रक्षाबंधन पर आगरा में बसों की ‘महाभारत’! फ्री सफर मिला पर सीट नहीं, गेट पर लटककर जान जोखिम में डाल रहे यात्री

आगरा। रक्षाबंधन के पवित्र त्योहार पर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने भले ही बहनों को मुफ्त यात्रा और पर्याप्त बसों का दावा किया हो, पर आगरा में ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शुक्रवार को बस अड्डों और स्टैंडों पर भीड़ का ऐसा आलम रहा कि 50 सीटों वाली बसों में 70 से 80 लोग ठूसकर यात्रा करने को मजबूर दिखे। कई यात्रियों को अपनी जान जोखिम में डालकर बस के गेट पर लटककर सफर करना पड़ा। त्योहार के समय बसों की यह मारामारी यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गई है। घंटों इंतज़ार और उमस से बढ़ी मुसीबत यात्रियों को बस पकड़ने के लिए घंटों इंतज़ार करना पड़ा। सुल्तानगंज पुलिया पर फिरोजाबाद के मखनपुर जाने के लिए बस का इंतज़ार कर रही आशा देवी ने बताया कि वह पिछले एक घंटे से बस नहीं मिलने के कारण परेशान हैं। उनके पैर खराब हैं और खड़े होने में दिक्कत हो रही है। जो बसें आ भी रही हैं, वे पूरी तरह से भरी हुई हैं। आईएसबीटी मथुरा हाईवे पर भी नजारा कुछ ऐसा ही था। आगरा से मथुरा जा रहे राम यादव ने बताया कि वे 2 घंटे से बस का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन बस का कोई अता-पता नहीं। ऊपर से उमस भरी गर्मी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। दिल्ली जाने वाले नीरज ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे 2 घंटे से आईएसबीटी पर दिल्ली के लिए बस का इंतज़ार कर रहे थे। जब बस नहीं मिली तो मथुरा हाईवे पर आए, लेकिन यहां भी पिछले 1 घंटे से कोई बस नहीं मिली। वे कुल 3 घंटे से अधिक समय से परेशान हैं और उनके साथ बच्चे भी हैं, जो लगातार भीड़ और गर्मी से बेहाल हो रहे हैं। सीट के लिए दौड़, जानलेवा सफ़र आगरा में त्योहार के समय बसों की यह मारामारी आम लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। बसों में अत्यधिक भीड़ होने की वजह से लोग जानलेवा तरीके से गेट पर लटककर सफर कर रहे हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। वहीं, बस में चढ़ने के लिए महिलाएं भी एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में दौड़ लगाती नजर आईं। यात्रियों का एक बड़ा हिस्सा पूरे सफर के दौरान खड़े होकर ही अपनी मंजिल तक पहुंच रहा है। परिवहन निगम के दावों के बावजूद, रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर यात्रियों को मिल रही यह परेशानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए बेहतर इंतज़ाम किए जाएंगे।

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