
आगरा। आगरा के जिला अस्पताल में कुक के तौर पर काम करने वाली तीन महिलाओं ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनसे नौकरी पर बने रहने के लिए 50-50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई, और रिश्वत न देने पर उन्हें नोटिस देकर काम से हटा दिया गया है। इन महिलाओं ने अपनी शिकायत कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान तक पहुंचाई है।
15 साल से काम कर रही थीं आउटसोर्सिंग पर
पीड़ित महिलाओं, रानी देवी, अमरजीत कौर और ममता पाल का कहना है कि वे पिछले 15 सालों से डाटा पावर कंप्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर जिला अस्पताल में खाना बनाने का काम कर रही थीं। मरीजों के लिए खाना बनाने के साथ ही वे उसे बांटने का काम भी करती थीं।
ममता पाल ने बताया कि उनके परिवारों की आजीविका पूरी तरह से इसी नौकरी पर निर्भर है। तीनों महिलाओं का आरोप है कि उनसे 50-50 हजार रुपये मांगे गए, और जब उन्होंने पैसे नहीं दिए, तो उन्हें एक महीने का नोटिस देकर काम से हटाया जा रहा है। अमरजीत कौर का भी यही आरोप है कि पैसे न देने के कारण ही उन्हें नोटिस मिला है।
‘एक लाख लेकर नए कुक को रखा’ और कैबिनेट मंत्री ने लिखा पत्र
महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल के अधिकारियों ने एक लाख रुपये लेकर एक नए कुक को नौकरी पर रख लिया है। उनका कहना है कि यह उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र साधन है और इस कार्रवाई से उनके परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रानी देवी ने बताया कि उन्होंने कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य से मुलाकात कर अपनी पूरी समस्या बताई। इस पर कैबिनेट मंत्री ने जिलाधिकारी (DM) को पत्र लिखकर तीनों महिलाओं को फिर से बहाल करने का अनुरोध किया है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इस पर एक महीने का समय मांगा है। महिलाएं अपनी बात पर अड़ी हैं कि उन्हें सिर्फ इसलिए हटाया गया है क्योंकि उन्होंने रिश्वत देने से इनकार कर दिया। यह मामला जिला अस्पताल में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर रहा है।