आगरा में 21 ग्राम प्रधानों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: पंचायत चुनाव से पहले गर्माया सियासी माहौल, जांच पर भी उठे सवाल

आगरा। आगरा में 21 ग्राम प्रधानों के दामन पर भ्रष्टाचार के दाग लगे हैं, जिनकी जांच चल रही है। इन प्रधानों पर हैंडपंप रिबोर, नाली-खड़ंजा, आरसीसी निर्माण आदि विकास कार्यों में अनियमितता के आरोप हैं। आगामी पंचायत चुनाव को देखते हुए यह भ्रष्टाचार का मुद्दा सियासी गलियारों में गरमा सकता है।


प्रधानों पर आरोपों की लंबी फेहरिस्त, शिकायतकर्ताओं को शक

जिले में कुल 690 ग्राम प्रधान हैं और पंचायतीराज विभाग के पास इनका पूरा लेखा-जोखा रहता है। जैसे-जैसे पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं, गाँव-गाँव में शिकायतें और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विकास भवन में अब तक मिली शिकायतों में 21 प्रधानों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की जांच पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारी प्रधानों को बचाने में जुटे हुए हैं और जांच सही ढंग से नहीं हो रही है। उन्हें मिलीभगत का भी शक है। वहीं, आरोपी प्रधान इन शिकायतों को चुनावी रंजिश का हिस्सा बता रहे हैं। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह का कहना है कि जिला स्तरीय अधिकारियों से जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


इन ब्लॉकों के प्रधानों पर हैं भ्रष्टाचार के आरोप:

  • बरौली अहीर ब्लॉक: नोबरी, दिगनेर, नैनाना ब्राह्मण
  • सैंया ब्लॉक: बिरहरु
  • फतेहाबाद ब्लॉक: बमरौली, सलेमपुर मुड़िया
  • शमसाबाद ब्लॉक: धनौली कलां और लहर पट्टी
  • जगनेर ब्लॉक: सिंगाइच, सरेंधी और नीमैना
  • खंदौली ब्लॉक: पैंतखेड़ा
  • पिनाहट ब्लॉक: करकौली और रेहा
  • फतेहपुर सीकरी ब्लॉक: तेहरा रावत और नगला बहरावती
  • खेरागढ़ ब्लॉक: भैंसोन
  • एत्मादपुर ब्लॉक: बहरामपुर
  • फतेहाबाद ब्लॉक: नगरिया
  • अछनेरा ब्लॉक: गोपाऊ

इन सभी ग्राम पंचायतों के प्रधानों पर विकास कार्यों में अनियमितता के आरोपों की जांच चल रही है।

शपथपत्र के साथ लगती है शिकायत, दोषी मिलने पर कड़ी कार्रवाई

ग्राम प्रधानों के विरुद्ध सीधी शिकायत पर जांच नहीं होती है। शिकायतकर्ता को शपथपत्र देना पड़ता है, जिसके बाद जिलाधिकारी या मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) स्तर के अधिकारी जांच का आदेश देते हैं। जांच भी जिला स्तरीय अधिकारी द्वारा ही कराई जाती है।

यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज हो सकते हैं। वित्तीय अनियमितता मिलने पर उनसे सरकारी धन की वसूली भी की जाती है। पिछले पांच सालों में आगरा जिले में दो प्रधानों के वित्तीय अधिकार अनियमितता के आरोप सिद्ध होने पर सीज किए जा चुके हैं। यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई की जाती है।


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Abhimanyu Singh

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