आगरा का ऐतिहासिक प्रतापपुरा डाकघर जर्जर: कर्मचारी जान जोखिम में, छत गिरने का खतरा; ASI ने झाड़ा पल्ला

आगरा। आगरा के प्रतापपुरा स्थित ऐतिहासिक डाकघर, जो स्पीड पोस्ट, बैंकिंग, और बिल भुगतान जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करता है, इन दिनों अपनी जर्जर हालत के कारण सुर्खियों में है। ब्रिटिश काल की यह पुरानी इमारत अब इतनी कमजोर हो चुकी है कि इसकी छत किसी भी समय गिर सकती है, जिससे यहाँ काम करने वाले कर्मचारियों और रोज़ाना आने वाले सैकड़ों ग्राहकों की जान खतरे में है। जाल लगाकर काम करने को मजबूर कर्मचारी, आए दिन गिरता है प्लास्टर डाकघर में काम करने वाले कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने एहतियात के तौर पर खुद ही छत के नीचे जाल लगवाया है, ताकि प्लास्टर या कोई भारी मलबा गिरने से किसी को चोट न लगे। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह जाल 6 महीने से भी ज़्यादा समय से लगा हुआ है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “बारिश का मौसम है और हम डर के माहौल में काम कर रहे हैं। यहां कई बार प्लास्टर गिर चुका है, इसीलिए यह जाल लगवाया। लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। अगर कभी हादसा हो गया तो इसका ज़िम्मेदार कौन होगा?” यहाँ अपने ज़रूरी कामों के लिए आने वाले महेश नाम के एक ग्राहक ने भी चिंता जताई, “हम ये जाल काफी समय से यहां देख रहे हैं। छत की हालत तो आप खुद देख रहे हैं कितनी खराब है। लेकिन मजबूरी है, क्योंकि यहां होने वाले काम कहीं और नहीं होते।” ASI ने झाड़ा पल्ला, डाक विभाग पर जिम्मेदारी पोस्टमास्टर शशिकांत ने बताया कि इस छत की मरम्मत लगभग 15 साल पहले हुई थी। उन्होंने जानकारी दी कि जब इस बिल्डिंग की खराब स्थिति के बारे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को अवगत कराया गया, तो उनका कहना था कि यह इमारत उनके अंतर्गत नहीं आती। शशिकांत के अनुसार, “अब हालत काफी खराब हो चुकी है। ऐसे में डाक विभाग को ही इसकी ज़िम्मेदारी लेनी होगी। हमने विभागीय अधिकारियों को इस बारे में अवगत करा दिया है।” यह डाकघर न केवल कर्मचारियों, बल्कि रोज़ आने-जाने वाले सैकड़ों नागरिकों के लिए भी अब खतरे का केंद्र बन गया है। फिलहाल, गिरते प्लास्टर और मलबे के बीच कर्मचारियों द्वारा लगाया गया जाल ही एकमात्र सुरक्षा का सहारा बना हुआ है। प्रशासन और संबंधित विभागों को इस गंभीर स्थिति पर जल्द से जल्द ध्यान देने की ज़रूरत है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। और खबरें भी हैं…

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