
पुरी, ओडिशा। एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे ओडिशा को झकझोर कर रख दिया है। पुरी जिले के बयाबर गांव में एक 15 साल की नाबालिग लड़की को तीन अनजान लड़कों ने अगवा कर, उसके हाथ-पैर बांधे, मुंह में कपड़ा ठूंसा और फिर पेट्रोल छिड़क कर जिंदा जला दिया। ये भयावह वारदात 19 जुलाई की सुबह की है, जब लड़की अपनी दोस्त के घर जा रही थी। सबसे खौफनाक बात ये है कि दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं और दरिंदे खुले घूम रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
‘मुझे बचा लो!’ – मदद की पहली चीख
पीड़िता की जान बचाने वाले पहले शख्स, दुखिश्याम सेनापति, ने उस मंजर को बयां किया, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं। उन्होंने बताया, “मैं अपने घर में चाय पी रहा था। तभी एक लड़की भागते हुए घर की तरफ आई। वो जल रही थी। भागते-भागते वो दरवाजे पर आकर गिर गई। उसने पानी मांगा। बोली- ‘भैया मुझे बचा लो।’ मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या करूं। मैंने उस पर पानी डाला। उसके कपड़े जल गए थे। मेरी बीवी ने उसे घर में लिटाया और कपड़े दिए।”
दुखिश्याम ने बताया कि लड़की बुरी तरह तड़प रही थी। उसने बताया कि वो दोस्त के यहां किताब देने जा रही थी, तभी दो बाइक पर आए तीन लड़कों ने उसे जबरदस्ती अगवा कर सुनसान जगह ले जाकर आग लगा दी। लड़की को पहले भुवनेश्वर एम्स ले जाया गया, लेकिन 70% जली हालत होने के कारण 20 जुलाई को उसे एयरलिफ्ट कर दिल्ली एम्स रेफर कर दिया गया। दिल्ली एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
पुलिस खाली हाथ, सबूत मिले, पर आरोपी नहीं
पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बना दी है और डॉग स्क्वॉड की मदद से आरोपियों की तलाश में जुटी है। घटनास्थल से जली घास, एक बोतल और माचिस जैसी चीजें भी मिली हैं, जिन्हें फोरेंसिक टीम ने सबूत के तौर पर लिया है। दुखद बात ये है कि इतने पुख्ता सबूत मिलने के बावजूद, दो दिन बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
पीड़िता के चचेरे भाई मोहम्मद अशरफ (बदला हुआ नाम) ने बताया, “मेरी बहन बहुत शर्मीली थी। किसी अनजान लड़के से बात करना तो बहुत दूर की बात है। हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं रही। पुलिस उन्हें अब तक खोज नहीं पाई है। उन्हें पकड़कर फांसी दे देना चाहिए।“
पुलिस का बयान: ‘यौन उत्पीड़न नहीं, हर एंगल से जांच’
पुरी पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। IG प्रवीण कुमार ने बताया, “पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। आग लगाने से पहले आरोपियों ने लड़की को केमिकल पिलाने की कोशिश की थी। हालांकि, जांच से पता चला है कि पीड़िता का यौन उत्पीड़न नहीं किया गया।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे इस एंगल से भी जांच कर रहे हैं कि क्या लड़की ने खुद को आग लगाई है। पुरी के SP पिनाक मिश्रा ने कहा कि यह बहुत संवेदनशील मामला है और पीड़िता की तबीयत में सुधार होने के बाद उसका बयान दर्ज किया जाएगा।
राजनीति गरमाई: CM का भरोसा, विपक्ष का CBI जांच की मांग
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विक्टिम के परिवार से मिलकर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया है। उन्होंने SIT गठन और पीड़िता के इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही है।
लेकिन, पूर्व मुख्यमंत्री और BJD नेता नवीन पटनायक ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “जबसे BJP सरकार आई है, राज्य में महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है। यह घटना बताती है कि कानून व्यवस्था चरमरा चुकी है।” कांग्रेस ने तो इस मामले की CBI जांच की मांग तक कर डाली है, यह कहते हुए कि राज्य सरकार “बेटी बचाओ” का नारा देती है, पर बेटियों को न्याय दिलाने में नाकाम है।
एक और दर्दनाक याद: प्रोफेसर से परेशान छात्रा ने खुद को लगाई थी आग
यह भयावह घटना ओडिशा में महिला सुरक्षा पर उठे सवालों को और गहरा कर देती है। एक हफ्ते पहले ही, 12 जुलाई को बालासोर जिले में एक BEd छात्रा ने यौन उत्पीड़न से परेशान होकर खुद को आग लगा ली थी और 14 जुलाई को उसकी मौत हो गई। छात्रा ने अपने HoD समीर राजन साहू पर आरोप लगाया था। इस मामले में आरोपी HoD और कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल दिलीप कुमार घोष को गिरफ्तार किया जा चुका है।
ओडिशा में लगातार हो रही ऐसी घटनाएं समाज और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।