एसटीएफ टीम को 1 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की कोशिश की। इस मामले के सामने आने के बाद औषधि विभाग भी सक्रिय हो गया है और उसने लाइसेंसों की जांच शुरू कर दी है। नकली दवा कारोबार को बेनकाब करने के लिए एसटीएफ ने चार विशेष टीमों का गठन किया है। ये टीमें आगरा सहित आसपास के जिलों में सिंडिकेट के सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं। एसटीएफ का मानना है कि इस गिरोह में कई मेडिकल स्टोर संचालक और एजेंट भी जुड़े हो सकते हैं। मुख्य आरोपियों की तलाश जारी नकली दवा सिंडिकेट में शामिल मुख्य आरोपी हिमांशु अग्रवाल के अलावा, एमएस लॉजिस्टिक्स कंपनी के संचालक यूनिस और वारिस, और जगदीशपुरा के फरहान की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ और थाना कोतवाली की दो टीमें व सर्विलांस टीम लगातार दबिशें दे रही हैं। एसटीएफ उन सभी 50 लोगों की कॉल डिटेल भी निकाल रही है जो हिमांशु अग्रवाल के नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। साथ ही, पुराने नकली दवा मामलों की केस हिस्ट्री भी देखी जा रही है।

“हमारा घर गिरा तो मेट्रो की वजह से!” – आगरा के मोती कटरा में दीवारों पर चिपके दहशत भरे पोस्टर, जिम्मेदार कौन?

आगरा। आगरा के मोती कटरा इलाके में मेट्रो की खुदाई ने कई परिवारों की नींद हराम कर दी है। यहाँ कई मकान इतने जर्जर हो गए हैं कि वे कभी भी गिर सकते हैं, जिसके चलते लोगों में गहरी दहशत है। अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंतित इन परिवारों ने अब अपने घरों की दीवारों पर सीधे-सीधे पोस्टर लगा दिए हैं, जिन पर लिखा है: “यह मकान अगर गिरा तो इसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) की होगी।” मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति, दहशत में जी रहे लोग मकान मालिकों का आरोप है कि मेट्रो की सुरंगों की खुदाई के दौरान बरती गई लापरवाही के कारण उनके भवन जर्जर हो गए हैं। उनकी शिकायत है कि मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है और अब ये मकान रहने लायक नहीं रहे। उन्हें हर पल किसी बड़े हादसे का डर सता रहा है। दयानंद गुप्ता ने बताया कि उनका चार मंजिला घर है और सुरंग की खुदाई से उसमें दरारें आ गई हैं। सरकार से मान्यता प्राप्त इंजीनियर से कराए गए ऑडिट में भी उनके घर को रहने लायक नहीं बताया गया है, जिसके चलते उनका परिवार किराए पर रहने को मजबूर है। मोती कटरा के ही चितरंजन कुमार जैन ने शिकायत की कि UPMRC के अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। UPMRC का दावा: “अब कोई खतरा नहीं, कुछ लोग चाहते हैं पूरा घर नया बन जाए” दूसरी ओर, UPMRC के महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा का इस मामले पर अलग ही रुख है। उनका कहना है कि इन घरों की मरम्मत करा दी गई है और अब सुरंग बन जाने के बाद घरों को कोई खतरा नहीं है। मिश्रा ने यह भी जोड़ा कि कुछ लोग चाहते हैं कि उनका पूरा घर ही नया बनवा दिया जाए। UPMRC के इस दावे और स्थानीय लोगों की दहशत के बीच, मोती कटरा के निवासियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर क्या ठोस कदम उठाता है।

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