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आगरा में यमुना खतरे के निशान के करीब, निचले इलाकों में घुसा पानी; 35 गांवों पर मंडराया संकट

आगरा। आगरा में यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और अब यह खतरे के निशान के करीब पहुँच गया है। मथुरा के गोकुल बैराज से दो दिनों में 39600 लाख लीटर पानी छोड़े जाने के बाद आगरा में यमुना का जलस्तर 493.5 फीट तक पहुँच गया है, जो कि खतरे के निशान (495 फीट) से सिर्फ 1.5 फीट नीचे है। यमुना के उफान पर होने से प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है, और नदी के निचले इलाकों में पानी घुसना शुरू हो गया है। फतेहाबाद और बाह क्षेत्र के खेतों तक पहुंचा पानी यमुना नदी में लगातार पानी छोड़े जाने के कारण वह अपने पूरे उफान पर है। शनिवार और रविवार को गोकुल बैराज से लगभग 1.5 लाख क्यूसेक (लगभग 424.75 करोड़ लीटर) पानी छोड़ा गया है। इसके चलते आगरा के फतेहाबाद और बाह क्षेत्र में नदी किनारे के खेतों तक पानी पहुँचने लगा है, जिससे बाजरे और तिल की फसलों पर संकट मंडरा रहा है। बटेश्वर के घाट पर स्थित महिला स्नानागार पूरी तरह डूब गया है। घाट पर बढ़े हुए जलस्तर को देखते हुए तीर्थ स्थल ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि लोग सीढ़ियों से उतरकर यमुना स्नान न करें। तराई के 35 गांवों में बढ़ी धड़कनें यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से बाह क्षेत्र के लगभग 35 गांवों के लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। तराई के गाँव जैसे रामपुर चंद्रसेनी, बलाई, सुंसार, बिठौली, विक्रमपुर घाट, चरीथा, गढ़ी बरौली, और बाग गुड़ियाना में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इन्हीं गांवों के नदी से जुड़ने वाले रास्तों पर सबसे पहले पानी भरता है। ग्रामीणों की निगाहें लगातार नदी के जलस्तर पर टिकी हुई हैं। पहले चंबल ने दिखाया था रौद्र रूप यमुना से पहले, चंबल नदी भी अपना रौद्र रूप दिखा चुकी थी। चंबल नदी में आई बाढ़ की वजह से आगरा के बाह और पिनाहट के कई गांवों में पानी घुस गया था, जिससे लगभग 6-7 दिनों तक लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। कई लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था। हालांकि, अब चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा ने बताया कि यमुना के जलस्तर पर लगातार कड़ी नजर रखी जा रही है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी तैयारियां पूरी हैं और किसी को भी किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।

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आगरा में ‘नन्हे हीरो’ ने मगरमच्छ से भिड़कर बचाई पिता की जान: 10 साल के अजय ने चंबल नदी में ’12 डंडे’ मारकर भगाया खूंखार जानवर!

आगरा। आगरा के बासौनी क्षेत्र में चंबल नदी किनारे एक 10 साल के बच्चे ने अपनी बहादुरी से सबको चौंका दिया है। शुक्रवार दोपहर जब किसान वीरभान नदी से पानी ले रहे थे, तभी एक खूंखार मगरमच्छ ने उन पर हमला कर दिया और उनका पैर पकड़कर नदी में खींचने लगा। यह देखकर नदी किनारे खड़ा उनका 10 वर्षीय बेटा अजय, बिना डरे मगरमच्छ से भिड़ गया और बबूल के मोटे डंडे से ताबड़तोड़ 10-12 वार कर अपने पिता की जान बचा ली। पानी भरने गए पिता पर अचानक हमला, चीख सुनकर दौड़ा बेटा गांव झरनापुरा हरलालपुर निवासी 35 वर्षीय किसान वीरभान अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहते हैं। शुक्रवार दोपहर वह अपने बेटे अजय और बेटी किरन के साथ चंबल नदी में पानी भरने गए थे। जैसे ही वीरभान ने पानी में बोतल डुबोई, तभी पानी के अंदर छिपे मगरमच्छ ने उन पर अचानक हमला कर दिया और उनका पैर पकड़कर नदी में खींच लिया। वीरभान की चीख सुनकर नदी किनारे खड़े बेटे अजय और बेटी किरन ने भी शोर मचाया। किसान ने मगरमच्छ से खुद को छुड़ाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं छोड़ा रहा था। डंडे मारकर भगाया मगरमच्छ, अजय की बहादुरी से बची जान पिता की चीख-पुकार सुनकर कक्षा चौथी में पढ़ने वाले अजय ने अविश्वसनीय सूझबूझ और बहादुरी का परिचय दिया। उसने पास पड़ा बबूल का मोटा डंडा उठाया और बिना कुछ सोचे नदी में कूद गया। उसने मगरमच्छ को डंडे से लगातार मारना शुरू कर दिया। लगातार हमले के बाद मगरमच्छ ने वीरभान का पैर छोड़ दिया। लेकिन इसके तुरंत बाद मगरमच्छ लाठी मार रहे अजय की तरफ झपटा। अजय ने किसी तरह फुर्ती से मगरमच्छ के हमले से खुद को बचाया और भाग निकला। इतनी देर में किसान वीरभान भी निकलकर बाहर भागे, जिससे दोनों की जान बच गई। पिता के पैर में गहरा घाव, अस्पताल में भर्ती मगरमच्छ के हमले की सूचना पर ग्रामीण भी मौके पर आ गए। मगरमच्छ के हमले से किसान वीरभान के पैर में काफी गहरा जख्म हो गया है। उन्हें उपचार के लिए बाह के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहाँ से डॉक्टरों ने उन्हें आगरा के जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अजय ने अस्पताल में बताया कि वह चौथी कक्षा में पढ़ता है और स्कूल जाने के अलावा अपने पिता के साथ खेतीबाड़ी में भी सहयोग करता है। उसने अपनी और अपने पिता की जान बचाने के लिए मगरमच्छ पर 10-12 डंडे मारने की बात बताई। अजय की बहादुरी की चर्चा पूरे गांव और अस्पताल में हो रही है।

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